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Banda News: लावारिस शव कुत्तों को नोचते देख करने लगे अंतिम संस्कार
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फोटो- 30 बीएनडीपी-01 लावारिस शव का अंतिम संस्कार करते अमित सेठ। (संवाद)
- फोटो : BANDA
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बांदा। लावारिस शवों का उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करना ही बांदा के अमित सेठ की जिंदगी का मकसद है। अमित अब तक 2500 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। जैसे ही उन्हें लावारिस शव की सूचना मिलती है तुरंत मौके पर पहुंचकर अपने पवित्र मिशन में जुट जाते हैं। संस्कार का सारा खर्च स्वयं उठाते हैं।
बन्यौटा निवासी अमित सेठ को लावारिस शवों के वारिस के रूप में जाना जाता है। अमित ने बताया कि एक घटना ने उनकी जिंदगी को इस दिशा में मोड़ दिया। 2010 में वह केन नदी के किनारे घूम रहे थे। वहां एक शव को कुत्ते नोच रहे थे। इस मंजर ने उन्हें द्रवित कर दिया। सोचा यदि यह शख्स लावारिस नहीं होता तो इसकी यह दुर्गति नहीं होती। उसी दिन से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठा लिया। 13 साल में 2500 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार वह कर चुके हैं। क्रियाकर्म से लेकर जरूरत की तमाम सामग्री वह खुद खरीदते हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने अपना यह धर्म निभाया।
अमित बताते हैं कि लावारिस शव की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचते हैं। पता करते हैं कि मरने वाला शख्स किस धर्म का है। पुलिस की ओर से कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वह शव का उसी के धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करते हैं। यदि कोई शव मुस्लिम धर्म से संबंधित होता है तो उसे जामा मस्जिद से जुड़े लोगों के सुपुर्द कर देते हैं। वह उसके जनाजे में शामिल होने से लेकर दफनाने तक की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं। संस्कार के समय संबंधित थाने की पुलिस भी रहती है। इस नेक कार्य के लिए अमित को जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत भी किया जा चुका है। (संवाद)
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शहर कोतवाल श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन से भी बजट मिलता है। पुलिस भी अपने स्तर पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराती है। यदि कोई समाजसेवी इस तरह की मुहिम चलाता है तो उसकी सराहना की जानी चाहिए। यह नेक काम है।
दंपती 30 बार कर चुके हैं रक्तदान
अमित अपनी पत्नी के साथ मिलकर 30 बार रक्तदान भी कर चुके हैं। गरीब और जरूरतमंदों की भी मदद करते हैं। असहाय रोड पर पड़े बीमारों को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज भी कराते हैं।
कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं अमित
मेडिकल स्टोर चलाने वाले अमित सेठ भोलू वर्तमान में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष हैं। इसके अलावा हरदौली घाट मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष, बांदा नवदुर्गा केंद्रीय पूजा महोत्सव समिति के अध्यक्ष, रामनवमी समिति, गणेश महोत्सव समिति के कार्यक्रम संयोजक, रेडक्रास सोसाइटी, रामलीला रानी तालाब समिति, दिव्य प्रेम सेवा मिशन सहित कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं।
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बन्यौटा निवासी अमित सेठ को लावारिस शवों के वारिस के रूप में जाना जाता है। अमित ने बताया कि एक घटना ने उनकी जिंदगी को इस दिशा में मोड़ दिया। 2010 में वह केन नदी के किनारे घूम रहे थे। वहां एक शव को कुत्ते नोच रहे थे। इस मंजर ने उन्हें द्रवित कर दिया। सोचा यदि यह शख्स लावारिस नहीं होता तो इसकी यह दुर्गति नहीं होती। उसी दिन से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठा लिया। 13 साल में 2500 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार वह कर चुके हैं। क्रियाकर्म से लेकर जरूरत की तमाम सामग्री वह खुद खरीदते हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने अपना यह धर्म निभाया।
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अमित बताते हैं कि लावारिस शव की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचते हैं। पता करते हैं कि मरने वाला शख्स किस धर्म का है। पुलिस की ओर से कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वह शव का उसी के धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करते हैं। यदि कोई शव मुस्लिम धर्म से संबंधित होता है तो उसे जामा मस्जिद से जुड़े लोगों के सुपुर्द कर देते हैं। वह उसके जनाजे में शामिल होने से लेकर दफनाने तक की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं। संस्कार के समय संबंधित थाने की पुलिस भी रहती है। इस नेक कार्य के लिए अमित को जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत भी किया जा चुका है। (संवाद)
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शहर कोतवाल श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन से भी बजट मिलता है। पुलिस भी अपने स्तर पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराती है। यदि कोई समाजसेवी इस तरह की मुहिम चलाता है तो उसकी सराहना की जानी चाहिए। यह नेक काम है।
दंपती 30 बार कर चुके हैं रक्तदान
अमित अपनी पत्नी के साथ मिलकर 30 बार रक्तदान भी कर चुके हैं। गरीब और जरूरतमंदों की भी मदद करते हैं। असहाय रोड पर पड़े बीमारों को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज भी कराते हैं।
कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं अमित
मेडिकल स्टोर चलाने वाले अमित सेठ भोलू वर्तमान में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष हैं। इसके अलावा हरदौली घाट मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष, बांदा नवदुर्गा केंद्रीय पूजा महोत्सव समिति के अध्यक्ष, रामनवमी समिति, गणेश महोत्सव समिति के कार्यक्रम संयोजक, रेडक्रास सोसाइटी, रामलीला रानी तालाब समिति, दिव्य प्रेम सेवा मिशन सहित कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं।