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अंशकालिक शिक्षकों, कर्मचारियों को 14 माह से मानदेय नहीं
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बांदा। अतर्रा पीजी कालेज के दो दर्जन से ज्यादा अंशकालिक शिक्षक और कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इनको पिछले वर्ष फरवरी से मानदेय नहीं दिया गया। इसके पीछे महाविद्यालय प्रबंध समिति को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है। शिक्षक और कर्मियों ने शनिवार को मंडलायुक्त को ज्ञापन दिया। इसमें बताया कि प्रदेश के उच्च शिक्षा निदेशक मानदेय भुगतान के निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी नहीं दिया जा रहा।
आयुक्त को दिए ज्ञापन में कहा कि महाविद्यालय में करीब 76 अंशकालिक शिक्षक/कर्मचारी हैं। इनको फरवरी 2019 से अब तक मानदेय नहीं मिला है। सभी के परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा निदेशक ने इसी माह 15 अप्रैल को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, झांसी को भेजे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिक्षक/कर्मचारियों का भुगतान शासनादेश के तहत स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के छात्रों से मिलने वाले शुल्क से कराया जाना सुनिश्चित कराया जाए।
कर्मियों ने आयुक्त को बताया कि इस आदेश के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। इसके पीछे प्रबंधन और प्राचार्य के बीच आपसी खींचतान और लापरवाही बताई। ज्ञापन देने वाले अंशकालिक शिक्षकों में ज्ञानेंद्र सिंह, अनूप राज सिंह, दिनेश नामदेव, सुमन शुक्ला, योगेंद्र द्विवेदी, महेश सिंह, अनुराग और कर्मचारियों में विनोद कुशवाहा, योगेंद्र गुप्ता, देवेश, बद्री, दिनेश, रामऔतार, हृदयेश द्विवेदी, प्रमोद कुमार, मिथलेश, रोहित आदि शामिल हैं।
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उधर, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. अभिलाष श्रीवास्तव ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र में अनुमोदित अध्यापकों के भुगतान के लिए कहा गया है। अंशकालिक अध्यापकों के लिए स्पष्ट आदेश नहीं हैं। बैंक शाखा प्रबंधक और प्राचार्य ने निदेशक को स्पष्ट आदेश का आग्रह पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि स्ववित्त पोषित खाते से ही अनुमोदित और अंशकालिक दोनों का भुगतान होता है। स्पष्ट आदेश आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
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आयुक्त को दिए ज्ञापन में कहा कि महाविद्यालय में करीब 76 अंशकालिक शिक्षक/कर्मचारी हैं। इनको फरवरी 2019 से अब तक मानदेय नहीं मिला है। सभी के परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा निदेशक ने इसी माह 15 अप्रैल को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, झांसी को भेजे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिक्षक/कर्मचारियों का भुगतान शासनादेश के तहत स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के छात्रों से मिलने वाले शुल्क से कराया जाना सुनिश्चित कराया जाए।
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कर्मियों ने आयुक्त को बताया कि इस आदेश के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। इसके पीछे प्रबंधन और प्राचार्य के बीच आपसी खींचतान और लापरवाही बताई। ज्ञापन देने वाले अंशकालिक शिक्षकों में ज्ञानेंद्र सिंह, अनूप राज सिंह, दिनेश नामदेव, सुमन शुक्ला, योगेंद्र द्विवेदी, महेश सिंह, अनुराग और कर्मचारियों में विनोद कुशवाहा, योगेंद्र गुप्ता, देवेश, बद्री, दिनेश, रामऔतार, हृदयेश द्विवेदी, प्रमोद कुमार, मिथलेश, रोहित आदि शामिल हैं।
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उधर, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. अभिलाष श्रीवास्तव ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र में अनुमोदित अध्यापकों के भुगतान के लिए कहा गया है। अंशकालिक अध्यापकों के लिए स्पष्ट आदेश नहीं हैं। बैंक शाखा प्रबंधक और प्राचार्य ने निदेशक को स्पष्ट आदेश का आग्रह पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि स्ववित्त पोषित खाते से ही अनुमोदित और अंशकालिक दोनों का भुगतान होता है। स्पष्ट आदेश आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।