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बुंदेलखंड के खनिज पर एनजीटी का चाबुक: बेतवा की खदानों में खनन पर रोक, हमीरपुर-उरई की 134 खदानों पर तलवार
Thu, 02 Sep 2021 03:04 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 02 Sep 2021 03:04 PM IST
सार
एनजीटी, नई दिल्ली ने कुछ दिनों पूर्व अपने आदेश संख्या-ओए 673/2018 में आदेश पारित किया है। इस आदेश का हवाला देकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश, झांसी के मुख्य अभियंता (बेतवा) महेश्वरी प्रसाद ने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं।
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अवैध खनन पर लगी रोक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बुंदेलखंड के चार जिलों में बेतवा नदी किनारे दोनों ओर 100 मीटर की दूरी तक बालू खनन पर रोक लगा देने से चित्रकूटधाम मंडल की केन, यमुना और अन्य नदियों में खनिज का दबाव कई गुना बढ़ने के आसार हैं। हमीरपुर और उरई जिलों में बेतवा नदी की लगभग 134 खदानें बंद हो जाएंगी। दोनों जिलों में लगभग चार अरब रुपये सालाना खनिज राजस्व की आमद ठप हो जाएगी।
उधर, बालू माफियाओं और कारोबारियों को यह चिंता सता रही है कि एनजीटी बेतवा की तर्ज पर केन और यमुना नदियों में भी यह पाबंदी लागू न कर दे। एनजीटी, नई दिल्ली ने कुछ दिनों पूर्व अपने आदेश संख्या-ओए 673/2018 में आदेश पारित किया है। इस आदेश का हवाला देकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश, झांसी के मुख्य अभियंता (बेतवा) महेश्वरी प्रसाद ने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं।
इसमेें शासनादेश का भी हवाला शामिल करते हुए कहा है कि ललितपुर, झांसी, जालौन, हमीरपुर तक बेतवा नदी के दोनों किनारों से 100-100 मीटर दूरी तक किसी प्रकार का निर्माण, अतिक्रमण, व्यवसायिक गतिविधियां, पट्टा नीलामी, प्रदूषण करने वाली गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। इस क्षेत्र को फ्लड प्लेन जोन घोषित किया गया है। मुख्य अभियंता के आदेश पत्र में ललितपुर, झांसी, जालौन और हमीरपुर में बेतवा नदी किनारे 100 तक क्षेत्र में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को मौके पर चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
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इस क्षेत्र को फ्लड जोन के रूप में संरक्षित करने को कहा है। यहां चल रही गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद और विस्थापित करने के निर्देश दिए हैं। डीएम के माध्यम से शासनादेश के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई को कहा है। उधर, हमीरपुर और जालौन जिलों में बेतवा नदी की खदानों से खनन प्रतिबंधित हो जाने पर चित्रकूटधाम मंडल की केन नदी का खनन का दबाव काफी बढ़ जाने के आसार बढ़ जाएंगे। बांदा, चित्रकूट में स्थित केन, यमुना, बागै आदि नदियों में खनन कई गुना बढ़ जाएगा। हमीरपुर और उरई की भरपाई यहां से की जाएगी।
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उधर, बालू माफियाओं और कारोबारियों को यह चिंता सता रही है कि एनजीटी बेतवा की तर्ज पर केन और यमुना नदियों में भी यह पाबंदी लागू न कर दे। एनजीटी, नई दिल्ली ने कुछ दिनों पूर्व अपने आदेश संख्या-ओए 673/2018 में आदेश पारित किया है। इस आदेश का हवाला देकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश, झांसी के मुख्य अभियंता (बेतवा) महेश्वरी प्रसाद ने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं।
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इसमेें शासनादेश का भी हवाला शामिल करते हुए कहा है कि ललितपुर, झांसी, जालौन, हमीरपुर तक बेतवा नदी के दोनों किनारों से 100-100 मीटर दूरी तक किसी प्रकार का निर्माण, अतिक्रमण, व्यवसायिक गतिविधियां, पट्टा नीलामी, प्रदूषण करने वाली गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। इस क्षेत्र को फ्लड प्लेन जोन घोषित किया गया है। मुख्य अभियंता के आदेश पत्र में ललितपुर, झांसी, जालौन और हमीरपुर में बेतवा नदी किनारे 100 तक क्षेत्र में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को मौके पर चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
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इस क्षेत्र को फ्लड जोन के रूप में संरक्षित करने को कहा है। यहां चल रही गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद और विस्थापित करने के निर्देश दिए हैं। डीएम के माध्यम से शासनादेश के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई को कहा है। उधर, हमीरपुर और जालौन जिलों में बेतवा नदी की खदानों से खनन प्रतिबंधित हो जाने पर चित्रकूटधाम मंडल की केन नदी का खनन का दबाव काफी बढ़ जाने के आसार बढ़ जाएंगे। बांदा, चित्रकूट में स्थित केन, यमुना, बागै आदि नदियों में खनन कई गुना बढ़ जाएगा। हमीरपुर और उरई की भरपाई यहां से की जाएगी।
पट्टी पर न पट्टे, बाढ़ में मुआवजा भी नहीं
ललितपुर में राजघाट बांध से लेकर हमीरपुर तक बेतवा नदी की लंबाई लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर है। एनजीटी के आदेश के बाद नदी की यह पट्टी नो डेवलपमेंट जोन बन जाएगी। यहां खनन के पट्टे नहीं होंगे। किसी काम के लिए यहां एनओसी नहीं दी जाएगी। न ही नक्शा पास होगा। अवैध निर्माण पर कानूनी और सीआरपीसी की कार्रवाई होगी। इस पट्टी पर स्थित अवैध निर्माण को बाढ़ से क्षति होने पर कोई हर्जाना/मुआवजा नहीं मिलेगा। न ही यहां बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे।
हमीरपुर में दो अरब की रायल्टी होगी बंद
हमीरपुर में बेतवा नदी में तकरीबन 125 खदानें हैं। इनमें 28 खदानों के पट्टे चल रहे हैं। यहां बेतवा की लंबाई करीब 134 किलोमीटर है। बालू/खनिज से सालाना दो अरब रुपये से ज्यादा राजस्व आता है। इस वर्ष मार्च तक 2 अरब 22 करोड़ 51 लाख रुपये खनिज राजस्व आया है।
उरई में नौ खदानों पर बंदी का खतरा
जालौन (उरई) जनपद में बेतवा नदी पर 9 बालू खदानें चल रहीं हैं। इनका क्षेत्रफल लगभग 450 एकड़ है। खनिज विभाग के मुताबिक यहां लगभग एक अरब 70 करोड़ रुपये सालाना रायल्टी/राजस्व आता है।
केन व यमुना के पट्टाधारकों में खलबली
उरई और हमीरपुर में बेतवा खदानें बंद होने के आसार की खबरें मिलने पर चित्रकूटधाम मंडल में केन, यमुना और बागै आदि नदियों की खदानों के पट्टाधारक असमंजस्य में हैं। एक तरफ उनके लिए यह राहत होगी कि बालू की खपत/डिमांड बहुत बढ़ जाएगी। हमीरपुर और उरई के ट्रक यहां लोड होने आएंगे। दूसरी तरफ चिंता यह है कि खदानों की नीलामी में प्रतिस्पर्धा (कंप्टीशन) बढ़ जाएगी। हमीरपुर और उरई में बेतवा खदानों के पट्टे लेने वाले केन और यमुना की खदानें हथियाने की जुगत भिड़ाएंगे।
ललितपुर में राजघाट बांध से लेकर हमीरपुर तक बेतवा नदी की लंबाई लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर है। एनजीटी के आदेश के बाद नदी की यह पट्टी नो डेवलपमेंट जोन बन जाएगी। यहां खनन के पट्टे नहीं होंगे। किसी काम के लिए यहां एनओसी नहीं दी जाएगी। न ही नक्शा पास होगा। अवैध निर्माण पर कानूनी और सीआरपीसी की कार्रवाई होगी। इस पट्टी पर स्थित अवैध निर्माण को बाढ़ से क्षति होने पर कोई हर्जाना/मुआवजा नहीं मिलेगा। न ही यहां बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे।
हमीरपुर में दो अरब की रायल्टी होगी बंद
हमीरपुर में बेतवा नदी में तकरीबन 125 खदानें हैं। इनमें 28 खदानों के पट्टे चल रहे हैं। यहां बेतवा की लंबाई करीब 134 किलोमीटर है। बालू/खनिज से सालाना दो अरब रुपये से ज्यादा राजस्व आता है। इस वर्ष मार्च तक 2 अरब 22 करोड़ 51 लाख रुपये खनिज राजस्व आया है।
उरई में नौ खदानों पर बंदी का खतरा
जालौन (उरई) जनपद में बेतवा नदी पर 9 बालू खदानें चल रहीं हैं। इनका क्षेत्रफल लगभग 450 एकड़ है। खनिज विभाग के मुताबिक यहां लगभग एक अरब 70 करोड़ रुपये सालाना रायल्टी/राजस्व आता है।
केन व यमुना के पट्टाधारकों में खलबली
उरई और हमीरपुर में बेतवा खदानें बंद होने के आसार की खबरें मिलने पर चित्रकूटधाम मंडल में केन, यमुना और बागै आदि नदियों की खदानों के पट्टाधारक असमंजस्य में हैं। एक तरफ उनके लिए यह राहत होगी कि बालू की खपत/डिमांड बहुत बढ़ जाएगी। हमीरपुर और उरई के ट्रक यहां लोड होने आएंगे। दूसरी तरफ चिंता यह है कि खदानों की नीलामी में प्रतिस्पर्धा (कंप्टीशन) बढ़ जाएगी। हमीरपुर और उरई में बेतवा खदानों के पट्टे लेने वाले केन और यमुना की खदानें हथियाने की जुगत भिड़ाएंगे।