फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Roadways running the Kondam buses

कंडम बसों को ठोंक-पीटकर चला रहा रोडवेज

Sat, 11 Nov 2017 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बांदा
अमर उजाला ब्यूरो बांदा Updated Sat, 11 Nov 2017 11:32 PM IST
विज्ञापन
Roadways running the Kondam buses
केन नदी में गिरी बस खटारा थी। - फोटो : अमर उजाला
रोडवेज सालों पुरानी बसों को ठोंक पीटकर जर्जर हालत में सड़कों पर दौड़ रहा हैं। ऐसे में यात्रियों और चालक-परिचालक की जान खतरे में रहना स्वाभाविक है। केन नदी में गिरी बस खटारा थी। वह अपने निर्धारित किलोमीटर पूरी कर चुकी थी। ठोंक-पीटकर और रंग-रोगन कर उसे चलाया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक बांदा डिपो में अभी 17 बसें और इसी स्थिति में यात्रियों को ढो रही हैं।
विज्ञापन


दुर्घटना की शिकार हुई बांदा डिपो की बस यूपी-90 टी, 9130 रोडवेज रिकार्डों के मुताबिक लगभग 11 साल से चल रही है। 10 लाख से कई हजार ज्यादा किलोमीटर चल चुकी है। जबकि रोडवेज 10 लाख किलोमीटर तक चल चुकीं बसों को कंडम घोषित कर कबाड़ में नीलाम कर देता है। बस शुक्रवार को शाम करीब 4 बजे बांदा से सवारियां लेकर जसपुरा गई थी। बांदा डिपो के फोरमैन जीतलाल वैश्य ने बताया कि बस को रवाना होने से पहले वर्कशाप में उसकी जांच कर ली गई थी। फोरमैन के मुताबिक किसी भी बस के रवाना होने से पहले डिपो के दो तकनीकी कर्मचारी नियमित रूप से बस को चेक करते हैं। ब्रेक, कमानी, स्टेयरिंग, मोबिल आयल आदि जांचा-परखा जाता है।
विज्ञापन


दुर्घटनाग्रस्त हुई बस के कंडम हो चुकने के बाद भी सड़क पर चलाने के सवाल पर फोरमैन का कहना है कि निगम मुख्यालय ने 11 लाख किलोमीटर तक बसें चलाने की अनुमति दे रखी है। हालांकि ऐसे किसी आदेश की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। बांदा डिपो से अतर्रा, पैलानी, खप्टिहा, बबेरू, महोबा, हमीरपुर आदि रूटों पर चलने वाली बसों में से 17 बसें ऐसी ही जर्जर हालत में हैं। वह कंडम की श्रेणी में हैं। फिर भी उन्हें चलाकर यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन




फौरी तौर पर दी मदद
बस हादसे में जान गंवा बैठा चालक रामनरेश संविदा पर था। छह माह पहले ही उसे रखा गया था। परिवहन निगम के चित्रकूटधाम क्षेत्रीय प्रबंधक केेके शर्मा ने बताया कि चालक के अंतिम संस्कार आदि के लिए परिजनों को निगम की ओर से फौरी तौर पर 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में संस्तुति के बाद निगम की ओर से पत्नी को साढे़ चार लाख रुपये और दिए जाएंगे। कंडक्टर के परिजनों को 20 हजार और चारों घायलों को 5-5 हजार रुपये दिए हैं।




दिन में होता हादसा तो कई जानें जातीं
रोडवेज बस के पुल से केन नदी में गिरने से घायल हुए बस यात्रियों ने बताया कि दुर्घटना के समय बस की रफ्तार काफी थी। इसी रफ्तार में चालक ने खटारा बस को ट्रक के आगे निकालना चाहा और स्टेयरिंग पर काबू खो बैठा। घायल यात्री धर्म सिंह, बद्री प्रसाद, जय सिंह और होरीलाल आदि ने बताया कि बस में वही गिनेचुने लोग थे। सारी सीटें खाली थीं। सुबह ठंड और कोहरा होने से यात्री नहीं थे। यही हादसा दिन में होता तो शायद जनहानि ज्यादा होती। यात्रियों ने बस चालक की लापरवाही भी बताई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed