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मंजुला विवेक ने थामा सपा का परचम
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बांदा। सपा की टिकट सियासत में नई एंट्री के साथ नया मोड़ आया है। पूर्व मंत्री और बांदा सदर से तीन बार कांग्रेस के विधायक रहे स्वर्गीय विवेक कुमार सिंह की पत्नी मंजुला विवेक सिंह सपरिवार और समर्थकों के साथ सपा में शामिल हो गईं हैं।
इसकी सुगबुगाहट काफी दिनों से चल रही थी। मंजुला की किसी राजनीतिक दल में यह पहली एंट्री है। बृहस्पतिवार को लखनऊ में वह अपने बेटों सहित सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलीं और सदस्यता हासिल की।
विवेक सिंह चर्चित और लोकप्रिय कांग्रेस के विधायक रहे। उनके चुनाव जीतने में पार्टी से ज्यादा उनकी छवि मददगार बनी। गंभीर रूप से बीमार होने के बाद मई 2020 में विवेक सिंह का लगभग 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वह 1996 में प्रदेश की गठबंधन सरकार में ऊर्जा राज्य मंत्री रहे।
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विवेक सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी मंजुला विवेक सिंह के बारे में लगातार राजनीति में कदम रखने के संकेत मिल रहे थे। विभिन्न अवसरों पर उनकी और उनके बेटों की बधाई संदेश संबंधी होर्डिंग्स और विज्ञापन साफ इशारा कर रहे थे।
अंतत: इन कयासों पर बृहस्पतिवार को विराम लग गया। लखनऊ में मंजुला सिंह सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलीं। उन्हें स्मृति चिह्न दिया। अखिलेश ने उन्हें सपा में शामिल करने की औपचारिक घोषणा की।
बेटे और समर्थक भी सपा में
मंजुला सिंह के साथ लखनऊ में सपा में शामिल होने वालों में उनके बेटों ईशान सिंह व यशोवर्धन सिंह सहित विवेक सिंह के प्रतिनिधि रहे अधिवक्ता खुर्शीद अहमद खां, बांदा नगर पालिका सभासद राजेश सिंह गौतम व संदीप यादव, शहर कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र श्रीवास्तव तथा धनंजय सिंह टीटू, सुधीर सिंह (क्योटरा), कतरावल के ग्राम प्रधान विद्यानंद सिंह, हस्तम गांव के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह, ताहिर मंसूर खां उर्फ चिंटू (अलीगंज) शामिल हैं।
मंजुला की मंशा चुनाव लड़ने की
मंजुला की मंशा अपने पति के नक्शे कदम पर चलकर सदर सीट से विधान सभा चुनाव लड़ने की है। अलबत्ता उन्होंने कांग्रेस से चुनाव का दांव लगाना मुनासिब नहीं समझा। सपा को ही फायदेमंद माना।
सूत्रों के मुताबिक, मंजुला और उनके बेटों के तार खामोशी के साथ सपा हाईकमान के साथ जुड़े रहे। पिछले वर्ष बांदा आए अखिलेश यादव विवेक सिंह के निधन का पुरसा देने उनके बांदा स्थित आवास पर आए थे।
यहां मंजुला सिंह और पुत्रों से मिले थे। उधर, भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार को सपा में शामिल होते वक्त अखिलेश यादव ने मंजुला सिंह सपा से टिकट देने का भरोसा दिलाया है।
सपा के टिकटार्थी खेमे में खलबली
मंजुला की एंट्री से सपा खेमे में भी खलबली है। खासकर उनके चेहरों पर शिकन है जो सदर विधानसभा सीट से टिकट के लिए लंबे अरसे से जद्दोजहद कर रहे हैं और जुगत भिड़ाएं हैं।
उधर, राजनीतिज्ञों में यह भी चर्चा है कि मंजुला सिंह को टिकट मिलने पर सदर सीट में क्षत्रिय लाबी जहां जोरशोर से उनके पक्ष में जुटेगी तो दूसरी तरफ ब्राह्मण वर्ग कन्नी काटेगा।
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इसकी सुगबुगाहट काफी दिनों से चल रही थी। मंजुला की किसी राजनीतिक दल में यह पहली एंट्री है। बृहस्पतिवार को लखनऊ में वह अपने बेटों सहित सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलीं और सदस्यता हासिल की।
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विवेक सिंह चर्चित और लोकप्रिय कांग्रेस के विधायक रहे। उनके चुनाव जीतने में पार्टी से ज्यादा उनकी छवि मददगार बनी। गंभीर रूप से बीमार होने के बाद मई 2020 में विवेक सिंह का लगभग 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वह 1996 में प्रदेश की गठबंधन सरकार में ऊर्जा राज्य मंत्री रहे।
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विवेक सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी मंजुला विवेक सिंह के बारे में लगातार राजनीति में कदम रखने के संकेत मिल रहे थे। विभिन्न अवसरों पर उनकी और उनके बेटों की बधाई संदेश संबंधी होर्डिंग्स और विज्ञापन साफ इशारा कर रहे थे।
अंतत: इन कयासों पर बृहस्पतिवार को विराम लग गया। लखनऊ में मंजुला सिंह सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलीं। उन्हें स्मृति चिह्न दिया। अखिलेश ने उन्हें सपा में शामिल करने की औपचारिक घोषणा की।
बेटे और समर्थक भी सपा में
मंजुला सिंह के साथ लखनऊ में सपा में शामिल होने वालों में उनके बेटों ईशान सिंह व यशोवर्धन सिंह सहित विवेक सिंह के प्रतिनिधि रहे अधिवक्ता खुर्शीद अहमद खां, बांदा नगर पालिका सभासद राजेश सिंह गौतम व संदीप यादव, शहर कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र श्रीवास्तव तथा धनंजय सिंह टीटू, सुधीर सिंह (क्योटरा), कतरावल के ग्राम प्रधान विद्यानंद सिंह, हस्तम गांव के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह, ताहिर मंसूर खां उर्फ चिंटू (अलीगंज) शामिल हैं।
मंजुला की मंशा चुनाव लड़ने की
मंजुला की मंशा अपने पति के नक्शे कदम पर चलकर सदर सीट से विधान सभा चुनाव लड़ने की है। अलबत्ता उन्होंने कांग्रेस से चुनाव का दांव लगाना मुनासिब नहीं समझा। सपा को ही फायदेमंद माना।
सूत्रों के मुताबिक, मंजुला और उनके बेटों के तार खामोशी के साथ सपा हाईकमान के साथ जुड़े रहे। पिछले वर्ष बांदा आए अखिलेश यादव विवेक सिंह के निधन का पुरसा देने उनके बांदा स्थित आवास पर आए थे।
यहां मंजुला सिंह और पुत्रों से मिले थे। उधर, भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार को सपा में शामिल होते वक्त अखिलेश यादव ने मंजुला सिंह सपा से टिकट देने का भरोसा दिलाया है।
सपा के टिकटार्थी खेमे में खलबली
मंजुला की एंट्री से सपा खेमे में भी खलबली है। खासकर उनके चेहरों पर शिकन है जो सदर विधानसभा सीट से टिकट के लिए लंबे अरसे से जद्दोजहद कर रहे हैं और जुगत भिड़ाएं हैं।
उधर, राजनीतिज्ञों में यह भी चर्चा है कि मंजुला सिंह को टिकट मिलने पर सदर सीट में क्षत्रिय लाबी जहां जोरशोर से उनके पक्ष में जुटेगी तो दूसरी तरफ ब्राह्मण वर्ग कन्नी काटेगा।