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प्राधिकरण की नोटिस से गांवों में मची खलबली

Fri, 02 Apr 2021 10:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 10:46 PM IST
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notice se khalbali machi
notice se khalbali machi - फोटो : BANDA
बांदा। अपनी स्थापना के 40 वर्षों बाद बांदा शहर में ट्रक अड्डा/ट्रांसपोर्ट नगर स्थापना की सुध ले रहे बांदा विकास प्राधिकरण ने शहर के सीमावर्ती आधा दर्जन गांवों की 208 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण करने की कवायद शुरू कर दी है। नोटिस जारी होते ही इन गांवों के सैकड़ों परिवारों में खलबली मच गई है।
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प्राधिकरण ने अधिगृहीत भूमि के भू-स्वामियों पर सुधार शुल्क भी लगाया है। ग्रामीणों ने नोटिस/अधिग्रहण कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। वरना न्यायालय में जाने की चेतावनी दी है। वर्ष 1981 में यहां स्थापित विकास प्राधिकरण शहर के सुुंदरीकरण में आज तक कोई अहम भूमिका नहीं निभा सका। आवासीय योजनाएं भी विवादित रहीं। अब प्राधिकरण की एक नई कार्रवाई से सैकड़ों परिवार परेशान हो गए हैं।
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प्राधिकरण ने शहर सीमा के नजदीक लड़ाका पुरवा का 70.825 हेक्टेयर, पल्हरी गांव की 50.989 हेक्टेयर, गुरेह गांव की 14.553 हेक्टेयर, महोखर की 21.89 हेक्टेयर, भवानीपुर की 24.377 हेक्टेयर और जमुनीपुर की 26.144 हेक्टेयर (कुल 208.678 हेक्टेयर) भूमि बस तथा ट्रक अड्डा/ट्रांसपोर्ट नगर के लिए अधिगृहीत करने की नोटिस जारी की है। नोटिस में कहा कि इस योजना में स्थित निर्माणों के भू स्वामियों पर बेटरमेंट फीस/विकास व्यय भी लगेगा। प्राधिकरण के सचिव और अधिशासी अभियंता द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि 30 दिन के अंदर इसमें आपत्तियां दी जा सकती हैं।
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प्रतिबंधित अधिसूचना क्यों नहीं जारी की
विकास प्राधिकरण की जमीन अधिग्रहण नोटिसों पर संबंधित गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर विरोध पर आ गए हैं। आपत्ति में ग्रामीणों ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर के लिए प्रस्तावित भूमि/क्षेत्र में अब घनी आबादी है। 90 फीसदी भाग में मकान व प्रतिष्ठान हैं। हजारों परिवार रह रहे हैं। कहा कि प्राधिकरण ने 20 वर्ष पुराने सर्वे के आधार पर यह प्रस्ताव किया है। अब यहां इसका औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि अपनी खून पसीने की कमाई से उन्होंने जमीनों की रजिस्ट्री/बैनामा और निर्माण कराए हैं। ग्रामीणों ने प्राधिकरण से सवाल किया कि यहां ट्रांसपोर्ट नगर बनना था तो इस क्षेत्र को रजिस्ट्री प्रतिबंधित का नोटिफिकेशन क्यों नहीं किया गया। नो एंट्री क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर का औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने कहा है कि यहां से ट्रांसपोर्ट नगर का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे।
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