फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   scarce manuscript has been invinted

योग साधक चंददास की दुर्लभ हस्तलिखित पांडु लिपि खोजी

Mon, 22 Jun 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 22 Jun 2015 12:32 AM IST
विज्ञापन
scarce manuscript has been invinted

चंददास शोध संस्थान के अनुसंधानकर्ता और कवि डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने 18वीं शताब्दी के महान योग साधक चंददास की दुर्लभ हस्तलिखित पांडु लिपि शिव सिद्ध सारंगी ध्यावसी खोजने का दावा किया है। यह भी दावा किया है कि विश्व साहित्य में अभी तक योग दर्शन का ऐसा कोई ग्रंथ प्राप्त नहीं है, जिसमें वैदिक साहित्य की मधुविद्या, संजीविनी विद्या और देह को अजर-अमर बनाने की विधि का उद्घाटन किया गया हो।

विज्ञापन


डा. चंद्रिका के मुताबिक इस दुर्लभ पांडु लिपि में योग साधना के द्वारा प्राण वायु पर जीवित रहने तथा भूख-प्यास को जीतकर देह को अजर-अमर बनाने का दावा किया गया है। वैदिक काल की यह योग विद्या आज लुप्तप्राय है। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने भी इस विद्या का उल्लेख किया है कि- जाते लाग न क्षुधा पिपासा। हालांकि उसकी प्रक्रिया को नहीं बताया गया है।
विज्ञापन


डा. ललित ने कहा कि वस्तुत: योग साधना निरोग साधना है। मनुष्य के संपूर्ण विकास की साधना है। जाति और धर्म से मुक्त करने वाली चेतना है। योग को जनता के लिए सरल और सुगम बनाने के लिए 18वीं शताब्दी में शमशाद नामक मुस्लिम फकीर ने संत चंददास से योग के इस मकान ग्रंथ की रचना का अनुरोध किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


नतीजे में फतेहपुर जनपद के हस्वा नामक कस्बे में संवत 1811 में हाथ से बने प्राचीन कागज पर काली स्याही से 8 गुणा 4 इंच के आकर के गुटके में दोहा, चौपाई, छंदों में 136 पृष्ठों की यह पुस्तक संत चंददास की कुटी में लिखी गई। यहां संत चंददास ने अन्य आहार छोड़कर योग की दुर्लभ साधना की थी और भूख-प्यास को जीतकर परकाया प्रवेश, भूमि प्रवेश, अंतरिक्ष गमन, इच्छानुसार जीवन और विश्व शांति के लिए भारतीय एकता का संदेश दिया था।

डा. ललित ने बताया कि इस ग्रंथ में काया मंथन की प्रविधि बताई गई है। सरल और सुबोध शैली मेें जीवन के रहस्यों को उद्घाटित किया गया है। उदाहरण के लिए-चिंता हरै चेत जब आवै, आशा मिटै ज्ञान गुरु पावै। तृष्णा मिटै संत उपदेशा, लोभ मिटै जब पड़ै कलेसा। मोह मिटै विज्ञान विचारी, क्षुधा मिटै तन पवन हारी।


इस दुर्लभ पांडु लिपि की खोज को पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के पाठ्यक्रम सलाहकार और स्वामी रामदेव के बोर्ड आफ मैनेजमेंट के सदस्य डा. आरएस त्रिपाठी ने विश्व की महानतम खोज बताते हुए घोषणा की है कि इस दुर्लभ ग्रंथ को योग के अध्ययन और अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। ताकि योग को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करने में सहायता मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed