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गड्ढों पर सड़क पहली बार देखी
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बांदा/अतर्रा। मुख्यमंत्री के रूप में बुंदेलखंड आए कल्याण सिंह यहां की बदहाल सड़कों पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने में खुद को रोक नहीं सके थे। बोले, सड़क पर गड्ढे तो बहुत देखे थे, लेकिन गड्ढों पर सड़क पहली बार देख रहे हैं। यह बात उन्होंने धर्मनगरी चित्रकूट में कही थी।
उधर, विपक्ष में रहते हुए गिरफ्तारी होने पर उन्होंने कई दिन बांदा जेल में भी बिताए। 1992 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान चित्रकूट की सीमा मुरका के पास कल्याण सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बांदा जेल लाया गया। कई दिन यहां रहे।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम पांडेय बताते हैं कि 1982 में चित्रकूट के पोद्दार इंटर कॉलेज में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर था। उसमें कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी आदि नेता आए हुए थे। उन दिनों चित्रकूट अलग जनपद नहीं था।
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बांदा में ही शामिल था। 1991 में मायावती के समर्थन से मुख्यमंत्री बने कल्याण सिंह कार्यकर्ता सम्मेलन में शरीक होने चित्रकूट आए। पांडेय बताते हैं कि उस समय वह युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष थे। सरकारी वाहनों के काफिले के साथ कल्याण सिंह रामघाट के नजदीक स्थित गेस्ट हाउस जा रहे थे। सड़क बहुत खराब थी।
तब उन्होंने कहा था कि, सड़क पर गड्ढे तो बहुत देखे थे, लेकिन गड्ढों पर सड़क पहली बार देख रहे हैं। 1992 में बाढ़ का जायजा लेने आए यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से एक अधिकारी का तबादला करने की मांग लेकर अशोक त्रिपाठी जीतू और गिरिजेश तिवारी उनके हेलीकाप्टर पर लटक गए। जीतू बताते हैं कि कल्याण सिंह ने उनसे कहा कि जाओ पांच बजे तक तबादले का आदेश आ जाएगा, यही हुआ।
कार्यकर्ताओं की परख में माहिर थे कल्याण
बांदा। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता बताते हैं कि 1992 में आई भीषण बाढ़ का जायजा लेने मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह बांदा आए थे। गुप्त ने उन्हें तलवार भेंट की थी। उनमें कार्यकर्ताओं की परख जबरदस्त थी। 1993 में गुप्त जेल में थे।
तभी उन्हें बांदा सदर विधान सभा सीट से भाजपा का टिकट दिया गया, लेकिन एक बड़ी भाजपा नेत्री के दबाव में टिकट बदल दिया गया। बकौल संतोष गुप्त, कल्याण सिंह ने कहा था कि संतोष जैसे कार्यकर्ता को जब तक बांदा की जनता विधायक नहीं बनाएगी, तब तक वह टिकट दिलाते रहेंगे। वर्ष 2002 में गुप्त को पुन: टिकट दिया गया।
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उधर, विपक्ष में रहते हुए गिरफ्तारी होने पर उन्होंने कई दिन बांदा जेल में भी बिताए। 1992 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान चित्रकूट की सीमा मुरका के पास कल्याण सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बांदा जेल लाया गया। कई दिन यहां रहे।
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भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम पांडेय बताते हैं कि 1982 में चित्रकूट के पोद्दार इंटर कॉलेज में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर था। उसमें कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी आदि नेता आए हुए थे। उन दिनों चित्रकूट अलग जनपद नहीं था।
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बांदा में ही शामिल था। 1991 में मायावती के समर्थन से मुख्यमंत्री बने कल्याण सिंह कार्यकर्ता सम्मेलन में शरीक होने चित्रकूट आए। पांडेय बताते हैं कि उस समय वह युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष थे। सरकारी वाहनों के काफिले के साथ कल्याण सिंह रामघाट के नजदीक स्थित गेस्ट हाउस जा रहे थे। सड़क बहुत खराब थी।
तब उन्होंने कहा था कि, सड़क पर गड्ढे तो बहुत देखे थे, लेकिन गड्ढों पर सड़क पहली बार देख रहे हैं। 1992 में बाढ़ का जायजा लेने आए यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से एक अधिकारी का तबादला करने की मांग लेकर अशोक त्रिपाठी जीतू और गिरिजेश तिवारी उनके हेलीकाप्टर पर लटक गए। जीतू बताते हैं कि कल्याण सिंह ने उनसे कहा कि जाओ पांच बजे तक तबादले का आदेश आ जाएगा, यही हुआ।
कार्यकर्ताओं की परख में माहिर थे कल्याण
बांदा। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता बताते हैं कि 1992 में आई भीषण बाढ़ का जायजा लेने मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह बांदा आए थे। गुप्त ने उन्हें तलवार भेंट की थी। उनमें कार्यकर्ताओं की परख जबरदस्त थी। 1993 में गुप्त जेल में थे।
तभी उन्हें बांदा सदर विधान सभा सीट से भाजपा का टिकट दिया गया, लेकिन एक बड़ी भाजपा नेत्री के दबाव में टिकट बदल दिया गया। बकौल संतोष गुप्त, कल्याण सिंह ने कहा था कि संतोष जैसे कार्यकर्ता को जब तक बांदा की जनता विधायक नहीं बनाएगी, तब तक वह टिकट दिलाते रहेंगे। वर्ष 2002 में गुप्त को पुन: टिकट दिया गया।