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नाम से आगे नहीं बढ़ सका रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग

Tue, 15 Jun 2021 10:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 10:40 PM IST
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rain water harvesting system
बांदा। जल संकट से उबरने के लिए रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग पद्धति बेहतर तो है, लेकिन जिले के अफसरों की लापरवाही के चलते इसमें दो फीसदी भी काम नहीं हुआ है। मामले में प्रदेश सरकार भी संजीदा है, लेकिन जिले के सरकारी व अर्द्धशासकीय भवनों में फिलहाल कोई संजीदगी वाला काम नहीं हो सका है। इस पद्धति में बरसात के पानी को छत से उतारा जाता है, ताकि भूगर्भ जलस्तर में सुधार हो सके।
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जिले में 1874 सरकारी व अर्द्धशासकीय भवन है। प्रदेश सरकार ने जल संकट को देखते हुए पिछले वर्ष लघु सिंचाई विभाग को रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य कराए जाने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से महज 20 भवनों में ही रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य कराया गया है। अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई वृत झांसी ने गत दिनों जूम एप के माध्यम से की गई समीक्षा में जनपद की प्रगति सही न होने पर नाराजगी जाहिर की थी। अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग को भेजे गए आदेशों में दो दिन के अंदर अवशेष सरकारी व अर्द्धशासकीय भवनों के क्षेत्रफल के अनुसार प्राकलन तैयार कराकर संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए थे।
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यह भी कहा था कि यदि कोई सरकारी व अर्द्धशासकीय भवन छूट गया है तो उसे भी सूची में शामिल करें। योजना भारत सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं जाएगी। संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उधर, अधीक्षण अभियंता के आदेशों के बाद अधिशासी अभियंता ने रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना के लिए विकास खंडवार सात अवर अभियंता व दो सहायक अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।
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इन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी
बड़ोखर ब्लाक के 201 भवनों के लिए जेई प्रशांत कुमार, महुआ में 223 भवनों में जगपाल, नरैनी में 333 भवनों में बृजेश कुमार रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना का काय देखेंगे। इनकी मॉनिटरिंग सहायक अभियंता रीना कुमार करेंगी। इसी प्रकार बिसंडा के 208 भवनों के लिए जेई रवींद्र कुमार, बबेरू व कमासिन में 431 भवनों में श्यामलाल, तिंदवारी, कमासिन में 358 भवनों में रिंकू प्रसाद गुप्ता व जनपद/मंडलीय कार्यालयों में 120 भवनों में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्थापना का कार्य अमित कुमार देखेंगे। मॉनिटरिंग सहायक अभियंता प्रमोद कुमार मिश्र करेंगे।
क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के तहत प्रकृति प्रदत्त जल वर्षा को खोदे गए गड्ढों में हार्वेस्टिंग के माध्यम से एकत्र कर भूगर्भ जल रिचार्ज किया जाता है। पहले यह प्रणाली राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में पानी की कमी के चलते कैचमेंट के पानी को संचित करने में प्रयोग की जाती थी। यूपी में ज्यादा जल दोहन से यहां भी जल संकट गहराने के साथ ही सरकार ने सरकारी व गैरसरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली पर जोर दिया। 5 सितंबर 2019 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस बाबत प्रदेश सरकार को आदेश जारी किए थे। इसके बाद सरकार ने सरकारी व अर्द्धशासकीय भवनों रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है।

80 से 90 हजार तक आता है खर्च
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना में 80 से 90 हजार रुपये तक का खर्च आता है। सिंचाई विभाग के जेई यशवंत का कहना है कि इस प्रणाली में भवन का पूरा पानी एक स्थान पर लाकर पाइप से नीचे उतारा जाता है। नीचे भवन के क्षेत्रफल के हिसाब से टैंक बनाया जाता है। उसमें बोरिंग कराई जाती है, ताकि वर्षा का पानी टैंक व बोर के जरिए जमीन के अंदर जा सके। इससे जलस्तर में सुधार होता है। सरकार भूजल स्तर में सुधार के लिए चेकडैम, तालाब आदि बनवा रही है। सरकारी व गैरसरकारी भवनों में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अनिवार्य कर दिया, लेकिन छोटे मकानों को इससे छूट दी गई है।
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