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रबी की फसलों पर बर्बादी की बारिश, अब तक अमृत मानी जा रही वर्षा अब करेगी मटियामेट

Sat, 08 Jan 2022 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jan 2022 11:33 PM IST
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Rains of wastage on Rabi crops, till now the rain, which is considered to be nectar, will now make a difference
शनिवार को तड़के हुई बारिश से तिंदवारी क्षेत्र में सरसों व मटर के खेत में जलभराव दिखाता किसान। संव - फोटो : BANDA
बांदा। मौसम के बनते-बिगड़ते मिजाज के बीच बीती रात चित्रकूटधाम मंडल में हुई तेज बारिश का असर रबी सीजन की फसलों पर पड़ना तय है। जिन फसलों के लिए यह बारिश अमृत मानी जा रही थी अब उन पर भी बर्बादी के बादल मंडराने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि तापमान घटने का फायदा रबी की प्रमुख फसल गेहूं को मिलेगा। लेकिन अच्छी धूप शीघ्र न मिलने से दलहनी व तिलहनी फसलों का नुकसान भी लगभग तय है।
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तीन दिन से हो रही रिमझिम बारिश शनिवार को तड़के मूसलाधार में बदल गई। जिन खेतों में मामूली जलभराव था वो लबालब हो गए। मसूर, गेहूं, चना, मटर आदि के पौधे पानी में डूब गए। किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आईं हैं। शीघ्र तापमान में वृद्धि और धूप की तपिश नहीं मिली तो ज्यादातर यह फसलें जमींदोज हो जाएंगी। कोहरा और ठंड से पाला पड़ने के भी आसार हैं। सरसों, मटर और मसूर में 60 फीसदी से ज्यादा फूल झड़ने की खबरें मिल रही हैं। जिला कृषि अधिकारी डा.प्रमोद कुमार का कहना है कि खेतों में जल भराव से फसलें पीली पड़ सकती हैं। फसलों का हरा भरा बनाने के लिए जल विलेय उर्वरक एनपीके का छिड़काव करें।
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दलहन को 50 व गेहूं को 20 फीसदी बर्बाद करेगी बारिश
बबेरू/नरैनी/तिंदवारी। किसानों का आकलन है कि बेमौसम बारिश से दलहन व तिहलन की 80 फीसदी फसल खराब हो गई है। गेहूं को भी 20 प्रतिशत नुकसान के आसार हैं। गेहूं का पौध छोटा है। पानी में डूबकर सड़ सकता है। बबेरू, नरैनी, तिंदवारी, अतर्रा, मटौंध, बदौसा, खप्टिहा कलां, मरका, कमासिन आदि क्षेत्रों के किसानों ने यही चिंता जताई है।
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गंगा पुरवा, नरैनी के किसान रमेश का कहना है कि यहां अभी 50 फीसदी धान मड़ाई के लिए खलिहानों में रखा है। बारिश में भीगकर यह खराब हो रहा है। सूखने पर काला पड़ जाएगा। तिंदवारी क्षेत्र के किसान मतगंजन सिह, लालजीत सिंह आदि ने बताया कि इस अतिवृष्टि से गेहूं के भी खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सरसों व अरहर के फूल झड़ गए हैं। दोबारा फूल होने पर उत्पादन 60-70 फीसदी तक घट जाएगा।
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