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Banda News: सहकारी समिति में नहीं डीएपी और यूरिया
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बांदा। डीएपी व यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं। किसानों को धान की बेड़ लगाने के लिए डीएपी चाहिए तो कुछ को बेड़ों में छीटने के लिए यूरिया की जरूरत है। लेकिन सहकारी समितियों में खाद नहीं है। जिले में 30 फीसदी से अधिक रकबा धान की बेड लगाने के लिए शेष है। जिले में खरीफ सीजन में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें धान की रोपाई का लक्ष्य 52 हजार निर्धारित है। जिले में दलहन व तिलहन की करीब 90 फीसदी बुआई हो चुकी है।
धान की अभी 30 फीसदी रोपाई शेष है। किसानों का कहना है जिन किसानों ने धान की रोपाई नहीं की है उन्हें डीएपी व जिन्होंने रोपाई कर ली है उन्हें यूरिया की जरूरत है। लेकिन सहकारी समितियों में डीएपी व यूरिया नहीं है। बाजार में खाद के दामों पर कृषि विभाग का कोई नियंत्रण खाद बेची जा रही है। ज्ञात हो कि खरीफ सीजन में जिले में डीएपी का लक्ष्य 6,266 मीट्रिक टन है। लेकिन अभी तक 3,199 मीट्रिक टन डीएपी मिली है। इसी प्रकार यूरिया का लक्ष्य 5,847 मीट्रिक टन है। लेकिन जिले को अभी तक 2,661 मीट्रिक टन यूरिया मिली है।
एआर राजेश कुमार का कहना है कि शासन से जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक रैक डीएपी की मांग की गई थी। जिसमें उन्हें 800 मीट्रिक टन डीएपी मिली है। डीएम ने पुन: शासन को एक-एक रैक डीएपी व यूरिया उपलब्ध कराने को पत्र लिखा है। एआर का कहना है कि जनपद में खाद वितरण का 60 फीसदी लक्ष्य सहकारी समिति का होता है। 40 फीसदी निजी क्षेत्र की दुकानों का होता है। लेकिन निजी क्षेत्र में खाद के दामों में नियंत्रण न होने से किसान खाद लेने से कतरा रहा है बताया कि किसान परेशान न हो एक दो दिन में एक रैक एमपीएस खाद आ जाएगी।
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धान की अभी 30 फीसदी रोपाई शेष है। किसानों का कहना है जिन किसानों ने धान की रोपाई नहीं की है उन्हें डीएपी व जिन्होंने रोपाई कर ली है उन्हें यूरिया की जरूरत है। लेकिन सहकारी समितियों में डीएपी व यूरिया नहीं है। बाजार में खाद के दामों पर कृषि विभाग का कोई नियंत्रण खाद बेची जा रही है। ज्ञात हो कि खरीफ सीजन में जिले में डीएपी का लक्ष्य 6,266 मीट्रिक टन है। लेकिन अभी तक 3,199 मीट्रिक टन डीएपी मिली है। इसी प्रकार यूरिया का लक्ष्य 5,847 मीट्रिक टन है। लेकिन जिले को अभी तक 2,661 मीट्रिक टन यूरिया मिली है।
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एआर राजेश कुमार का कहना है कि शासन से जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक रैक डीएपी की मांग की गई थी। जिसमें उन्हें 800 मीट्रिक टन डीएपी मिली है। डीएम ने पुन: शासन को एक-एक रैक डीएपी व यूरिया उपलब्ध कराने को पत्र लिखा है। एआर का कहना है कि जनपद में खाद वितरण का 60 फीसदी लक्ष्य सहकारी समिति का होता है। 40 फीसदी निजी क्षेत्र की दुकानों का होता है। लेकिन निजी क्षेत्र में खाद के दामों में नियंत्रण न होने से किसान खाद लेने से कतरा रहा है बताया कि किसान परेशान न हो एक दो दिन में एक रैक एमपीएस खाद आ जाएगी।
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