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2 प्रधानों को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:03 PM IST
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शकीला बेगम
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में गुरुवार को आयोजित भव्य सरकारी समारोह में रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार योजना के तहत सम्मानित की गईं महिला प्रधानों में बांदा जिले की भी दो प्रधान शामिल है। दोनों प्रधानों ने अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में प्रेरणादायक विकास कार्य किए हैं।
स्वच्छता मिशन के तहत गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) की सूची में शामिल करा दिया है। महिला प्रधानों में महुआ ब्लाक की गिरवां ग्राम पंचायत की प्रधान अंशु द्विवेदी और तिंदवारी ब्लाक के सादीमदनपुर गांव की प्रधान शकीला बेगम शामिल हैं। पुरस्कार पाकर न सिर्फ प्रधान बल्कि उनके परिवार और गांवों के लोग भी खुश है।
वीरभूमि की बेटी ने ससुराल को बनाया कर्मभूमि
वीरभूमि महोबा की बेटी अंशु द्विवेदी ने ससुराल को ही कर्मभूमि बना लिया। गिरवां (बांदा) में शादी होने के बाद वह दिसंबर 2015 में ग्राम प्रधान चुनी गईं। शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। स्वच्छता मिशन के तहत भरपूर प्रयास करके गांव को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) कराया। इसके लिए लगातार प्रयास किए। इसके अलावा नशा मुक्ति, महिलाओं और शिशुओं का नियमित टीकाकरण और ग्रामीणों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित किया।
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पंचायत में खुली बैठकों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराई। अंशु बताती हैं कि पुरस्कार मिलने की खबर मिली तो बेहद प्रसन्न हुईं। मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत होना उनके लिए गौरव की बात है। गांव को चमकाने की मुहिम अब और तेज करेंगी। अंशु बताती हैं कि वह पिछले 18 वर्षों से अमर उजाला की पाठक हैं।
ससुराल में प्रधानी विरासत में मिली
मुस्लिम घराने की पर्दानशीं शकीला बेगम को मुस्लिम बाहुल्य गांव सादीमदनपुर गांव की प्रधानी एक तरह से विरासत में मिली है। ससुराल का घराना कई दशक से गांव की प्रधानी करता आ रहा है। ससुर अल्लारक्खे 11 वर्ष तक गांव के प्रधान रहे। उनके बाद जेठ शमशाद अली ने करीब 17 वर्ष तक प्रधानी संभाली। अब दिसंबर 2015 के चुनाव से गांव की कमान ससुराल में रहकर शकीला बेगम संभाल रही हैं।
शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार हासिल करने पर वह फख्र महसूस कर रही हैं। पति अंसार अहमद बताते हैं कि उनके गांव में अब कोई खुले में शौच नहीं जाता। लगभग 700 शौचालय बनवाए हैं। तकरीबन सौ मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनवाए हैं। गांव के विकास का मिशन आगे भी जारी रहेगा। शकीला बेगम और पूरा परिवार अमर उजाला का नियमित पाठक है।
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स्वच्छता मिशन के तहत गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) की सूची में शामिल करा दिया है। महिला प्रधानों में महुआ ब्लाक की गिरवां ग्राम पंचायत की प्रधान अंशु द्विवेदी और तिंदवारी ब्लाक के सादीमदनपुर गांव की प्रधान शकीला बेगम शामिल हैं। पुरस्कार पाकर न सिर्फ प्रधान बल्कि उनके परिवार और गांवों के लोग भी खुश है।
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वीरभूमि की बेटी ने ससुराल को बनाया कर्मभूमि
वीरभूमि महोबा की बेटी अंशु द्विवेदी ने ससुराल को ही कर्मभूमि बना लिया। गिरवां (बांदा) में शादी होने के बाद वह दिसंबर 2015 में ग्राम प्रधान चुनी गईं। शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। स्वच्छता मिशन के तहत भरपूर प्रयास करके गांव को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) कराया। इसके लिए लगातार प्रयास किए। इसके अलावा नशा मुक्ति, महिलाओं और शिशुओं का नियमित टीकाकरण और ग्रामीणों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित किया।
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पंचायत में खुली बैठकों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराई। अंशु बताती हैं कि पुरस्कार मिलने की खबर मिली तो बेहद प्रसन्न हुईं। मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत होना उनके लिए गौरव की बात है। गांव को चमकाने की मुहिम अब और तेज करेंगी। अंशु बताती हैं कि वह पिछले 18 वर्षों से अमर उजाला की पाठक हैं।
ससुराल में प्रधानी विरासत में मिली
मुस्लिम घराने की पर्दानशीं शकीला बेगम को मुस्लिम बाहुल्य गांव सादीमदनपुर गांव की प्रधानी एक तरह से विरासत में मिली है। ससुराल का घराना कई दशक से गांव की प्रधानी करता आ रहा है। ससुर अल्लारक्खे 11 वर्ष तक गांव के प्रधान रहे। उनके बाद जेठ शमशाद अली ने करीब 17 वर्ष तक प्रधानी संभाली। अब दिसंबर 2015 के चुनाव से गांव की कमान ससुराल में रहकर शकीला बेगम संभाल रही हैं।
शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार हासिल करने पर वह फख्र महसूस कर रही हैं। पति अंसार अहमद बताते हैं कि उनके गांव में अब कोई खुले में शौच नहीं जाता। लगभग 700 शौचालय बनवाए हैं। तकरीबन सौ मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनवाए हैं। गांव के विकास का मिशन आगे भी जारी रहेगा। शकीला बेगम और पूरा परिवार अमर उजाला का नियमित पाठक है।