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Banda News: 50 करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी पशु छुट्टा
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बांदा। पशुपालन विभाग के अभिलेखों में जिला अन्ना पशुओं से मुक्त हैं। गोशालाओं में शत-प्रतिशत पशु संरक्षित हैं, जबकि हकीकत यह है कि हजारों पशु गांव व शहर की सड़कों पर अन्ना हैं। पशुओं की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। तीन साल में 50 करोड़ से अधिक खर्च होने के बाद भी यहां के लोगों को अन्ना पशुओं से निजात नहीं मिली है।
जिले में पशुओं के संरक्षण के लिए अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल सहित कान्हा गोशाला, कांजी हाउस, वृहद गो संरक्षण केंद्र स्थापित है। पशुओं के रख-रखाव सहित भरण पोषण के नाम पर प्रति वर्ष 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे है। पशुपालन विभाग का दावा है कि लक्ष्य के से अधिक अन्ना पशु गोसंरक्षण केंद्रों में संरक्षित है, लेकिन हकीकत इससे परे है। हजारों की संख्या में अन्ना मवेशी गांव व शहर की सड़कों पर छुट्टा धूम रहे है। किसानों की फसल चट कर करने के साथ ही रात के समय यह वाहनों के लिए दुर्घटना का सबब बने हुए है। पिछले एक माह के आकड़ों पर गौर करे तो अन्ना गोवंशों की वजह से 12 से अधिक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुए। दो लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। दुर्घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार सिर्फ खाना पूरी में लगे हुए है। मौजूदा समय में अधिकांश गोआश्रय स्थल खाली हैं। इक्का दुक्का ही पशु संरक्षित है। केयर टेकर यह कहकर गुमराह कर रहे है कि पशु चरने गए है। जब कि पशु पूरी तरह से छुट्टा है। रात के समय कुछ पशु चरकर खुद ही गोशाला आ जाते है।
इनसेट...
पशुओं के संरक्षण का दावा
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में अन्ना पशुओं के संरक्षण का लक्ष्य 47658 है। इसके सापेक्ष 300 से अधिक स्थायी व अस्थाई गोशालाओं में 61 हजार से अधिक पशु संरक्षित है।
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सुपुर्दगी में दिए 6740 पशु
जिले में पशुपालन विभाग ने किसानों को 6740 पशु सुपुर्दगी में दिए गए है। जिन्हें सरकार की ओर से प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से 30 रुपएं भरण पोषण भत्ता दिया जाता है।
वर्जन
जिले में लक्ष्य से अधिक पशु गोवंश संरक्षण केंद्रों पर संचालित है। जो पशु गांव व सडक़ पर नजर आ रहे है वह पालतू है। पशुपालकों ने दूध निकालने के बाद छोड़ दिया जाता है।-मनोज अवस्थी, उप निदेशक (पशुपालन), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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जिले में पशुओं के संरक्षण के लिए अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल सहित कान्हा गोशाला, कांजी हाउस, वृहद गो संरक्षण केंद्र स्थापित है। पशुओं के रख-रखाव सहित भरण पोषण के नाम पर प्रति वर्ष 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे है। पशुपालन विभाग का दावा है कि लक्ष्य के से अधिक अन्ना पशु गोसंरक्षण केंद्रों में संरक्षित है, लेकिन हकीकत इससे परे है। हजारों की संख्या में अन्ना मवेशी गांव व शहर की सड़कों पर छुट्टा धूम रहे है। किसानों की फसल चट कर करने के साथ ही रात के समय यह वाहनों के लिए दुर्घटना का सबब बने हुए है। पिछले एक माह के आकड़ों पर गौर करे तो अन्ना गोवंशों की वजह से 12 से अधिक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुए। दो लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। दुर्घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार सिर्फ खाना पूरी में लगे हुए है। मौजूदा समय में अधिकांश गोआश्रय स्थल खाली हैं। इक्का दुक्का ही पशु संरक्षित है। केयर टेकर यह कहकर गुमराह कर रहे है कि पशु चरने गए है। जब कि पशु पूरी तरह से छुट्टा है। रात के समय कुछ पशु चरकर खुद ही गोशाला आ जाते है।
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इनसेट...
पशुओं के संरक्षण का दावा
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में अन्ना पशुओं के संरक्षण का लक्ष्य 47658 है। इसके सापेक्ष 300 से अधिक स्थायी व अस्थाई गोशालाओं में 61 हजार से अधिक पशु संरक्षित है।
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सुपुर्दगी में दिए 6740 पशु
जिले में पशुपालन विभाग ने किसानों को 6740 पशु सुपुर्दगी में दिए गए है। जिन्हें सरकार की ओर से प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से 30 रुपएं भरण पोषण भत्ता दिया जाता है।
वर्जन
जिले में लक्ष्य से अधिक पशु गोवंश संरक्षण केंद्रों पर संचालित है। जो पशु गांव व सडक़ पर नजर आ रहे है वह पालतू है। पशुपालकों ने दूध निकालने के बाद छोड़ दिया जाता है।-मनोज अवस्थी, उप निदेशक (पशुपालन), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा