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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कामर्शियल भवनों का कराए सर्वे

Wed, 09 Nov 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बांदा
अमर उजाला ब्यूरो बांदा Updated Wed, 09 Nov 2016 11:53 PM IST
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Pollution Control Board conducted a survey of commercial buildings
बांदा में स्थित क्षेत्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड का सूना पड़ा कार्यालय - फोटो : अमर उजाला

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प्रदूषण के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने व्यवसायिक भवनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को होटल, मैरिज हाउस और नर्सिंगहोम आदि का सर्वे कराने का आदेश दिया हैं। प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम का हवाला देकर कहा है कि बोर्ड यह पता लगाए कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं?

स्वयंसेवी आशीष कुमार दीक्षित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग लापरवाह हैं। कामर्शियल भवनों खासकर होटल, नर्सिंगहोम और मैरिज हालों के पास पर्यावरण की एनओसी नहीं है। यह भी कहा कि जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने पर विभाग और सरकार सूचनाएं नहीं देतीं। याचिका पर अधिवक्ता राकेश पाठक और राकेशचंद्र त्रिपाठी ने वकालत की।
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हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव ने याचिका पर अपने आदेश में कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस संबंध में सर्वे कराए कि प्रदूषण नियंत्रण एक्ट 1986 और उसके नियमों का पालन हो रहा है या नहीं? न्यायाधीशों ने याचिका का निस्तारण करते हुए यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता इस मामले पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) जा सकता है।
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बुंदेलखंड में जहां वैध और अवैध खनन और क्रेशर आदि से अंधाधुंध प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं यहां स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। इस कार्यालय की अधिकांश कुर्सियां वीरान हैं। क्षेत्रीय निदेशक को प्रदूषण के बारे में कुछ पता नहीं है।


हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले स्वयंसेवी आशीष सागर ने कहा कि चित्रकूटधाम मंडल में अधिकांश भवनों के पास प्रदूषण नियंत्रण की एनओसी नहीं है। यह घरेलू टैक्स देते हैं। क्रेशरों की धूल से जबरदस्त और जानलेवा प्रदूषण फैल रहा है। कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन मंडल का बांदा स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह बेपरवाह है। वेतन के रूप में शासन का पैसा बेवजह खर्च हो रहा है। क्षेत्रीय निदेशक चुप्पी साधे हैं। इन दिनों चल रही धुंध के बाबत पूछने पर उनका कहना था कि यहां कोई उपकरण नहीं है। इससे वह यह नहीं बता सकते कि कितना प्रदूषण है? आशीष सागर ने बताया इस बारे में जल्द ही एनजीटी की शरण ली जाएगी।
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