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अभी एक हफ्ते और झेलिए बिजली संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Tue, 02 Jun 2015 11:52 PM IST
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चित्रकूटधाम मंडल के लोगों को अभी एक हफ्ते बिजली संकट और झेलना पड़ेगा। पारीछा लाइन के गिरे तीन टावर खड़े होने में एक हफ्ते का समय लगेगा। उधर, भरुआ में यमुना नदी में टूटकर गिरी विद्युत लाइन को दुरुस्त करने में कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। सोमवार को लाइन बनाते समय फिर टूटकर नदी में गिर गई। इसके तार चट्टानों में फंस गए थे।
पिछले हफ्ते पारीछा बिजली घर से बांदा के लिए आई 132 केवी लाइन के तीन टावर आंधी में झांसी के पास गिर गए थे। नतीजे में बुंदेलखंड को मिल रही 100 मेगावाट बिजली आपूर्ति ठप हो गई। यह टावर अब तक नहीं बन पाए हैं। पावर कारपोरेशन (ट्रांसमिशन) का कहना है कि अभी टावरों को पुन: खड़ा करने में एक हफ्ते का समय लग जाएगा।
उधर, भरुआ से 80 मेगावाट बिजली मिल सकती थी, लेकिन चार दिन पूर्व वहां से आई एचटी लाइन टूटकर यमुना नदी में गिर गई। यह लाइन अभी तक नहीं जुड़ सकी है। अधिशासी अभियंता उमेश कुमार वर्मा ने बताया कि सोमवार को नावों के जरिए लाइन जोड़ी जा रही थी कि नदी की चट्टानों में तार फंसकर फिर टूट गए। अब बुधवार को लाइन जुड़ने की उम्मीद है।
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बता दें कि दोनों फाल्ट के बाद चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों को जहानाबाद (फतेहपुर) से मात्र 200 मेेगावाट बिजली मिल रही है। आपूर्ति बरकरार रखने में अभियंताओं के पसीने छूट रहे हैं। गांवों की बिजली बंद करके शहर को दी जा रही है। वो भी पर्याप्त नहीं है।
बिजली गई तो पानी के लाले
बांदा। बांदा शहर में बिजली संकट के कारण पेयजल समस्या खड़ी हो गई है। शहर का शायद ही कोई इलाका हो जहां के लोगों को पूरा पानी मिल पा रहा हो। छिपटहरी, खुटला आदि मोहल्लों में पेयजल का जबर्दस्त संकट है। यहां जल संस्थान दिन भर में मात्र एक टैंकर पानी भेजता है।
एक-एक बाल्टी पानी के लिए मारा-मारी मचती है। मंगलवार को खुटला मोहल्ले के लोग पानी के लिए काफी परेशान हुए। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीबी सिंह का कहना है कि बिजली आपूर्ति न होने से पानी का संकट पैदा हो रहा है। प्रभावित क्षेत्राें में टैंकरों से पानी भेजा रहा है।
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पिछले हफ्ते पारीछा बिजली घर से बांदा के लिए आई 132 केवी लाइन के तीन टावर आंधी में झांसी के पास गिर गए थे। नतीजे में बुंदेलखंड को मिल रही 100 मेगावाट बिजली आपूर्ति ठप हो गई। यह टावर अब तक नहीं बन पाए हैं। पावर कारपोरेशन (ट्रांसमिशन) का कहना है कि अभी टावरों को पुन: खड़ा करने में एक हफ्ते का समय लग जाएगा।
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उधर, भरुआ से 80 मेगावाट बिजली मिल सकती थी, लेकिन चार दिन पूर्व वहां से आई एचटी लाइन टूटकर यमुना नदी में गिर गई। यह लाइन अभी तक नहीं जुड़ सकी है। अधिशासी अभियंता उमेश कुमार वर्मा ने बताया कि सोमवार को नावों के जरिए लाइन जोड़ी जा रही थी कि नदी की चट्टानों में तार फंसकर फिर टूट गए। अब बुधवार को लाइन जुड़ने की उम्मीद है।
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बता दें कि दोनों फाल्ट के बाद चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों को जहानाबाद (फतेहपुर) से मात्र 200 मेेगावाट बिजली मिल रही है। आपूर्ति बरकरार रखने में अभियंताओं के पसीने छूट रहे हैं। गांवों की बिजली बंद करके शहर को दी जा रही है। वो भी पर्याप्त नहीं है।
बिजली गई तो पानी के लाले
बांदा। बांदा शहर में बिजली संकट के कारण पेयजल समस्या खड़ी हो गई है। शहर का शायद ही कोई इलाका हो जहां के लोगों को पूरा पानी मिल पा रहा हो। छिपटहरी, खुटला आदि मोहल्लों में पेयजल का जबर्दस्त संकट है। यहां जल संस्थान दिन भर में मात्र एक टैंकर पानी भेजता है।
एक-एक बाल्टी पानी के लिए मारा-मारी मचती है। मंगलवार को खुटला मोहल्ले के लोग पानी के लिए काफी परेशान हुए। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीबी सिंह का कहना है कि बिजली आपूर्ति न होने से पानी का संकट पैदा हो रहा है। प्रभावित क्षेत्राें में टैंकरों से पानी भेजा रहा है।