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Banda News: आरोपियों के मेडिकल एजेंसियों और गोदामों पर मारे छापे
Mon, 07 Sep 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:41 PM IST
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फोटो-26-प्रियांशु गुप्ता के मेडिकल स्टोर पर जांच करते सीओ व अन्य। संवाद
अतर्रा(बांदा)। प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार के मामले में पुलिस और औषधि विभाग ने रविवार देर रात कस्बे में संचालित आरोपियों के मेडिकल एजेंसियों, मेडिकल स्टोर और गोदामों पर छापा मारी की।
ड्रग इंस्पेक्टर दिव्यप्रकाश मौर्य, सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी समेत पुलिस अधिकारियों की टीम ने करीब दो घंटे तक प्रतिष्ठानों में दवाओं के स्टॉक और अभिलेखों की जांच की।
रविवार रात करीब नौ बजे ड्रग इंस्पेक्टर और सीओ बबेरू कोतवाली प्रभारी राकेश तिवारी और बिसंडा थाना प्रभारी सीपी तिवारी पुलिस बल के साथ कस्बे की लखन कॉलोनी पहुंचे। यहां आरोपी प्रवीण गुप्ता उर्फ लकी की मोहल्ले में स्थित मामा एजेंसी की जांच की गई।
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इसके बाद रामलीला मार्ग स्थित रोहित पांडेय के घर में संचालित श्रीराम मेडिकल स्टोर और उसके नजदीक बने गोदाम में टीम ने पड़ताल की। बस स्टॉप स्थित श्याम मेडिकल एजेंसी में भी स्टॉक और दस्तावेज खंगाले गए। इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम पर है।
बताया गया कि कोडीनयुक्त सिरप के अवैध कारोबार से जुड़ा गिरोह बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के अलावा मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था। बीते बृहस्पतिवार को एसटीएफ और बिसंडा पुलिस की संयुक्त टीम ने बिसंडा क्षेत्र के पुनाहुर स्थित बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। टीम ने एक डीसीएम से 30 हजार सिरप बरामद किए थे। मौके से एक नेक्साॅन कार भी मिली थी।
पूछताछ और बरामदगी के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस और औषधि विभाग संबंधित मेडिकल प्रतिष्ठानों की जांच कर रहे हैं। सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया कि कोडीनयुक्त सिरप के मामले में संबंधित मेडिकल प्रतिष्ठानों और एजेंसियों की जांच की गई है। अभिलेख और स्टॉक की पड़ताल की जा रही है।
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प्रियांशु ने जीजा के नाम बनवाई थी फर्म, रोहित ने दिए थे 20 लाख रुपये
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप को नशे के अवैध कारोबार में खपाने के मामले में अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कारोबार की कई अहम कड़ियां सामने आई हैं। प्रियांशु ने पुलिस को बताया कि हमीरपुर की जिस ओम मेडिकल एजेंसी के नाम पर सिरप की खेप का बिल कटा था, वह उसके जीजा की फर्म है। पूछताछ में उसने यह भी बताया कि खेप मंगाने के लिए गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय ने 20 लाख रुपये नकद दिए थे।
प्रियांशु के अनुसार रोहित का परिवार लंबे समय से दवाओं के कारोबार से जुड़ा है। रोहित से दोस्ती के दौरान ही उसे कोडीनयुक्त सिरप के इस कारोबार की जानकारी हुई। इसके बाद ही प्रियांशु ने अपने हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर निवासी जीजा रविंद्र गुप्ता के नाम मेडिकल स्टोर का लाइसेंस कराया। लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन तकनीकी खामी के चलते फर्म जीएसटी विभाग में एक्टिव नहीं हो पाई।
खेप खरीदने के लिए रोहित ने 20 लाख रुपये नकद दिए। प्रियांशु ने यह रकम ओम मेडिकल एजेंसी के खाते में जमा कराई। इसके बाद सिरप खरीदने के लिए दिल्ली की गणेश फार्मा के खाते में रकम ट्रांसफर की गई। पुलिस अब ओम मेडिकल एजेंसी, गणेश फार्मा, रोहित और प्रियांशु के बीच हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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मध्यप्रदेश में खपाते थे अधिकांश माल
पूछताछ में प्रियांशु ने बताया कि कोडीनयुक्त सिरप की अधिकांश खेप मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में खपाई जाती थी। स्थानीय स्तर पर बिक्री करने से कारोबार का राज खुलने का डर था। उसके अनुसार, एक शीशी करीब 65 रुपये में खरीदी जाती थी और आगे 100 से 105 रुपये तक में बेची जाती थी। जबकि शीशी पर करीब 200 रुपये तक एमआरपी दर्ज थी। नशे के अवैध कारोबार में इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
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ड्रग इंस्पेक्टर दिव्यप्रकाश मौर्य, सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी समेत पुलिस अधिकारियों की टीम ने करीब दो घंटे तक प्रतिष्ठानों में दवाओं के स्टॉक और अभिलेखों की जांच की।
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रविवार रात करीब नौ बजे ड्रग इंस्पेक्टर और सीओ बबेरू कोतवाली प्रभारी राकेश तिवारी और बिसंडा थाना प्रभारी सीपी तिवारी पुलिस बल के साथ कस्बे की लखन कॉलोनी पहुंचे। यहां आरोपी प्रवीण गुप्ता उर्फ लकी की मोहल्ले में स्थित मामा एजेंसी की जांच की गई।
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इसके बाद रामलीला मार्ग स्थित रोहित पांडेय के घर में संचालित श्रीराम मेडिकल स्टोर और उसके नजदीक बने गोदाम में टीम ने पड़ताल की। बस स्टॉप स्थित श्याम मेडिकल एजेंसी में भी स्टॉक और दस्तावेज खंगाले गए। इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम पर है।
बताया गया कि कोडीनयुक्त सिरप के अवैध कारोबार से जुड़ा गिरोह बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के अलावा मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था। बीते बृहस्पतिवार को एसटीएफ और बिसंडा पुलिस की संयुक्त टीम ने बिसंडा क्षेत्र के पुनाहुर स्थित बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। टीम ने एक डीसीएम से 30 हजार सिरप बरामद किए थे। मौके से एक नेक्साॅन कार भी मिली थी।
पूछताछ और बरामदगी के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस और औषधि विभाग संबंधित मेडिकल प्रतिष्ठानों की जांच कर रहे हैं। सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया कि कोडीनयुक्त सिरप के मामले में संबंधित मेडिकल प्रतिष्ठानों और एजेंसियों की जांच की गई है। अभिलेख और स्टॉक की पड़ताल की जा रही है।
प्रियांशु ने जीजा के नाम बनवाई थी फर्म, रोहित ने दिए थे 20 लाख रुपये
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप को नशे के अवैध कारोबार में खपाने के मामले में अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कारोबार की कई अहम कड़ियां सामने आई हैं। प्रियांशु ने पुलिस को बताया कि हमीरपुर की जिस ओम मेडिकल एजेंसी के नाम पर सिरप की खेप का बिल कटा था, वह उसके जीजा की फर्म है। पूछताछ में उसने यह भी बताया कि खेप मंगाने के लिए गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय ने 20 लाख रुपये नकद दिए थे।
प्रियांशु के अनुसार रोहित का परिवार लंबे समय से दवाओं के कारोबार से जुड़ा है। रोहित से दोस्ती के दौरान ही उसे कोडीनयुक्त सिरप के इस कारोबार की जानकारी हुई। इसके बाद ही प्रियांशु ने अपने हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर निवासी जीजा रविंद्र गुप्ता के नाम मेडिकल स्टोर का लाइसेंस कराया। लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन तकनीकी खामी के चलते फर्म जीएसटी विभाग में एक्टिव नहीं हो पाई।
खेप खरीदने के लिए रोहित ने 20 लाख रुपये नकद दिए। प्रियांशु ने यह रकम ओम मेडिकल एजेंसी के खाते में जमा कराई। इसके बाद सिरप खरीदने के लिए दिल्ली की गणेश फार्मा के खाते में रकम ट्रांसफर की गई। पुलिस अब ओम मेडिकल एजेंसी, गणेश फार्मा, रोहित और प्रियांशु के बीच हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
मध्यप्रदेश में खपाते थे अधिकांश माल
पूछताछ में प्रियांशु ने बताया कि कोडीनयुक्त सिरप की अधिकांश खेप मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में खपाई जाती थी। स्थानीय स्तर पर बिक्री करने से कारोबार का राज खुलने का डर था। उसके अनुसार, एक शीशी करीब 65 रुपये में खरीदी जाती थी और आगे 100 से 105 रुपये तक में बेची जाती थी। जबकि शीशी पर करीब 200 रुपये तक एमआरपी दर्ज थी। नशे के अवैध कारोबार में इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

फोटो-26-प्रियांशु गुप्ता के मेडिकल स्टोर पर जांच करते सीओ व अन्य। संवाद