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डग्गामार वाहनों के आगे रोडवेज अधिकारी जता रहे लाचारी
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Roadways officers are expressing helplessness in front of boggy vehicles
- फोटो : BANDA
बांदा। रोडवेज विभाग निजी बसों और डग्गामार वाहनों के आगे लाचारी दिखा रहा है। बिसंडा, ओरन, बबेरू आदि रूटों पर इन दिनों सहालग के चलते यात्रियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसके बाद भी रोडवेज अधिकारी यहां बसें नहीं बढ़ा रहे हैं।
बांदा डिपो से 125 बसों का बेड़ा है। बसों के संचालन का दारोमदार परिवहन अधिकारियों पर है। अक्सर जन प्रतिनिधियों के दबाव में जरूरतमंद रूटों पर बसें चलाई जाती हैं या फेरे बढ़ाए जाते हैं। बांदा मुख्यालय के बाद अतर्रा जनपद का इकलौता नगर पालिका क्षेत्र है। बड़ी आबादी के साथ धान की मंडी है। राजनीतिक हस्तियों से भी आबाद है। यहां से बिसंडा, ओरन आदि के लिए रोजाना सैकड़ों यात्री आवागमन हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद से रोडवेज ने यहां अपनी बसों में भारी कटौती कर दी है। यात्रियों को निजी डग्गामार वाहनों के हवाले कर दिया है। अधिक किराया ऐंठने के बाद भी इन निजी वाहनों में यात्रियों की भरमार है।
उधर, रोडवेज अधिकारी डग्गामार वाहनों का रोना रो रहे हैं। पिछले हफ्ते सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र के साथ 128 प्राइवेट वाहनों की सूची नंबरों सहित भेजी है। कहा है कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अवैध वाहन चल रहे हैं। वहीं, रोडवेज अधिकारी डग्गामार वाहनों पर शासन के सख्त रुख का हवाला तो दे रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस को साथ लेकर अवैध वाहनों पर लगाम कसने में संजीदगी से कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद का कहना है कि डग्गामार और अवैध वाहनों की सूची भेज दी गई है। उच्चाधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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बांदा डिपो से 125 बसों का बेड़ा है। बसों के संचालन का दारोमदार परिवहन अधिकारियों पर है। अक्सर जन प्रतिनिधियों के दबाव में जरूरतमंद रूटों पर बसें चलाई जाती हैं या फेरे बढ़ाए जाते हैं। बांदा मुख्यालय के बाद अतर्रा जनपद का इकलौता नगर पालिका क्षेत्र है। बड़ी आबादी के साथ धान की मंडी है। राजनीतिक हस्तियों से भी आबाद है। यहां से बिसंडा, ओरन आदि के लिए रोजाना सैकड़ों यात्री आवागमन हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद से रोडवेज ने यहां अपनी बसों में भारी कटौती कर दी है। यात्रियों को निजी डग्गामार वाहनों के हवाले कर दिया है। अधिक किराया ऐंठने के बाद भी इन निजी वाहनों में यात्रियों की भरमार है।
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उधर, रोडवेज अधिकारी डग्गामार वाहनों का रोना रो रहे हैं। पिछले हफ्ते सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र के साथ 128 प्राइवेट वाहनों की सूची नंबरों सहित भेजी है। कहा है कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अवैध वाहन चल रहे हैं। वहीं, रोडवेज अधिकारी डग्गामार वाहनों पर शासन के सख्त रुख का हवाला तो दे रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस को साथ लेकर अवैध वाहनों पर लगाम कसने में संजीदगी से कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद का कहना है कि डग्गामार और अवैध वाहनों की सूची भेज दी गई है। उच्चाधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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