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राशन किट लेने 35 किमी पैदल चले प्रवासी
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तिंदवारी। क्वारंटीन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूर बुधवार को 35 किलोमीटर पैदल चलकर बांदा पहुंचे और अपनी राशन किट प्राप्त की। प्रवासी मजदूरों का आरोप है कि उन्हें राशन किट लेने के लिए प्रशासन ने कोई गाड़ी की व्यवस्था भी नहीं कराई।
बांदा और पैलानी तहसील के 56 गांवों में बाहर से आए तकरीबन आठ हजार मजदूरों में कुछ गिने चुने करीब एक हजार मजदूरों जिन्होंने अपनी थर्मल स्क्रीनिंग बांदा में कराई थी। इसमें से कुछ मजदूरों को बुधवार को बांदा तहसील में राशन किट सौंपी गई। ये सभी मजदूर अपने गांव से तिंदवारी से 35 किलोमीटर पैदल चलकर बांदा तहसील पहुंचे थे। यह सभी मजदूर विभिन्न साधनों से अपने गांव पहुंचे थे। गांव में बने स्कूलों के शेल्टरहोमों में यह रुके हुए थे।
इधर प्रवासी मजदूरों में पिपरगवां के दीपू, संतोष, सत्यप्रकाश, इंद्र कुमार, रविकरण, ब्रजेश, मोहन, विक्रम, कुलदीप, ओमप्रकाश, धर्मपाल आदि 34 मजदूरों ने प्राथमिक विद्यालय में बने शेल्टर होम में 14 दिन गुजारे थे, लेकिन राशन किट नहीं मिली। तिंदवारी सहित भुजरख, परसौड़ा, गोखरही, महुई, सेमरी, मुंगुस, तेरहीमाफी आदि गांवों के हजारों मजदूरों को राशन किट के लिए अपात्र कर दिया गया है। इस संबंध में तहसीलदार अवधेश निगम का कहना है कि किट उन मजदूरों को दी गई है जो शेल्टर होम में रहे हैं। जो भी शेष मजदूर हैं उनको राशन किट नहीं मिलेगी। सरकार उनके खातों में पैसा भेजेगी।
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बांदा और पैलानी तहसील के 56 गांवों में बाहर से आए तकरीबन आठ हजार मजदूरों में कुछ गिने चुने करीब एक हजार मजदूरों जिन्होंने अपनी थर्मल स्क्रीनिंग बांदा में कराई थी। इसमें से कुछ मजदूरों को बुधवार को बांदा तहसील में राशन किट सौंपी गई। ये सभी मजदूर अपने गांव से तिंदवारी से 35 किलोमीटर पैदल चलकर बांदा तहसील पहुंचे थे। यह सभी मजदूर विभिन्न साधनों से अपने गांव पहुंचे थे। गांव में बने स्कूलों के शेल्टरहोमों में यह रुके हुए थे।
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इधर प्रवासी मजदूरों में पिपरगवां के दीपू, संतोष, सत्यप्रकाश, इंद्र कुमार, रविकरण, ब्रजेश, मोहन, विक्रम, कुलदीप, ओमप्रकाश, धर्मपाल आदि 34 मजदूरों ने प्राथमिक विद्यालय में बने शेल्टर होम में 14 दिन गुजारे थे, लेकिन राशन किट नहीं मिली। तिंदवारी सहित भुजरख, परसौड़ा, गोखरही, महुई, सेमरी, मुंगुस, तेरहीमाफी आदि गांवों के हजारों मजदूरों को राशन किट के लिए अपात्र कर दिया गया है। इस संबंध में तहसीलदार अवधेश निगम का कहना है कि किट उन मजदूरों को दी गई है जो शेल्टर होम में रहे हैं। जो भी शेष मजदूर हैं उनको राशन किट नहीं मिलेगी। सरकार उनके खातों में पैसा भेजेगी।
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