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स्कूलों को बजट चाहिए, अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा
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Schools need budget, parents protect children
- फोटो : BANDA
बांदा। 19 अक्तूबर से खुल रहे स्कूल/कॉलेजों को लेकर प्रधानाचार्य और अभिभावक दोनों पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। प्रधानाचार्यों का कहना है कि विशेष व्यवस्थाओं के लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया गया है। उधर, अभिभावकों की शर्त है कि वह अपने बच्चों को तभी स्कूल भेजेंगे जब कोरोना महामारी से बचाव की सारी व्यवस्थाएं चुस्त और दुरुस्त हों। प्रधानाचार्य और अभिभावकों ने अपने मन की यह बातें बुधवार को ‘अमर उजाला’ द्वारा आयोजित वेबिनार में कीं।
शासन को देना चाहिए बजट
आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य मेजर मिथलेश कुमार पांडेय का कहना है कि सैनिटाइजर, मास्क और कक्षाओं में क्षमता से 50 फीसदी छात्रों को बैठाने की व्यवस्था आदि के लिए स्कूलों के पास पैसा कहां से आएगा? शासन को इसके लिए बजट भी देना चाहिए।
दो शिफ्टों में कक्षाएं संभव नहीं
डीएवी इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि दो शिफ्टों में कक्षाएं व्यवहारिक नहीं है। 50 फीसदी छात्रों को बुलाने से सभी विषय रोज पढ़ाना भी संभव नहीं है। इस विभाजन से छूट मिलनी चाहिए। हफ्ते में तीन दिन अतिरिक्त कक्षा चलाकर कोर्स पूरा कर सकते हैं।
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कैसे गाइड लाइन का होगा पालन
जीआईसी, बांदा के प्रधानाचार्य बृजराज सिंह यादव ने कहा कि उनके कालेज की बिल्डिंग पुरानी और जर्जर है। पर्याप्त कमरे नहीं हैं। कोरोना गाइड लाइन का पालन तभी संभव हो पाएगा जब खुले मैदान में कक्षाएं चलाई जाएं। इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है।
विद्यालय खोलने का फैसला सही
फात्मा गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य राबिया खानम का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई 40 प्रतिशत भी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में विद्यालय खोलने का फैसला सही है, लेकिन दो पालियों में कक्षाएं और हर बार कक्षाओं का सैनिटाइजेशन कराना मुश्किल काम है।
गाइड लाइन का करेंगे पालन
राजकीय हाईस्कूल, बड़ोखर बुजुर्ग प्रधानाचार्य डॉ. शशि मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और भविष्य दोनों ही हमारी जिम्मेदारी हैं। गाइड लाइन के अनुसार स्कूल संचालन के लिए रोस्टर तैयार कर लिया है।
बच्चों के स्वास्थ्य की गारंटी ले स्कूल
सीता तिवारी (खिन्नी नाका) का कहना है कि विद्यालय परिवार बच्चों के स्वास्थ्य की गारंटी लें तभी स्कूल बुलाए। कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है। शासन की गाइड लाइन का भरपूर पालन होना चाहिए।
समय-समय पर व्यवस्थाएं की हो जांच
स्नेहा भारद्वाज (केन रोड) ने कहा कि विद्यालय के साथ प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर व्यवस्थाओं को चेक करें। जिससे बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य पर कोई गलत असर न पड़ सके।
विद्यालय खोलने का निर्णय सही नहीं
निशा गुप्ता (छोटी बाजार) ने कहा कि मौजूदा हालात में विद्यालय खोलने का निर्णय सही नहीं है। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इतना बड़ा रिस्क फिलहाल ठीक नहीं। शिक्षा जरूरी है, लेकिन पहले सेहत।
व्यवस्थाओं के लिए दें फंड
जेपी गुप्ता का कहना है कि शासन को गाइड लाइन के साथ ही व्यवस्थाओं के लिए स्कूलों को कुछ फंड भी देना चाहिए। ताकि स्कूल बचाव संबंधी व्यवस्थाओं में पैसों की बाधा न बता सकें।
अभिभावकों से लेना चाहिए सुझाव
दुर्गेश तिवारी (आवास विकास) ने कहा कि गाइड लाइन जारी करने से पहले अभिभावकों के सुझाव मांगना चाहिए थे। तमाम अभिभावकों ने लिखित रूप से सहमति तो दे दी है, लेकिन अपने बच्चों के प्रति वह चिंतित हैं।
कोर्स पूरा करने की चुनौती
मुजम्मिल खां (मर्दन नाका) ने बताया कि कई माह से बाधित चल रही कक्षाओं के बाद अब सबसे बड़ा चैलेंज कोर्स पूरा करने का होगा। बच्चों को सेलेबस पूरा करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।
40 फीसदी बच्चे ही कर पा रहे थे पढ़ाई
तारिक खां (ऊंट मोहाल) ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा व्यवहारिक नहीं थी। एंड्रायड फोन गरीब बच्चों के पास नहीं है। सिर्फ 40 प्रतिशत बच्चे ही ऑनलाइन शिक्षा ले रहे थे। नेटवर्क की समस्या से पढ़ाई पल्ले नहीं पड़ती थी।
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शासन को देना चाहिए बजट
आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य मेजर मिथलेश कुमार पांडेय का कहना है कि सैनिटाइजर, मास्क और कक्षाओं में क्षमता से 50 फीसदी छात्रों को बैठाने की व्यवस्था आदि के लिए स्कूलों के पास पैसा कहां से आएगा? शासन को इसके लिए बजट भी देना चाहिए।
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दो शिफ्टों में कक्षाएं संभव नहीं
डीएवी इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि दो शिफ्टों में कक्षाएं व्यवहारिक नहीं है। 50 फीसदी छात्रों को बुलाने से सभी विषय रोज पढ़ाना भी संभव नहीं है। इस विभाजन से छूट मिलनी चाहिए। हफ्ते में तीन दिन अतिरिक्त कक्षा चलाकर कोर्स पूरा कर सकते हैं।
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कैसे गाइड लाइन का होगा पालन
जीआईसी, बांदा के प्रधानाचार्य बृजराज सिंह यादव ने कहा कि उनके कालेज की बिल्डिंग पुरानी और जर्जर है। पर्याप्त कमरे नहीं हैं। कोरोना गाइड लाइन का पालन तभी संभव हो पाएगा जब खुले मैदान में कक्षाएं चलाई जाएं। इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है।
विद्यालय खोलने का फैसला सही
फात्मा गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य राबिया खानम का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई 40 प्रतिशत भी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में विद्यालय खोलने का फैसला सही है, लेकिन दो पालियों में कक्षाएं और हर बार कक्षाओं का सैनिटाइजेशन कराना मुश्किल काम है।
गाइड लाइन का करेंगे पालन
राजकीय हाईस्कूल, बड़ोखर बुजुर्ग प्रधानाचार्य डॉ. शशि मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और भविष्य दोनों ही हमारी जिम्मेदारी हैं। गाइड लाइन के अनुसार स्कूल संचालन के लिए रोस्टर तैयार कर लिया है।
बच्चों के स्वास्थ्य की गारंटी ले स्कूल
सीता तिवारी (खिन्नी नाका) का कहना है कि विद्यालय परिवार बच्चों के स्वास्थ्य की गारंटी लें तभी स्कूल बुलाए। कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है। शासन की गाइड लाइन का भरपूर पालन होना चाहिए।
समय-समय पर व्यवस्थाएं की हो जांच
स्नेहा भारद्वाज (केन रोड) ने कहा कि विद्यालय के साथ प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर व्यवस्थाओं को चेक करें। जिससे बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य पर कोई गलत असर न पड़ सके।
विद्यालय खोलने का निर्णय सही नहीं
निशा गुप्ता (छोटी बाजार) ने कहा कि मौजूदा हालात में विद्यालय खोलने का निर्णय सही नहीं है। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इतना बड़ा रिस्क फिलहाल ठीक नहीं। शिक्षा जरूरी है, लेकिन पहले सेहत।
व्यवस्थाओं के लिए दें फंड
जेपी गुप्ता का कहना है कि शासन को गाइड लाइन के साथ ही व्यवस्थाओं के लिए स्कूलों को कुछ फंड भी देना चाहिए। ताकि स्कूल बचाव संबंधी व्यवस्थाओं में पैसों की बाधा न बता सकें।
अभिभावकों से लेना चाहिए सुझाव
दुर्गेश तिवारी (आवास विकास) ने कहा कि गाइड लाइन जारी करने से पहले अभिभावकों के सुझाव मांगना चाहिए थे। तमाम अभिभावकों ने लिखित रूप से सहमति तो दे दी है, लेकिन अपने बच्चों के प्रति वह चिंतित हैं।
कोर्स पूरा करने की चुनौती
मुजम्मिल खां (मर्दन नाका) ने बताया कि कई माह से बाधित चल रही कक्षाओं के बाद अब सबसे बड़ा चैलेंज कोर्स पूरा करने का होगा। बच्चों को सेलेबस पूरा करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।
40 फीसदी बच्चे ही कर पा रहे थे पढ़ाई
तारिक खां (ऊंट मोहाल) ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा व्यवहारिक नहीं थी। एंड्रायड फोन गरीब बच्चों के पास नहीं है। सिर्फ 40 प्रतिशत बच्चे ही ऑनलाइन शिक्षा ले रहे थे। नेटवर्क की समस्या से पढ़ाई पल्ले नहीं पड़ती थी।

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

Schools need budget, parents protect children- फोटो : BANDA

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