भुखमरी के भय से एक सैकड़ा लोगों ने छोड़ा गांव

ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 01 Apr 2015 12:07 AM IST
One hundred people left the village for fear of starvation
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नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव का मजरा गहबरा। यहां 82 परिवारों में 56 पर 80 लाख रुपये का बैंक कर्ज है। इन किसान परिवारों ने अपनी 211 बीघे जमीन में गेहूं, 127 बीघा में अरहर बोई थी। किसानों ने 1752 कुंतल से ज्यादा अनाज पैदा होने की उम्मीद बांध रखी थी। पर बेमौसम की बारिश और ओलों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
यहां के किसानों की अस्सी फीसदी से ज्यादा फसल नष्ट हो चुकी है। भुखमरी का मंडराता खतरा भांपकर गांव से लगभग एक सैकड़ा लोग कहीं पलायन कर गए हैं। घर वालों का कहना है कि रोजी रोटी की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं।

किसान अमीन सिंह के पास 21 बीघा जमीन है। उसने 10 बीघा में चना, आठ बीघा में अरहर और तीन बीघा में गेहूं बोया था। उस पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का दो लाख रुपये कर्ज है। बेटी की शादी दो वर्ष से तय होकर अटकी पड़ी है। वर पक्ष को तीन लाख रुपये दहेज में देना है।

बेटा धीरू एक वर्ष से बीमार है। बेटी की शादी और बेटे के इलाज के लिए अब कोई इंतजाम नहीं हो पा रहा। बैंक के पास बंधक होने से जमीन भी नहीं बेच सकता। बैंक का कर्ज, बेटे का मर्ज और बेटी की शादी को लेकर अमीन सिंह बेहाल है।

किसान गंगाराम की बड़ी बेटी की शादी पड़ोसी गांव में दो साल से तय है। गंगाराम के पास चार बीघा जमीन है। अबकी चना बोकर सपना संजोया था कि फसल कटने पर बेटी के हाथ पीले कर देगा। बारिश और ओला ने इस सपने को धो डाला है। गंगाराम पर 50 हजार रुपये का कर्ज है। उधर, बेटी की शादी के लिए कम से कम एक लाख रुपये की दरकार है। अब वह और कर्ज लेने के लिए भटक रहा है। फिलहाल कोई कर्ज देने को राजी नहीं है।

पैर से विकलांग नौरंग सिंह 10 बीघा जमीन का काश्तकार है। उस पर बैंकों का तीन लाख रुपये कर्ज है। चना बोया था। बारिश, ओला में सब चला गया। पुत्र राजा फसल की बर्बादी देखते ही गिरकर बेहोश हो गया। कई दिनों से उसका इलाज इलाहाबाद के स्वरूपरानी अस्पताल मेें चल रहा है। 10 बीघा जमीन गिरवी रख चुकी है। घर के बिगड़ते हालात देखकर दो पुत्र परदेस चले गए।

गहबरा गांव के विसाली बताते हैं कि सभी परिवाराें को भोजन का संकट है। मवेशियों पर भी भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने बताया कि खेतों में सिर्फ डंठल के ठूंठ बचे हैं। थ्रेसर वाले उसे काटने को तैयार नहीं। 600 रुपये प्रति घंटा कतराई मांगते हैं। उसमें बमुश्किल एक पाखरी भूसा निकलेगा जो सिर्फ 400 रुपये का होगा। यानी 600 रुपये कटाई देकर 400 रुपये का भूसा हाथ लगेगा।

घर में राशन के लाले और कर्ज के खौफ से गहबरा गांव के लगभग एक सैकड़ा लोग कहीं गायब हो गए हैं। बैंक वालों के गुर्गे उन पर कर्ज अदायगी का दबाव बनाते हैं। विद्याधाम समिति के मंत्री राजा भइया ने अपने संगठन की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देकर बताया कि गांव के बोधन, प्रेम, शिवदयाल, मुन्नीलाल, रज्जू, बरदा, चुनकू, कुंदा, कौशल, रामऔतार, उमाशंकर, गोविंद, शिव प्रताप, लाखन सिंह, हरीशंकर, जयराम आदि घरों से लापता हैं। पता नहीं कहां गए और कब लौटेंगे? राजा भइया बताते हैं कि ऐसे गांवाें में सरकारी कर्मचारियों की टीम नहीं पहुंची है।


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