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Banda News: अब कठिया गेहूं बनाएगा विश्व स्तर पर पहचान

Mon, 01 Apr 2024 05:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2024 05:19 AM IST
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Now Kathiya wheat will make its mark globally
बांदा। बुंदेलखंड में लाल गेहूं (कठिया) को सरकार ने जीआई टैग दिया है। अब कठिया गेहूं की विश्वस्तर पर पहचान होगी। इसकी खेती करने वाले किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे। इसका बाजार भी विकसित होगा। कठिया गेहूं बेहद कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन देता है। स्वाद और पौष्टिकता में भी लाजवाब होता है। कठिया गेहूं की दलिया की मांग पूरे देश में है।
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बुंदेलखंड की पहचान कभी कठिया गेहूं से रही है। चार दशक पहले सिंचाई के संसाधन न होने के कारण ज्यादातर किसान कठिया गेहूं की खेती करते रहे हैं। बांदा, हमीरपुर, झांसी, महोबा और ललितपुर में अभी भी इसकी उपज होती है। बांदा के जसपुरा व कमासिन क्षेत्र में किसान बड़े रकबे में इसकी खेती करते हैं। बाजार में कठिया गेहूं के दाम चार हजार क्विंटल के ऊपर हैं। कठिया गेहूं से बनी दलिया बेहद पाचक और पौष्टिक होती है। बबेरू में समूह की महिलाएं दलिया पैक कर बाजार में बेचती हैं।
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इसके अलावा अतर्रा के प्रगतिशील किसान विज्ञान शुक्ला, छनेहरा लालपुर के मोहम्मद असलम, बड़ोखर खुर्द के प्रेम सिंह सहित कई किसान कठिया की अच्छी खेती करते हैं। इतना ही नहीं इसका दलिया तैयार दिल्ली, आगरा, कोलकाता जैसे महानगरों को भेजते हैं। बुंदेली अरहर व कठिया गेहूं को जीआई टैग देने की अरसे से मांग चल रही है। दो वर्ष पूर्व शजर पत्थर को जीआई टैग मिला था। अब कठिया को जीआई टैग मिलने से इसकी पहचान विश्व स्तर पर होगी।
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कृषि विश्वविद्यालय बनेगा मददगार

कठिया गेहूं का उत्पादन बढ़ाने में कृषि विश्वविद्यालय मददगार बनेगा। यहां कठिया की कई प्रजातियों पर शोध किए जा रहे है। विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी व सहायक प्राध्यापक डॉ. बीके गुप्ता ने बताया कि जीआई टैग मिलने से किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा। उत्पादन भी बढ़ेगा। कम सिंचित क्षेत्रों में भी इसका अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।


कठिया गेहूं की मांग पूरे विश्व में है। कठिया के दलिया और सूजी के जरिए अच्छी आमदनी ली जा सकती है। हम दस साल से अपने जैविक कृषि फार्म में कठिया का उत्पादन व प्रोसेसिंग कर रहे हैं। -मोहम्मद असलम, प्रगतिशील किसान, छनेहरा लालपुर


-कठिया गेहूं को जीआई टैग मिलने से अब इसका उत्पादन बढ़ेगा। एफपीओ के जरिए इसे उद्यम के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है। -आईके, सीनियर मार्केटिंग आफीसर, कृषि विपणन एवं निर्यात।
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