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Banda News: शत्रु संपत्तियों की जांच में अभिलेख बन रहे बाधा
Tue, 18 Aug 2026 11:15 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:15 PM IST
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बांदा। पाकिस्तान चले गए परिवारों की संपत्तियों की पहचान और जांच में पुराने अभिलेख प्रशासन के लिए बड़ी बाधा बन रहे हैं।
जिले में 257 संपत्तियों की जांच चल रही है। इनमें कई जमीनों पर लोगों का लंबे समय से कब्जा है। प्रशासन इन कब्जेदारों से जमीन से संबंधित अभिलेख मांग रहा है।
जांच में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पाकिस्तान जाने वाले परिवारों का पूरा दस्तावेजी डाटा उपलब्ध नहीं है। इससे यह पता लगाने में दिक्कत हो रही है कि आखिर कौन लोग पाकिस्तान गए थे और यहां उनकी कौन-कौन सी संपत्तियां थीं। दूसरी ओर कई जमीनों पर कई पीढ़ियों से लोग काबिज हैं। उन्हें भी यह जानकारी नहीं है कि उनकी जमीन शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती है। जांच के दौरान बात सामने आने पर कब्जेदार इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
50 साल से अधिक पुराने अभिलेख भी जांच में चुनौती बने हैं। पुराने रिकॉर्ड में नाम, पते और संपत्ति का विवरण स्पष्ट नहीं होने से दस्तावेजों का मिलान करने में समय लग रहा है। प्रशासन उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और कब्जेदारों से मिले दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों की स्थिति स्पष्ट करने में जुटा है।
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जिले में अब तक 26 संपत्तियां शत्रु संपत्ति घोषित हो चुकी हैं। इनमें 24 की नीलामी हो चुकी है जबकि दो विवादित हैं। 24 संपत्तियों की नीलामी से भारत सरकार को करीब 45 लाख रुपये का राजस्व मिला है। वहीं 21 अन्य संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है।
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15 दिन में खाली कराना चुनौती
पहले से घोषित शत्रु संपत्तियों पर कब्जे की स्थिति में संबंधित लोगों से अधिकार संबंधी अभिलेख मांगे जा रहे हैं। वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी। भारत सरकार ने ऐसी संपत्तियों को 15 दिन में कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने यह बड़ी चुनौती है।
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शत्रु संपत्ति की जांच एक वृहद प्रक्रिया है। शत्रु देशों में जाने वाले परिवारों का कोई डाटाबेस नहीं है। साथ ही करीब 50 साल पुराने अभिलेखों को ढूंढना और जांचना भी कठिन काम है। जांच चल रही है, कुछ परेशानियां आती हैं लेकिन उनका समाधान निकाला जाएगा।
-एसके तिवारी, पर्यवेक्षक शत्रु संपत्ति, बुंदेलखंड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश
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जिले में 257 संपत्तियों की जांच चल रही है। इनमें कई जमीनों पर लोगों का लंबे समय से कब्जा है। प्रशासन इन कब्जेदारों से जमीन से संबंधित अभिलेख मांग रहा है।
जांच में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पाकिस्तान जाने वाले परिवारों का पूरा दस्तावेजी डाटा उपलब्ध नहीं है। इससे यह पता लगाने में दिक्कत हो रही है कि आखिर कौन लोग पाकिस्तान गए थे और यहां उनकी कौन-कौन सी संपत्तियां थीं। दूसरी ओर कई जमीनों पर कई पीढ़ियों से लोग काबिज हैं। उन्हें भी यह जानकारी नहीं है कि उनकी जमीन शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती है। जांच के दौरान बात सामने आने पर कब्जेदार इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
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50 साल से अधिक पुराने अभिलेख भी जांच में चुनौती बने हैं। पुराने रिकॉर्ड में नाम, पते और संपत्ति का विवरण स्पष्ट नहीं होने से दस्तावेजों का मिलान करने में समय लग रहा है। प्रशासन उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और कब्जेदारों से मिले दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों की स्थिति स्पष्ट करने में जुटा है।
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जिले में अब तक 26 संपत्तियां शत्रु संपत्ति घोषित हो चुकी हैं। इनमें 24 की नीलामी हो चुकी है जबकि दो विवादित हैं। 24 संपत्तियों की नीलामी से भारत सरकार को करीब 45 लाख रुपये का राजस्व मिला है। वहीं 21 अन्य संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है।
15 दिन में खाली कराना चुनौती
पहले से घोषित शत्रु संपत्तियों पर कब्जे की स्थिति में संबंधित लोगों से अधिकार संबंधी अभिलेख मांगे जा रहे हैं। वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी। भारत सरकार ने ऐसी संपत्तियों को 15 दिन में कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने यह बड़ी चुनौती है।
शत्रु संपत्ति की जांच एक वृहद प्रक्रिया है। शत्रु देशों में जाने वाले परिवारों का कोई डाटाबेस नहीं है। साथ ही करीब 50 साल पुराने अभिलेखों को ढूंढना और जांचना भी कठिन काम है। जांच चल रही है, कुछ परेशानियां आती हैं लेकिन उनका समाधान निकाला जाएगा।
-एसके तिवारी, पर्यवेक्षक शत्रु संपत्ति, बुंदेलखंड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश