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एमपी से पानी लाकर प्यास बुझा रहे 50 गांवों की लोग

Sat, 16 Apr 2016 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sat, 16 Apr 2016 11:27 PM IST
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MP from bringing water to quench the thirst of the people of 50 villages
पानी संकट - फोटो : अमर उजाला

करतल (बांदा)। पेयजल संकट ने सरहद की पाबंदियां तोड़ दी हैं। पानी संकट से जूझ रहे सीमा पर स्थिति 13 गांवों और 34 मजरों के लोग रोजाना 15 किमी दूरी तय कर मध्य प्रदेश से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। इन गांवों के लगभग सभी हैंडपंप, कुएं और तालाब सूख गए हैं।

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वैसे तो पेयजल संकट पिछले सालों में भी रहा है, लेकिन इस बार सारे रिकार्ड टूट गए हैं। सीमा पर स्थित करीब 50 गांवों महाराजपुर, रगौली, बाबूपुर, रानीपुर, भावरपुर, विदुआ पुरवा, नेढुवा, बड़ैछा, महोरछा, महारानी, पुंगरी, गोपरा, पिपरा, शाहबाजपुर, खलारी, गाजीपुर, सलामतपुर आदि में पीने के पानी के कोई स्रोत नहीं बचे हैं।
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बिल्हरका गांव में पांच कुएं सूख गए हैं। सिर्फ एक हैंडपंप थोड़ा बहुत पानी दे रहा है। इन गांवों के लोग प्यास बुझाने के लिए मध्य प्रदेश के बाबा पुरवा (अजयगढ़) से बैलगाड़ियों से पानी ला रहे हैं। मजरा महारानी (नहरी) के लोगों ने बताया कि सीमा के उस पार मध्य प्रदेश के बरौली गांव जाकर केन नदी से पीने का पानी ला रहे हैं।
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रंज और बागै नदियों को मध्य प्रदेश में बांध लेने पर इनका पानी यूपी के गांवों तक नहीं पहुंच रहा। इन गांवों को ड्राई जोन बताया जा रहा है। जल निगम अवर अभियंता सुनील चौहान ने बताया कि इन गांवों की रिपोर्ट भेज दी है। शासन से मंजूरी मिलते ही टैंकरों से पानी भेजा जाएगा। जानवरों के लिए ट्यूबवेल चलवाकर तालाबों को भरा जाएगा। हालांकि करतल क्षेत्र में कोई भी सरकारी ट्यूबवेल नहीं है।

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