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बांदा में ‘लाल सोना’ से हो रहे मालामाल
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Fri, 26 Dec 2014 11:20 PM IST
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बुंदेलखंड में ‘लाला सोना’ यानी बालू का कारोबार दिन
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दूना और रात चौगुना कमाने वाला धंधा बन गया है। बालू माफिया मालामाल हो रहे
हैं, जबकि रोजाना प्रदेश सरकार को लाखों का चूना लग रहा है।
बसपा सरकार से शुरू हुआ ‘सिंडीकेट/गुंडा टैक्स’ अब तक नहीं थमा। इस खेल बालू आम लोगों को 15 गुना से भी ज्यादा महंगी पड़ रही है। एक ट्रक में रायल्टी के नाम पर प्रदेश सरकार को मात्र 900 रुपये मिल रहे हैं, जबकि लोगों को 14000 रुपये में बालू बेची जा रही है।
कुछ दशक पहले तक ‘दारू’ का कारोबार सबसे ज्यादा आमदनी वाला माना जाता था। अब बालू के धंधे ने उसे पछाड़ दिया है। खदान से लेकर लखनऊ तक के लोगों की जेबें भर रही हैं। सिंडीकेट के नाम पर खुलेआम रोजाना दसियों लाख रुपये वसूले जा रहे हैं।
मौजूदा समय में एक घन मीटर बालू की रायल्टी (टैक्स) में प्रदेश सरकार को मात्र 75 रुपये मिल रहे हैं, जबकि खदान में इससे कई गुना ज्यादा वसूले जा रहे हैं। 10 चक्का ट्रक में ओवरलोडिंग करते हुए करीब 30 घन मीटर बालू भरी जा रही है, जबकि रवन्ना/रायल्टी मात्र 12 घन मीटर की दी जा रही है यानी एक ट्रक में 18 घन मीटर बालू अवैध ढंग से लोड की जा रही है।
1350 रुपये रायल्टी की सीधी चोरी हो रही है। इसके अलावा सिंडीकेट के नाम पर वसूली जा रही रकम मिलाकर एक ट्रक बालू के 14,000 रुपये वसूले जा रहे हैं।
ओवरलोडिंग से सरकार को चूना लगने के साथ ही करोड़ों रुपये की सालाना लागत से बनाई जाने वाली सड़कें भी ध्वस्त हो रही हैं। बालू कारोबारी सरकार को एक और चूना यह लगा रहे हैं कि पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन किया जा रहा है। खास बात यह है कि सिंडीकेट वसूली के नाम पर आए दिन नए-नए नाम चर्चा में आते हैं। इनमें अक्सर लखनऊ से जुड़े लोग होते हैं।
‘राजस्व चोरी और अवैध खनन गंभीर प्रकरण है। सभी पट्टाधारकों को सख्त निर्देश दिया जाएगा कि अवैध खनन या टैक्स की चोरी हरगिज नहीं होनी चाहिए। इसके लिए चेकिंग भी कराई जाएगी। रवन्ना से ज्यादा बालू लोड पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।’ - दयाशंकर पांडेय, प्रभारी अधिकारी खनिज/एडीएम (वित्त/राजस्व)
बसपा सरकार से शुरू हुआ ‘सिंडीकेट/गुंडा टैक्स’ अब तक नहीं थमा। इस खेल बालू आम लोगों को 15 गुना से भी ज्यादा महंगी पड़ रही है। एक ट्रक में रायल्टी के नाम पर प्रदेश सरकार को मात्र 900 रुपये मिल रहे हैं, जबकि लोगों को 14000 रुपये में बालू बेची जा रही है।
कुछ दशक पहले तक ‘दारू’ का कारोबार सबसे ज्यादा आमदनी वाला माना जाता था। अब बालू के धंधे ने उसे पछाड़ दिया है। खदान से लेकर लखनऊ तक के लोगों की जेबें भर रही हैं। सिंडीकेट के नाम पर खुलेआम रोजाना दसियों लाख रुपये वसूले जा रहे हैं।
मौजूदा समय में एक घन मीटर बालू की रायल्टी (टैक्स) में प्रदेश सरकार को मात्र 75 रुपये मिल रहे हैं, जबकि खदान में इससे कई गुना ज्यादा वसूले जा रहे हैं। 10 चक्का ट्रक में ओवरलोडिंग करते हुए करीब 30 घन मीटर बालू भरी जा रही है, जबकि रवन्ना/रायल्टी मात्र 12 घन मीटर की दी जा रही है यानी एक ट्रक में 18 घन मीटर बालू अवैध ढंग से लोड की जा रही है।
1350 रुपये रायल्टी की सीधी चोरी हो रही है। इसके अलावा सिंडीकेट के नाम पर वसूली जा रही रकम मिलाकर एक ट्रक बालू के 14,000 रुपये वसूले जा रहे हैं।
ओवरलोडिंग से सरकार को चूना लगने के साथ ही करोड़ों रुपये की सालाना लागत से बनाई जाने वाली सड़कें भी ध्वस्त हो रही हैं। बालू कारोबारी सरकार को एक और चूना यह लगा रहे हैं कि पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन किया जा रहा है। खास बात यह है कि सिंडीकेट वसूली के नाम पर आए दिन नए-नए नाम चर्चा में आते हैं। इनमें अक्सर लखनऊ से जुड़े लोग होते हैं।
‘राजस्व चोरी और अवैध खनन गंभीर प्रकरण है। सभी पट्टाधारकों को सख्त निर्देश दिया जाएगा कि अवैध खनन या टैक्स की चोरी हरगिज नहीं होनी चाहिए। इसके लिए चेकिंग भी कराई जाएगी। रवन्ना से ज्यादा बालू लोड पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।’ - दयाशंकर पांडेय, प्रभारी अधिकारी खनिज/एडीएम (वित्त/राजस्व)