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Banda News: दुष्कर्मी अमित अब कैदी नंबर 702, बैरक 9-ए में कैद
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फोटो- 06 न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद अमित रैकवार को जेल ले जाते पुलिसकर्मी। फाइल फोटो
- फांसी की सजा के बाद अमित रैकवार अब नाम नहीं एक नंबर, अन्य कैदियों से अलग रहा गया
- मानसिक स्थिति को लेकर जेल प्रशासन और डॉक्टर सतर्क, फैसले के बाद गुमसुम रहा दुष्कर्मी
लोकेंद्र प्रताप सिंह
बांदा। दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद अमित रैकवार की दुनिया पूरी तरह बदल गई है। एक समय अपने नाम से पहचाना जाने वाला अमित अब जेल में कैदी नंबर-2621702 के रूप में जाना जाएगा। बेहद दरिंदगी से मासूमियत को कुचलने वाले इस दुष्कर्मी की पहचान सलाखों के पीछे एक संख्या और एक बैरक तक सिमट गई है।
अदालत से जिला जेल लाए जाने के बाद अमित रैकवार के व्यवहार में साफ बदलाव देखा गया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी तरह गुमसुम रहा और किसी से कोई बात नहीं की। उसने रात का खाना भी नहीं खाया। जेल अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि मृत्युदंड की सजा पाए कैदियों की मानसिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील होती है।
इसी कारण, अमित रैकवार को अन्य बंदियों से अलग रखा गया है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे सामान्य बैरक नंबर पांच से हटाकर बैरक नंबर-9 ए भेज दिया गया है। यह बैरक विशेष निगरानी के तहत उन कैदियों के लिए आरक्षित है, जिन्हें मृत्युदंड की सजा मिली है। यहां कैदी की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाती है। जेल डॉक्टरों की एक टीम उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मृत्युदंड की सजा प्राप्त कैदी को समाज से अलग कर एक विशेष व्यवस्था के तहत रखा जाता है। अमित रैकवार को भी इसी कड़ी निगरानी में रखा गया है। उसकी बैरक को विशेष रूप से सुरक्षित किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। जेल प्रशासन का उद्देश्य कैदी की मानसिक स्थिरता बनाए रखना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में डॉक्टरों की टीम की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो कैदी के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखती है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि कैदी को न केवल सुरक्षित रखा जाए, बल्कि उसकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए। (संवाद)
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- फांसी की सजा के बाद अमित रैकवार अब नाम नहीं एक नंबर, अन्य कैदियों से अलग रहा गया
- मानसिक स्थिति को लेकर जेल प्रशासन और डॉक्टर सतर्क, फैसले के बाद गुमसुम रहा दुष्कर्मी
लोकेंद्र प्रताप सिंह
बांदा। दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद अमित रैकवार की दुनिया पूरी तरह बदल गई है। एक समय अपने नाम से पहचाना जाने वाला अमित अब जेल में कैदी नंबर-2621702 के रूप में जाना जाएगा। बेहद दरिंदगी से मासूमियत को कुचलने वाले इस दुष्कर्मी की पहचान सलाखों के पीछे एक संख्या और एक बैरक तक सिमट गई है।
अदालत से जिला जेल लाए जाने के बाद अमित रैकवार के व्यवहार में साफ बदलाव देखा गया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी तरह गुमसुम रहा और किसी से कोई बात नहीं की। उसने रात का खाना भी नहीं खाया। जेल अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि मृत्युदंड की सजा पाए कैदियों की मानसिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील होती है।
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इसी कारण, अमित रैकवार को अन्य बंदियों से अलग रखा गया है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे सामान्य बैरक नंबर पांच से हटाकर बैरक नंबर-9 ए भेज दिया गया है। यह बैरक विशेष निगरानी के तहत उन कैदियों के लिए आरक्षित है, जिन्हें मृत्युदंड की सजा मिली है। यहां कैदी की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाती है। जेल डॉक्टरों की एक टीम उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मृत्युदंड की सजा प्राप्त कैदी को समाज से अलग कर एक विशेष व्यवस्था के तहत रखा जाता है। अमित रैकवार को भी इसी कड़ी निगरानी में रखा गया है। उसकी बैरक को विशेष रूप से सुरक्षित किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। जेल प्रशासन का उद्देश्य कैदी की मानसिक स्थिरता बनाए रखना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में डॉक्टरों की टीम की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो कैदी के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखती है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि कैदी को न केवल सुरक्षित रखा जाए, बल्कि उसकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए। (संवाद)