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मिड-डे मील में बांदा बना प्रदेश में मॉडल

Mon, 24 Aug 2020 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 11:33 PM IST
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Model made in Banda region in mid-day meal
मिड-डे मील ग्रहण करतीं छात्राएं। - फोटो : BANDA
बांदा। मिड-डे-मील योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बच्चों से रजिस्टर में हस्ताक्षर कराने की यहां लागू व्यवस्था प्रदेश में मॉडल बन गई। तत्कालीन डीएम हीरालाल की इस पहल को शासन ने भी सराहा।
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नतीजतन बांदा में लागू इस व्यवस्था को बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश भर के स्कूलों में लागू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि कोरोना काल के चलते मार्च से सभी स्कूलों में छुट्टी है। मिड-डे मील भी ठप है।
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तत्कालीन डीएम हीरालाल ने मिड-डे-मील में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जनवरी 2019 में बीएसए को आदेश दिए थे कि मिड-डे-मील सहित यूनिफार्म, बस्ता, जूता आदि योजनाओं में अलग-अलग रजिस्टर बनाकर बच्चों से हस्ताक्षर कराएं।
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इस पहल पर अमल शुरू हुआ और मिड-डे मील सहित अन्य योजनाओं में बच्चों से हस्ताक्षर कराए जाने लगे। डीएम ने योजना की सफलता पर प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा परिषद) को पत्र भेजकर यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू करने का अनुरोध किया। उनकी इस पहल पर शासन ने संज्ञान ले लिया।
बेसिक शिक्षा परिषद के अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि सभी सरकारी सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में मिड-डे-मील देने के पूर्व बच्चों के रजिस्टर में हस्ताक्षर करवाए जाएं। जो बच्चे हस्ताक्षर करना नहीं जानते हैं उन्हें सिखाया जाए। इससे छात्र संख्या अधिक दर्शाकर मिड-डे मील में गड़बड़ी नहीं हो सकेगी।
बच्चों को करना सिखाया हस्ताक्षर
सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अरविंद अस्थाना का कहना है कि तत्कालीन डीएम के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के सभी स्कूलों में बच्चों को हस्ताक्षर करना सिखाया गया। कक्षा-1 से 5वीं तक के छोटे बच्चों को हस्ताक्षर का एक अक्षर सिखाया गया। अब सभी अपना नाम लिखने लगे।
पूरे साल चली यह व्यवस्था
बेसिक शिक्षाधिकारी हरिश्चंद्र नाथ ने बताया कि पहली फरवरी 2019 से लॉकडाउन में स्कूल बंद होने तक यह व्यवस्था लागू रही। बच्चों से हस्ताक्षर कराने के बाद मिड-डे-मिल का वितरण किया गया। बच्चों को हस्ताक्षर सिखाने में शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। फर्जीवाड़ा रोकने में यह व्यवस्था कारगर साबित हुई।

मिड-डे मील में रहेगी पारदर्शिता
प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि मिड-डे मील में गड़बड़ियों को रोकने के लिए बच्चों के हस्ताक्षर कराने की पहल सराहनीय थी। इसे नजीर मानते हुए शासन द्वारा पूरे प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में इसे लागू किए जाने का आदेश स्वागत योग्य है। इससे मिड-डे मील में गड़बड़ी नहीं हो पाएगी। पारदर्शिता रहेगी।
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