{"_id":"5b6e6b5cd4ebb3cff3f3f0cac76d4819","slug":"prisoner-committed-suicide-in-jail-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदी ने जेल में लगाई फांसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदी ने जेल में लगाई फांसी
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Wed, 26 Aug 2015 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। मंडल कारागार में हत्या के मामले में निरुद्ध बंदी ने बुधवार को फांसी लगा जान दे दी। जेल पहुंचे बंदी के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीआईजी जेल ने मौका मुआयना किया।
विज्ञापन
नरैनी कोतवाली क्षेत्र के नंदवारा गांव निवासी मातादीन (42) और उसका भाई छोटा दो अप्रैल से हत्या के मामले में मंडल कारागार में बंद हैं। जेलर एससी त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को तड़के 3:30 बजे मातादीन अस्पताल बैरक (12 ए) से शौचालय गया।
विज्ञापन
आधा घंटा तक वापस न लौटने पर बंदीरक्षक लाखन सिंह ने शौचालय में जाकर देखा तो मातादीन रोशनदान से अंगौछे के सहारे फंदे पर लटकता मिला। तत्काल उसे फंदे से नीचे उतारा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
दोपहर बाद पैनल से उसका पोस्टमार्टम कराया गया। जेलर का दावा है कि वह कुछ दिन से अवसाद में रह रहा था। दूसरी तरफ मातादीन के परिजनों ने षडयंत्र के तहत हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही मातादीन के भाई को अलग बैरक में कर दिया गया था। डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव दोपहर बाद कारागार पहुंचे और जेल अधिकारियों व बंदी रक्षकों से जानकारी ली।
बैरक बदलने पर परिजनों ने उठाए सवाल
मातादीन और उसका भाई छोटा करीब पांच माह से बैरक नंबर 3 ए में थे। दो दिन पहले उनकी बैरक बदल दी गई। मातादीन के पुत्र नंद कुमार का कहना है कि 21 अगस्त को उसने पिता से मुलाकात की थी। तब उन्हें कोई तनाव नहीं था। किसी साजिश के तहत बैरक बदलकर भाई से अलग किया गया।
उधर, जेलर एससी त्रिपाठी का कहना है कि 24 अगस्त को मातादीन को बुखार आ गया था। इलाज के लिए उसे अस्पताल की बैरक (12 ए) में रखा गया था। बीमार बंदी इसी बैरक में रखे जाते हैं। ठीक होने के बाद वापस उनकी बैरक में भेज दिए जाता है।
मुकदमे की पैरवी में गिरवी रखी जमीन
मातादीन गांव में मजदूरी और पंजाब में ईंट-भट्ठों में काम करके परिवार पालता था। कुल चार बीघा जमीन थी। पत्नी बाई ने बताया कि हत्या के मामले में फंसने के बाद जमानत व मुकदमे की पैरवी में पूरी जमीन गिरवी रख दी गई। अब उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है।
तीन बड़ी पुत्रियां शादी लायक हैं। पुत्र नंद कुमार, सुरेंद्र, अरविंद व अजय नाबालिग हैं। पुत्रियों की शादी तो दूर अब दो जून की रोटी के लाले हैं।
वृद्ध की हत्या में गए थे जेल
नरैनी कोतवाली क्षेत्र के नंदवारा गांव में 26 मार्च को नीलकंठ साहू (65) की हत्या कर दी गई थी। उसका शव गले में अंगौछे से कसा नाले में मिला था। मातादीन और उसके छोटे भाई को आरोपी बनाया गया था। दो अप्रैल से दोनों जेल में थे। मातादीन की जमानत अर्जी जिला न्यायालय से खारिज हो चुकी है। छोटा की जमानत के लिए अभी तक अर्जी नहीं दी गई।
...मोरे लरका का मार डारेन
बांदा। मार्च्युरी में मातादीन का शव और मुंह से खून बहता देख मां रमिनिया रोते हुए बोली-मोरे लरका का मार डारेन। उधर, जेल में बंद छोटा की पत्नी रामकली पुलिस कर्मियों के पैर पकड़ कह रही थी कि उसके पति को बड़े भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने को एक दिन के लिए जेल से छुड़वा दो।
पिता की मौत के बाद बेसहारा पुत्रियों को परिजन ढांढस बंधाते रहे। मार्च्युरी व पोस्टमार्टम हाउस में मातम का माहौल रहा। बसपा नेता लल्लू निषाद, मोहम्मद इदरीस आदि ने ढांढस बंधाते हुए जांच कराने और न्याय दिलाने का भरोसा दिया।