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इंटेसिव ब्लाक घोषित नरैनी में नहीं दिखा समूहों का रोजगार

Wed, 28 Jan 2015 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 28 Jan 2015 11:52 PM IST
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Naraini not show employment groups

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले के नरैनी ब्लाक को चयनित करने के बाद यहां गरीब महिलाओं को स्वरोजगार के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। स्टाफ और बजट की कमी ने इसकी हवा निकाल दी।

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रिवाल्विंग फंड देने के बाद समूहों की गतिविधियों की किसी को सुध नहीं है। पिछले वर्ष शुरू हुई योजना में यहां नरैनी को इंटेसिव ब्लाक चुना गया था। जिला व ब्लाक स्तर पर पर्याप्त स्टाफ की तैनाती नहीं हुई। जिला कोआर्डिनेटर (डीसी) की जिम्मेदारी उपायुक्त मनरेगा संभाले हैं। एक कर्मचारी व एक आपरेटर के सहारे जिला मुख्यालय चल रहा है।
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ब्लाक में एचआर, लाइवली हुड और थेमेटिक एक्सपर्ट (सोशल मोबलाइजर), फाइनेंस इंचार्ज की तैनाती नहीं हुई। उधर, एसजीएसवाई के फैसिलेटर हटाए जाने के बाद अब समूहों को प्रेरित व सक्रिय करने की कोई व्यवस्था नहीं है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में 77.18 लाख रुपये जारी किए गए। इसमें समूहों के रिवाल्विंग फंड के अलावा कर्मचारियों का वेतन व मानदेय शामिल है।
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इंटेसिव ब्लाक होने के बावजूद अब तक 137 महिला समूह गठित किए गए हैं। इसके अलावा बड़ोखर ब्लाक में 47, महुआ में 33, बिसंडा में 44, बबेरू में 31, कमासिन में 43, तिंदवारी में 33 और जसपुरा ब्लाक में 42 समूह शामिल हैं। इंटेसिव ब्लाक की तरह इन ब्लाकों में भी समूह गठन के बाद प्रत्येक समूह को 10 हजार रुपये रिवाल्विंग फंड दिया गया है। इस पर 21 लाख रुपये खर्च हुए।

नेटवर्क में बीपीएल व गरीब महिलाएं शामिल
एनआरएलएम के तहत बीपीएल परिवार की कम से कम एक महिला को समूह सदस्य बनाकर नेटवर्क में शामिल करने की योजना है। इसके अलावा जिनके नाम बीपीएल सूची में नहीं हैं, उन्हें खुली बैठक में चिह्नित कर समूहों में शामिल किया जा सकता है।


प्रत्येक समूह में कम से कम 50 फीसदी एससी/एसटी, 15 फीसदी अल्पसंख्यक और तीन फीसदी विकलांग लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जानी है। सोशल मोबलाइजर राकेश कुमार सोनकर का कहना है कि अब रिवाल्विंग फंड प्रति समूह 10 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है।

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