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अन्ना समस्या से निपटने को अब वृहद गो संरक्षण केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:02 AM IST
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अन्ना मवेशी
- फोटो : अमर उजाला
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गोशाला, गो पशु आश्रय केंद्र, गोवंश वन्य विहार के बाद भी बुंदेलखंड के किसानों को अन्ना मवेशियों से राहत न मिलने पर प्रदेश सरकार ने वृहद गो संरक्षण केंद्र की योजना लागू की है। सातों जिलों में दो-दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक-एक केंद्र बनाए जाएंगे। एक गो संरक्षण केंद्र में लगभग 800 अन्ना मवेशी रखे जा सकेंगे।
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प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद अन्ना मवेशियों से संबंधित कई योजनाओं को मंजूरी दी गई। कुछ में काम शुरू हुआ तो कुछ बड़ी योजनाएं बजट के अभाव में ठंडी पड़ी हैं। अब शासन ने वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाने को हरी झंडी दी है। बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक-एक केंद्र बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर 8.40 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एक केंद्र की लागत 1.20 करोड़ रुपये तय की गई है।
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मानीटरिंग नोडल के रूप में पशुपालन विभाग करेगा। पैकफेड को निर्माण कार्य पूरा कराने का जिम्मा सौंपा गया है। एक गो संरक्षण केंद्र का क्षेत्रफल दो हेक्टेयर होगा। इसमें 3500 वर्ग फीट के चार शेड बनेंगे। भूसा गोदाम, पानी का टैंक और चरही के साथ अन्य जरूरी संसाधन तैयार किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त पशुओं के विचरण के लिए खाली भू-भाग भी उपलब्ध रहेगा। वृहद गो संरक्षण केंद्र के निर्माण के लिए प्रति केंद्र शासन ने 1.20 करोड़ की लागत मंजूर की है। स्थानीय स्तर पर केंद्र में अन्य संसाधन जरूरी हुए तो इन्हें डीएम अपने संसाधनों से पूरा कराएंगे।
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अन्ना प्रथा उन्मूलन के लिए शासन ने बुंदेलखंड में गो संरक्षण केंद्र स्थापना को मंजूरी दी है। पशुपालन विभाग की देखरेख में कार्यदायी संस्था द्वारा निर्माण कराया जाएगा। जल्द ही जिलों में स्थल चयन कर कार्य प्रारंभ कराया जाएगा, ताकि अन्ना प्रथा समस्या से निजात मिल सके। -डॉ. एके सिंह, अपर निदेशक (पशुपालन), बांदा।
एक साल पहले अक्तूबर 2017 में गो सेवा आयोग ने बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक-एक गोवंश वन्य विहार की स्थापना को मंजूरी दी थी। एक-एक हजार गोवंश की क्षमता वाले वन्य विहार का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में स्थल का चयन भी हो चुका थे। सीएनडीएस को कार्यदायी संस्था नामित किया गया, लेकिन अभी तक बजट ही नहीं मिला। इस कारण निर्माण कार्य अभी तक नहीं श्ुारू हो पाया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अन्ना पशुओं को आश्रय देने के लिए बुंदेलखंड के सातों जिलों में पांच-पांच आश्रय गृह निर्माणाधीन हैं। न्याय पंचायत स्तर पर इन्हें बनाया जा रहा है। एक आश्रय गृह की लागत 30 लाख रुपये है। पशुपालन विभाग का कहना है कि इनके बन जाने के बाद न्याय पंचायत क्षेत्र में अन्ना घूम रहे पशुओं को आश्रय मिलेगा। इससे काफी हद तक किसानों की समस्या दूर हो जाएगी।