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Banda News: सिंदूर से किया मइया का श्रंगार, गूंजी जय-जयकार

Thu, 11 Apr 2024 11:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 11:58 PM IST
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Mother was decorated with vermilion, resounding cheers
बांदा। जगत जननी मां जगदंबा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की गुरुवार को श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ आराधना की। मां चंद्रघंटा को संसार में न्याय और अनुशासन स्थापित करने का कारक माना जाता है। भोर से ही श्रद्धालु देवी मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा करने के बाद मातारानी को खीर का भोग लगाया। इसके साथ श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण भी किया गया। मिठाई और खीर का भोग मातारानी को लगाया। मां चंद्रघंटा संसार में न्याय व अनुशासन स्थापित करने का काम करती हैं। इस स्वरूप में माता के मस्तक पर अर्धचंद्र सजा हुआ है इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
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आज माता कुष्मांडा स्वरूप की होगी पूजा
बांदा। नवरात्र के चौथे दिन जगत जननी मां जगदंबे के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना होगी। मानाजाता है कि श्रष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस ब्रम्हांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कुष्मांडा कहा जाता है। सृष्टि की रचना करने के कारण माता को आदिशक्ति नाम से भी जाना जाता है। इनकी आठ भुजाएं हैं और ये सिंह पर सवार हैंँ मां कुष्मांडा के सात हाथों में चक्र, गदा, धनुष, कमंडल, अमृत से भरा हुआ कलश, बाण और कमल का फूल है। जबकि आठवें हाथ जपमाला है, जो सभी प्रकार की सिद्धियों से युक्त है।
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मढ़ीदाई और जोगिनी मंदिर, विंध्यवासिनी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
बबेरू/खत्रीपहाड़। चैत्र नवरात्र में तीसरे दिन गुरुवार को मां मढी दाई मंदिर में श्रद्धालुओं ने माता के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की। माताराखनी को खीर का भेाग लगाया गया। इसके साथ ही मुख्य चौराहे पर स्थित शिव मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सुबह से ही माता रानी के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच गई। इसके साथ ही आयोजित मेले में श्रद्धालुओं के द्वारा जमकर खरीददारी भी की जा रही है। मेले में सर्कस झूला बच्चों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसी तरह यमुना नदी में स्थापित बाकल की जोगनी माता मंदिर में श्रद्धालुओं का रेला पहुंच रहा है। सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी तैनात नजर आए। इधर, गिरवां स्थित पर्वत पर विराजमान मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन करने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भोर के समय मंदिर परिसर में विराजमान मातारानी का दर्शन करने के साथ ही श्रद्धालु 551 सीढि़यां चढ़कर पर्वत पर पहुंचे और चोटी पर विराजमान मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। मातारानी के दर्शन को श्रद्धालुओं का रेला पहुंच रहा है। इसके साथ ही विंध्यवासिनी परिसर में लगे मेले में श्रद्धालु जमकर खरीददारी कर रहे हैं। झूला, रामलीला आदि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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