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सात संदिग्ध डेंगू पीड़ितों की रिपोर्ट निगेटिव
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बांदा। कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब डेंगू और मलेरिया के प्रकोप से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। ये दोनों मच्छरजनित बीमारियां हैं। खुशी की बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 10 संदिग्ध मरीजों में सात की रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
एनएस-1 एंटीजेन किट जांच में लक्षण सामने आने पर अब मात्र तीन डेंगू संभावित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिले में कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद अब मौसमी बीमारियों का प्रकोप काफी तेजी से बढ़ा है। वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है।
चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल समेत सीएचसी-पीएचसी तक में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 800 और जिला अस्पताल में लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में इलाज कराने आ रहे हैं।
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इनमें ज्यादातर मरीज बुखार, गले में दर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी के शामिल हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उधर, मेडिकल कालेज में भर्ती डेंगू के 10 संदिग्ध मरीजों में सात की रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
अब मात्र तीन डेंगू संभावित मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इस बाबत मेडिसिन विभाग के डा. शैलेंद्र कुमार यादव का कहना है कि फिलहाल तीनों मरीज ठीक हैं। जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। उधर, गंभीर बात यह है कि यहां डेंगू की पुष्टि के लिए जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में एलाइजा जांच मशीन नहीं है। जिला अस्पताल में लगी यह जांच मशीन कई महीनों से खराब है। इसे बनवाने की सुध नहीं ली गई। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार का कहना है कि वह इस संबंध में कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
उधर, कोविड-19 के दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने आइसोलेशन वार्ड को डेंगू और मलेरिया वार्ड के रूप में तब्दील कर दिया गया है। जिला अस्पताल में 10 बेड और सभी सीएचसी व पीएचसी में 5-5 बेड का अलग डेंगू वार्ड बनाया गया है।
जिले में 19 टीमें लगाई गई हैं। सात से 16 सितंबर तक घर-घर संक्रामक बीमारियों से ग्रसित मरीजों का टीमें पता लगाएंगी। डीएम आनंद कुमार सिंह ने दावा किया डेंगू से निपटने की पूरी तैयारी है।
कोरोना में आइसोलेशन अब डेंगू वार्ड में बदले
बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि कोरोना के दौरान बने आइसोलेशन वार्ड को डेंगू/मलेरिया वार्ड के रूप में तब्दील किया गया है। इनमें पर्याप्त लगभग 200 बेड हैं। दवाएं भी पूरी हैं।
उन्होंने बताया कि खटमल के काटने से स्क्रब टाईफस, सीवर/नाले-नालियों के चूहों से लैप्टो स्पाएरायसेस और एनाफिलीज मच्छर से मलेरिया व एडिस मच्छर से डेंगू/चिकनगुनिया रोग फैलता है। ये वायरल बीमारियां हैं।
जांच कोरोना की और निकल रहा वायरल फीवर
बांदा। डेंगू, मलेरिया के अलावा वायरल बुखार के बढ़े केसों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बुखार और जकड़न होने पर लोग कोरोना संक्रमण समझकर जांच के लिए परेशान हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कॉलेज में लगभग 1800-2000 आरटीपीसीआर और जिला अस्पताल में एंटीजेन किट से करीब 1500 जांचें रोजाना हो रही है। हालांकि, अभी तक किसी में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. विनीत सचान का कहना है कि शुरुआती लक्षण एक समान होने से मरीज कोरोना को लेकर भयभीत हो रहे हैं। घबराएं बिल्कुल नहीं। मौजूदा में वायरल फीवर का प्रकोप है।
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एनएस-1 एंटीजेन किट जांच में लक्षण सामने आने पर अब मात्र तीन डेंगू संभावित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिले में कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद अब मौसमी बीमारियों का प्रकोप काफी तेजी से बढ़ा है। वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है।
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चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल समेत सीएचसी-पीएचसी तक में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 800 और जिला अस्पताल में लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में इलाज कराने आ रहे हैं।
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इनमें ज्यादातर मरीज बुखार, गले में दर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी के शामिल हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उधर, मेडिकल कालेज में भर्ती डेंगू के 10 संदिग्ध मरीजों में सात की रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
अब मात्र तीन डेंगू संभावित मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इस बाबत मेडिसिन विभाग के डा. शैलेंद्र कुमार यादव का कहना है कि फिलहाल तीनों मरीज ठीक हैं। जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। उधर, गंभीर बात यह है कि यहां डेंगू की पुष्टि के लिए जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में एलाइजा जांच मशीन नहीं है। जिला अस्पताल में लगी यह जांच मशीन कई महीनों से खराब है। इसे बनवाने की सुध नहीं ली गई। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार का कहना है कि वह इस संबंध में कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
उधर, कोविड-19 के दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने आइसोलेशन वार्ड को डेंगू और मलेरिया वार्ड के रूप में तब्दील कर दिया गया है। जिला अस्पताल में 10 बेड और सभी सीएचसी व पीएचसी में 5-5 बेड का अलग डेंगू वार्ड बनाया गया है।
जिले में 19 टीमें लगाई गई हैं। सात से 16 सितंबर तक घर-घर संक्रामक बीमारियों से ग्रसित मरीजों का टीमें पता लगाएंगी। डीएम आनंद कुमार सिंह ने दावा किया डेंगू से निपटने की पूरी तैयारी है।
कोरोना में आइसोलेशन अब डेंगू वार्ड में बदले
बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि कोरोना के दौरान बने आइसोलेशन वार्ड को डेंगू/मलेरिया वार्ड के रूप में तब्दील किया गया है। इनमें पर्याप्त लगभग 200 बेड हैं। दवाएं भी पूरी हैं।
उन्होंने बताया कि खटमल के काटने से स्क्रब टाईफस, सीवर/नाले-नालियों के चूहों से लैप्टो स्पाएरायसेस और एनाफिलीज मच्छर से मलेरिया व एडिस मच्छर से डेंगू/चिकनगुनिया रोग फैलता है। ये वायरल बीमारियां हैं।
जांच कोरोना की और निकल रहा वायरल फीवर
बांदा। डेंगू, मलेरिया के अलावा वायरल बुखार के बढ़े केसों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बुखार और जकड़न होने पर लोग कोरोना संक्रमण समझकर जांच के लिए परेशान हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कॉलेज में लगभग 1800-2000 आरटीपीसीआर और जिला अस्पताल में एंटीजेन किट से करीब 1500 जांचें रोजाना हो रही है। हालांकि, अभी तक किसी में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. विनीत सचान का कहना है कि शुरुआती लक्षण एक समान होने से मरीज कोरोना को लेकर भयभीत हो रहे हैं। घबराएं बिल्कुल नहीं। मौजूदा में वायरल फीवर का प्रकोप है।