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मकर संक्रांति पर ठंड ने मारी पलटी, पारा गिरा, बदली के बीच दिनभर चलती रहीं पछुवा हवाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 16 Jan 2015 12:00 AM IST
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मकर संक्रांति से ठंड की विदाई का कयास लगाना बेमतलब रहा। बृहस्पतिवार सुबह तड़के से ही घने कोहरे और कपकपा देने वाली हवाओं के बीच सर्दी का सितम फिर छा गया।
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अधिकतम पारा 4 डिग्री नीचे खिसकर 12 पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस पर ही टिका रहा। मौसम जानकारों के मुताबिक मकर संक्रांति के बाद ठंड में काफी कमी आ जाती है लेकिन इस बार ऐसा नजर नहीं आ रहा।
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बुधवार को दिन भर की धूप से अनुमान लगाया जा रहा था कि अब ठंड से राहत मिलेगी लेकिन अगले ही दिन बृहस्पतिवार को ठंड ने पलटी मार दी। बदली के बीच दिनभर पछुवा हवाएं चलती रहीं। आस्थावानों को जबरदस्त कोहरे और सर्दीली ठंड के बीच नदियों व तालाबों में डुबकी लगानी पड़ी।
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बुधवार की रात से ही समूचा जिला घने कोहरे की चादर से ढक गया। सुबह स्थिति यह रही कि कोहरे के चलते आसपास के वाहन व लोग भी नहीं नजर आ रहे थे। गलन में भी इजाफा हुआ। पछुवा हवाओं ने और कहर ढाया। विजिबिल्टी 40-50 मीटर के आसपास रही।
मौसम में आर्द्रता 70 से 100 फीसदी तक आंकी गई। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक अधिकतम तापमान 4 डिग्री घटकर 12 पर आ गया। बुधवार को यह 16 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस पर ही टिका रहा। मौसम विभाग के पर्यवेक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि अगले दो दिनों में बूंदाबादी के आसार हैं।
दलहनी फसलों में ‘उगड़ा’ का खतरा
बदली और तेज हवा के झोंको ने दलहनी फसलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अरहर में उगड़ा रोग लगने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। उधर, चना के फूल गिरने से उपज प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
तेज पछुवा हवा चलने से किसानों के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही हैं। चना व मटर की फसलों में फूल आया हुआ है। ये तेज हवा चलने से टूटकर नीचे झड़ रहे हैं।
मौसम में सुधार नहीं होता तो दलहनी फसलों की लागत निकालनी मुश्किल पड़ जाएगी। जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव का कहना है कि अभी तक तो फसलें सुरक्षित हैं, पर शीतल लहर के साथ कोहरा होने से अब नुकसान की संभावना बढ़ गई है।