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Banda News: नए कानून में पुलिस को असीमित अधिकार
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बांदा। नए कानूनों के विरोध में अधिवक्ताओं ने काला दिवस मनाया। काली पट्टी बांधकर जुलूस निकाला और नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कहा कि विसंगतियों से भरे तीनों कानूनों को रद्द होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
बार संघ अध्यक्ष अशोक दीक्षित ने कहा कि नए कानून में न्यायालय व अधिवक्ताओं के अधिकारों को सीमित कर पुलिस को असीमित अधिकार दिए गए है। न्यायालय के आदेश पर मेडिकल परीक्षण के बाद मुल्जिम को 14 दिन की रिमांड पर दिया जाता था, लेकिन अब पुलिस को 60 दिन तक की रिमांड दी जा सकती है। इसमें मेडिकल कराने का भी कोई प्रावधान नहीं है।
पुलिस के मनमानी बयानों से सच्चाई निकलवाने के लिए वकील को जिरह का अधिकार था, लेकिन नए कानून में जिरह का अधिकार खत्म कर दिया गया है। जो पुलिस ने कह दिया वही सच है। प्रदर्शन आदि में राष्ट्रद्रोह के तहत कार्रवाई की जाएगी। यहीं नहीं विश्व का पहला देश है जहां पर दोहरा कानून होगा। अदालतों में चल रहे मामलों का निस्तारण पुराने कानून व नए का निस्तारण नए कानून के तहत होगा।
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महासचिव राम प्रकाश शिवहरे ने कहा कि नए कानून में सिर्फ उलट पलट कर उन्हें पेचीदा बनाया गया हैं। प्रस्तावना में दिया गया है कि पूर्व के कानून में दंड का प्रतिशत कम था। क्या सरकार लोगों को ज्यादा से ज्यादा दंडित करने के लिए कानून बना रही है। कानून की किताब में ‘सबका साथ सबका विकास’ स्लोगन लिखा हुआ है। यह किसी पार्टी का स्लोगन तो हो सकता है, लेकिन यह कानून की किताब का नहीं हो सकता। राममिलन पटेल ने कहा कि पहले के कानून जनहित में बने थे। नए कानून में व्यक्तिगत हित के लिए बने है। इसमें पुलिस को वारंट की जरूरत नहीं है जब चाहे जिसके घर में घुस जाए। जो चाहे बयानों में लिख लें। पूर्व बार संघ अध्यक्ष शंकर सिंह, अवधेश गुप्ता, एजाज अहमद, अशोक त्रिपाठी जीतू, उमाशंकर शर्मा, रामस्वरूप सिंह, इम्त्याज खान, रमेश दुबे, रीना कन्नौजिया आदि मौजूद रहे।
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बार संघ अध्यक्ष अशोक दीक्षित ने कहा कि नए कानून में न्यायालय व अधिवक्ताओं के अधिकारों को सीमित कर पुलिस को असीमित अधिकार दिए गए है। न्यायालय के आदेश पर मेडिकल परीक्षण के बाद मुल्जिम को 14 दिन की रिमांड पर दिया जाता था, लेकिन अब पुलिस को 60 दिन तक की रिमांड दी जा सकती है। इसमें मेडिकल कराने का भी कोई प्रावधान नहीं है।
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पुलिस के मनमानी बयानों से सच्चाई निकलवाने के लिए वकील को जिरह का अधिकार था, लेकिन नए कानून में जिरह का अधिकार खत्म कर दिया गया है। जो पुलिस ने कह दिया वही सच है। प्रदर्शन आदि में राष्ट्रद्रोह के तहत कार्रवाई की जाएगी। यहीं नहीं विश्व का पहला देश है जहां पर दोहरा कानून होगा। अदालतों में चल रहे मामलों का निस्तारण पुराने कानून व नए का निस्तारण नए कानून के तहत होगा।
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महासचिव राम प्रकाश शिवहरे ने कहा कि नए कानून में सिर्फ उलट पलट कर उन्हें पेचीदा बनाया गया हैं। प्रस्तावना में दिया गया है कि पूर्व के कानून में दंड का प्रतिशत कम था। क्या सरकार लोगों को ज्यादा से ज्यादा दंडित करने के लिए कानून बना रही है। कानून की किताब में ‘सबका साथ सबका विकास’ स्लोगन लिखा हुआ है। यह किसी पार्टी का स्लोगन तो हो सकता है, लेकिन यह कानून की किताब का नहीं हो सकता। राममिलन पटेल ने कहा कि पहले के कानून जनहित में बने थे। नए कानून में व्यक्तिगत हित के लिए बने है। इसमें पुलिस को वारंट की जरूरत नहीं है जब चाहे जिसके घर में घुस जाए। जो चाहे बयानों में लिख लें। पूर्व बार संघ अध्यक्ष शंकर सिंह, अवधेश गुप्ता, एजाज अहमद, अशोक त्रिपाठी जीतू, उमाशंकर शर्मा, रामस्वरूप सिंह, इम्त्याज खान, रमेश दुबे, रीना कन्नौजिया आदि मौजूद रहे।