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बांदा: गंदे नालों से नदियों का पानी हो रहा जहरीला
Mon, 13 Feb 2023 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 13 Feb 2023 12:10 AM IST
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बांदा। नदियों में गिर रहे गंदे नालों और बालू खनन से चित्रकूटधाम मंडल की नदियों का पानी जहरीला होता जा रहा है। हालांकि अभी यहां बालू का खनन नहीं हो रहा, लेकिन मध्य प्रदेश में बालू का अंधाधुंध खनन हो रहा है। आलम यह है कि बिना फिल्टर के नदियों का पानी सीधे पीने योग्य नहीं रहा। जबकि पानी से कई संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।
चित्रकूटधाम मंडल में प्रमुख नदियां केन, यमुना और बेतवा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हर माह चित्रकूटधाम मंडल की नदियों के पानी की जांच कराई जाती है। पानी का नमूना जांच के लिए झांसी भेजा जाता है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बांदा की केन और हमीरपुर की बेतवा नदी का पानी बेहद प्रदूषित है। टोटल डिजॉल्वड सॉलिड (टीडीएस) की मात्रा करीब 600-900 प्वाइंट प्रति लीटर पहुंच गया है जबकि यह अधिकतम 300 प्वाइंट होना चाहिए। इसके अलावा टोटल हार्डनेस भी 150 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर है। यह 80-90 मिलीग्राम होना चाहिए।
इसी तरह हमीरपुर में बेतवा नदी के पानी में करीब 900 टीडीएस की मात्रा पाई गई। केन नदी में इसकी मात्रा 600 से ज्यादा है। केन नदी के पानी में हार्डनेस 170.40 और बेतवा नदी में 152.02 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। जानकारों के मुताबिक 300 के अंदर टीडीएस की मात्रा सामान्य तौर पर नुकसानदायक नहीं होती। इसके ऊपर मात्रा होने पर कई बीमारियां हो सकती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की मुताबिक बेतवा नदी (हमीरपुर) में डिजॉल्व ऑक्सीजन 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर और केन नदी (बांदा) में यह मात्रा 6.2 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
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इनसेट
फोटो-12बीएनडीपी-06 : डाॅ.भूपेंद्र सिंह।
प्रदूषित और खारा पानी शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। इस पानी के पीने से ऐसे तत्व भी शरीर में पहुंच जाते हैं जिनकी जरूरत नहीं होती। पेट संबंधी शिकायतें बढ़ जाती हैं। रोगों में गैस्ट्रोएंजाइटिस, डिहाइड्रेशन, उल्टी व बुखार आदि शामिल हैं। इसके अलावा अधिक हार्डनेस की मात्रा वाला पानी पीने से पथरी की भी समस्या हो सकती है। किडनी में संक्रमण का खतरा भी रहता है।- डा.भूपेंद्र सिंह
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ
रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज, बांदा।
वर्जन
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फोटो-12बीएनडीपी-07 : राजेंद्र प्रसाद।
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बांदा की केन नदी में नालों का गंदा पानी पहुंचता है। इसकी वजह से यहां का पानी कुछ प्रदूषित है। इसी तरह हमीरपुर जिले का गंदा पानी बेतवा नदी में आता है। फिलहाल यमुना नदी का पानी स्वच्छ है। फिर भी बिना फिल्टर के किसी भी नदी का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है। नदियों में गिरने वाले गंदे नालों के पानी को लेकर समय-समय पर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी और जल संस्थान को पत्र भेजा जाता है। इसे रोकने का जिम्मा नगर पालिका का है। हालांकि अभी नदियों का पानी इतना प्रदूषित नहीं है कि सेहत के लिए नुकसानदायक हो सके। बस, सीधे पीने योग्य नहीं रहा।
- राजेंद्र प्रसाद
क्षेत्रीय प्रबंधक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा
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चित्रकूटधाम मंडल में प्रमुख नदियां केन, यमुना और बेतवा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हर माह चित्रकूटधाम मंडल की नदियों के पानी की जांच कराई जाती है। पानी का नमूना जांच के लिए झांसी भेजा जाता है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बांदा की केन और हमीरपुर की बेतवा नदी का पानी बेहद प्रदूषित है। टोटल डिजॉल्वड सॉलिड (टीडीएस) की मात्रा करीब 600-900 प्वाइंट प्रति लीटर पहुंच गया है जबकि यह अधिकतम 300 प्वाइंट होना चाहिए। इसके अलावा टोटल हार्डनेस भी 150 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर है। यह 80-90 मिलीग्राम होना चाहिए।
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इसी तरह हमीरपुर में बेतवा नदी के पानी में करीब 900 टीडीएस की मात्रा पाई गई। केन नदी में इसकी मात्रा 600 से ज्यादा है। केन नदी के पानी में हार्डनेस 170.40 और बेतवा नदी में 152.02 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। जानकारों के मुताबिक 300 के अंदर टीडीएस की मात्रा सामान्य तौर पर नुकसानदायक नहीं होती। इसके ऊपर मात्रा होने पर कई बीमारियां हो सकती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की मुताबिक बेतवा नदी (हमीरपुर) में डिजॉल्व ऑक्सीजन 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर और केन नदी (बांदा) में यह मात्रा 6.2 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
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फोटो-12बीएनडीपी-06 : डाॅ.भूपेंद्र सिंह।
प्रदूषित और खारा पानी शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। इस पानी के पीने से ऐसे तत्व भी शरीर में पहुंच जाते हैं जिनकी जरूरत नहीं होती। पेट संबंधी शिकायतें बढ़ जाती हैं। रोगों में गैस्ट्रोएंजाइटिस, डिहाइड्रेशन, उल्टी व बुखार आदि शामिल हैं। इसके अलावा अधिक हार्डनेस की मात्रा वाला पानी पीने से पथरी की भी समस्या हो सकती है। किडनी में संक्रमण का खतरा भी रहता है।- डा.भूपेंद्र सिंह
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ
रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज, बांदा।
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फोटो-12बीएनडीपी-07 : राजेंद्र प्रसाद।
बांदा की केन नदी में नालों का गंदा पानी पहुंचता है। इसकी वजह से यहां का पानी कुछ प्रदूषित है। इसी तरह हमीरपुर जिले का गंदा पानी बेतवा नदी में आता है। फिलहाल यमुना नदी का पानी स्वच्छ है। फिर भी बिना फिल्टर के किसी भी नदी का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है। नदियों में गिरने वाले गंदे नालों के पानी को लेकर समय-समय पर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी और जल संस्थान को पत्र भेजा जाता है। इसे रोकने का जिम्मा नगर पालिका का है। हालांकि अभी नदियों का पानी इतना प्रदूषित नहीं है कि सेहत के लिए नुकसानदायक हो सके। बस, सीधे पीने योग्य नहीं रहा।
- राजेंद्र प्रसाद
क्षेत्रीय प्रबंधक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा