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बिक्री पर रोक से धरी रहेंगी 12 करोड़ की दवाएं

Sun, 20 Mar 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 20 Mar 2016 11:49 PM IST
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Medications will be laid from a ban on sale of 12 million
मानव शरीर पर प्रतिकूल असर के मद्देनजर इन फिक्स डोज कांबिनेशन ड्रग्स को बैन किया गया है।

बांदा। रोजमर्रा और कुछ गंभीर मर्जों के इलाज में काम आने वाली लगभग साढ़े तीन सौ दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने से चित्रकूटधाम मंडल में जहां हर महीने लगभग 25 करोड़ रुपये का दवा व्यवसाय खत्म होगा वहीं दूसरी तरफ 12 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित दवाएं नहीं बेंची जा सकेंगी। इससे दवा व्यवसायियों को तगड़ी चपत लगेगी। साथ ही मरीजों को कई अड़चनें आएंगी। कुछ दवाओें पर रोक लग गई है। कई दवाओं पर पहली अप्रैल से रोक लग जाएगी।

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केंद्र सरकार ने कुछ दिनों पूर्व साढ़े तीन सौ से ज्यादा दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। इनमें ज्यादातर दवाएं कंबीनेशन (मिश्रित) वाली हैं। यह दवाएं साधारण खांसी, जुकाम से लेकर हार्ट, कैंसर, टीबी आदि रोगों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।
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केंद्र सरकार के इस आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ दवाओं पर 11 मार्च और कुछ दवाओं पर पहली अप्रैल तक के लिए रोक लगा दी थी। यह तारीख बीतने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन दवाओं की बिक्री पर शिकंजा कसते हुए दवा व्यवसायियों से इन्हें तत्काल कंपनियों को वापस करने का निर्देश दिया है। उधर, पहली अप्रैल तक मिली छूट वाली दवाओं की भी सूची तैयार की जा रही है। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के ड्रग इंसपेक्टर आशुतोष मिश्रा ने सभी दवा विक्रेताओं को इस बाबत सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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उधर, दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के बाद मौजूदा समय में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में लगभग 12 करोड़ रुपये मूल्य की इन प्रतिबंधित दवाओं का स्टाक मंडल के लगभग साढ़े तीन हजार दवा विक्रेेताओं के पास है। प्रतिमाह मंडल में इन दवाओं का लगभग 25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। बिक्री पर रोक से दवा व्यवसायी भी खासे नाराज हैं। उनको तगड़ी आर्थिक चपत लग रही है। दवा व्यवसायी बताते हैं कि कंपनियां उनकी दवाएं वापस करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में चपत उन्हें खुद सहन करना पड़ेगी।

मरीजों को खर्च करना पड़ेंगे दोगुना पैसे
बांदा। दवाओं पर रोक से आम मरीजों का भी घाटा है। उन्हें इलाज पर अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। दवा विक्रेता इसका उदाहरण देकर बताते हैं कि एंटीबायटिक दवा सिफेक्सजीन और एजीथ्रोमाइसिन मिश्रित (कंबीनेशन) रूप से बनती हैं। यह गोली सीने के इंफेक्शन आदि में काम आती है। बाजार में इस गोली की कीमत 14-15 रुपये है लेकिन अगर दोनों को अलग-अलग किया जाएगा तो सिर्फ सिफेक्सजीन 15-16 रुपये की मिलेगी। एजीथ्रोमाइसिन गोली की कीमत 11 से 16 रुपये है। यानी मरीज को दोगुने से भी ज्यादा दाम खर्च करना पड़ेंगे। इसी कैंबीफ्लाम का उदाहरण है। इसमें आईब्रूफीन और पैरासीटामाल एक साथ मिला होता है। बुखार, दर्द आदि में इस्तेमाल होती है। मौजूदा में कैंबीफ्लाम गोली की कीमत मात्र 70 पैसे है। जबकि अलग करने बेंचे जाने पर सिर्फ आईब्रूफीन दो रुपये में मिलेगी।

दवा व्यवसाय में आएगी 60 फीसदी तक गिरावट
‘दवाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी केंद्र सरकार का निर्णय न तो व्यवहारिक है न जनहितकारी। इससे दवा व्यवसाय की ग्रोथ में लगभग 60 फीसदी तक की कमी आ जाएगी। अभी मौजूदा समय मंडल के चारों जिलों में लगभग 12 करोड़ रुपये की यह दवाएं मेडिकल स्टोर मेें मौजूद हैं। हमारा केंद्रीय संगठन इस बारे में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क में है। केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा और जैसे निर्देश देगा उस पर पूरे बुंदेलखंड जोन के दवा व्यवसायी अमल करेंगे’।

शांतनु कुमार उर्फ सत्तन, बुंदेलखंड जोन अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

कई दवाओं का तो विकल्प ही नहीं
‘बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दवाआें पर बिना उनका विकल्प तैयार किए रोक लगा दिया जाना दवा व्यवसायियों और मरीजों दोनों के लिए ही नुकसानदेह है। कुछ दवाओं का तो विकल्प ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को काफी गंभीर स्थिति से गुजरना पड़ेगा। केंद्र सरकार को अपने इस निर्णय में पुनर्विचार करना चाहिए’।
अमित सेठ सोनू, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बांदा

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