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चचेरी बहन से दुष्कर्म में दस साल की कैद

Wed, 11 Nov 2020 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 11:33 PM IST
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Rape me Bhai ko Saja
बांदा। रिश्ते में चचेरी बहन किशोरी के साथ दुष्कर्म के जुर्म में 22 वर्षीय युवक को अदालत ने 10 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा न किया तो एक साल जेल में और रहना होगा।
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घटना जसपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रामसुफल सिंह ने बताया कि 13 वर्षीय किशोरी गांव के बाहर खलिहान में 7 मई 2017 को भूसे की रखवाली कर रही थी। दिन में करीब 3 बजे उसके दादा (पिता के बड़े भाई) का पुत्र छोटू उर्फ ओमनारायण वहां आ गया और जबरन किशोरी को नजदीक में बनी झोपड़ी में ले गया। चारपाई पर उसके हाथ बांधकर दुष्कर्म किया। बेहोश अवस्था में किशोरी को उठा ले जाकर कुछ दूरी पर बांस के पेड़ के पास फेंक दिया और भाग गया। होश आने पर किशोरी घर पहुंची और जानकारी दी। पिता ने उसी दिन थाने में छोटू उर्फ ओमनारायण के विरुद्ध धारा 376 व पॉक्सो एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराई। दो दिन बाद ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। किशोरी का डाक्टरी परीक्षण और मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान हुए।
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पुलिस ने विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से 5 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी छोटू को पॉक्सो एक्ट की धारा-4 में सजा सुनाई। अभियुक्त गिरफ्तारी के बाद से जेल में ही है।
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विधायक द्वारा दर्ज रिपोर्ट में पुलिस ने धाराएं हटाईं
बांदा। नरैनी कोतवाली क्षेत्र के देवरार गांव के पास पिछले माह 6 अक्तूबर को स्थानीय विधायक राजकरन कबीर के वाहन पर तोड़फोड़ और उनके साथ मारपीट-लूट आदि की दर्ज रिपोर्ट की धाराओं में परिवर्तन के बाद विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) रामकरन द्वितीय ने सभी छह आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर दी। निजी बंध पत्र दाखिल करने पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस ने विवेचना में लूट और गुंडा टैक्स तथा तमंचा से फायर आदि के आरोपों को खारिज कर दिया। धारा 387, 395, 397, 307 धाराओं को पुलिस ने हटा दिया। एससीएसटी एक्ट सहित कई साधारण धाराओं में मुकदमा तब्दील कर दिया है। अदालत द्वारा तलब किए जाने पर बुधवार को विधायक श्री कबीर अदालत में पेश हुए। पुलिस द्वारा परिवर्तन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उधर, अदालत ने आदेश दिया कि जमानत पर रिहाई के बाद भी हर 15 दिन में आरोपियों को थाने में हाजिरी देना होगी। वरना जमानत खारिज कर दी जाएगी। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ब्रजराज सिंह परिहार, भूपतबाबू यादव और श्याम सुंदर राजपूत ने पैरवी की।
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