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Banda News: खेत बचाओ अभियान शुरू, 30 नवंबर तक होंगी 56 किसान गोष्ठियां
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फोटो-16-किसानों को जानकारी देते उप निदेशक कृषि डॉ. अभय कुमार यादव। स्रोत: कृषि विभाग
- फोटो : शहर के पुराना 132 केवी पावर सब स्टेशन का निरीक्षण करते एसडीएम महेश कुमार व अधीक्षक अभियंता जितेंद्र ढूल और कार्यकारी अभियंता दयाचंद रोहिल्ला।
बांदा। कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से बुधवार को खेत बचाओ अभियान शुरू हुआ। 30 नवंबर तक चलने वाले अभियान में जिले के प्रत्येक विकासखंड में सात-सात गोष्ठियां होंगी। प्रतिदिन दो कार्यक्रमों के हिसाब से कुल 56 गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। अभियान की शुरुआत बड़ोखर खुर्द विकासखंड के कनवारा गांव से हुई। इसमें करीब 150 किसानों ने भाग लिया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सिंह ने रबी की दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती के तकनीकी तरीके बताए। उन्होंने बीज व भूमि शोधन में ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बेसियाना, एनपीवी और बायोफर्टिलाइजर के उपयोग की जानकारी दी। फल एवं उद्यानिक फसलों में कीट-रोग नियंत्रण के एकीकृत उपाय भी बताए।
उप कृषि निदेशक डॉ. अभय कुमार सिंह यादव ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिलने वाले किसानों को विभागीय कार्यालय में बने हेल्पडेस्क से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री जल्द कराने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए जागरूक किया। उन्होंने खेती की लागत घटाने के लिए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग का सुझाव दिया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जैविक व प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, फसल अवशेष प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति किसानों को जागरूक करना है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सिंह ने रबी की दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती के तकनीकी तरीके बताए। उन्होंने बीज व भूमि शोधन में ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बेसियाना, एनपीवी और बायोफर्टिलाइजर के उपयोग की जानकारी दी। फल एवं उद्यानिक फसलों में कीट-रोग नियंत्रण के एकीकृत उपाय भी बताए।
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उप कृषि निदेशक डॉ. अभय कुमार सिंह यादव ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिलने वाले किसानों को विभागीय कार्यालय में बने हेल्पडेस्क से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री जल्द कराने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए जागरूक किया। उन्होंने खेती की लागत घटाने के लिए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग का सुझाव दिया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जैविक व प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, फसल अवशेष प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति किसानों को जागरूक करना है।
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