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केन की धारा बांधकर बनाया पुल
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:59 AM IST
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फतेहपुर में यमुना नदी पर बालू ठेकेदार द्वारा बनाए गए अवैध पुल मामले में मुख्यमंत्री ने वहां के मंडलायुक्त को निलंबित कर दिया है, पर बांदा में केन नदी पर ठीक वैसा ही पुल आज भी बना हुआ है। खास बात ये है कि इस पुल के लिए तत्कालीन मंडलायुक्त से अनुमति ली गई थी। फतेहपुर में हुई कार्रवाई के बाद अब यहां के पुल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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बांदा मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर केन नदी की पानी की धारा बांधकर कुछ ह्यूम पाइप लगाकर पुल बनाया गया है। इस पुल से रात दिन बालू भरे ट्रक निकलते हैं। खास बात ये है कि पुल तत्कालीन मंडलायुक्त की लिखित अनुमति से बना है।
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22 नवंबर 2014 को चित्रकूटधाम के मंडलायुक्त कार्यालय से केन नदी में अस्थाई पीपे के पुल के निर्माण की सशर्त अनुमति दी गई है। नीरजा सिंह पत्नी स्वर्गीय शैलेंद्र सिंह निवासी गोमती नगर, लखनऊ के प्रार्थना पत्र के बाद दी गई अनुमति में 10 शर्तें लगाई गई थीं। उस समय यहां के मंडलायुक्त मुरलीधर दुबे थे।
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मंडलायुक्त कार्यालय से जारी हुए अनुमति पत्र में ‘कृते आयुक्त’ लिखकर अपठनीय हस्ताक्षर बने हैं। आदेश का पत्रांक- 266/नाजिर- विविध (2014-15), दिनांक- नवंबर, 22, 2014 है। इसमें आयुक्त ने केन नदी से मौरंग निकासी के लिए पट्टे की अवधि तक अस्थाई पीपे का पुल/रास्ता बनाए जाने की अनुमति दी है। अनुमति आदेश में पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।
वन विभाग ने दर्ज कराया है पट्टाधारक के खिलाफ मुकदमा
केन नदी में बालू पट्टाधारक नीरजा सिंह द्वारा पुल बनाने के मामले में वन विभाग ने मुकदमा भी दर्ज कराया है। 9 मार्च 2015 को यह मुकदमा वन रक्षक बांदा रेंज बब्बू सिंह की तहरीर पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम- 1972 की धारा 2 (37) के तहत दर्ज किया गया। क्षेत्रीय वन अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
रिपोर्ट में लिखा गया है कि गाटा संख्या 4 (47.553 हेक्टेयर) वन विभाग की भूमि है। इसके समीप केन नदी पर अस्थाई पीपे का पुल बनाकर ट्रकों और ट्रैक्टर ट्रालियों से बालू की निकासी की जा रही है। यह पुल वन विभाग की भूमि के 100 मीटर की परिधि में बनाया गया है।
रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि नदी पर बनाए गए पुल के नजदीक सैकड़ों की संख्या में राज्य पक्षी सारस निवास करते थे। बालू खनन में लगीं पोकलैंड, जेसीबी मशीनों के अलावा अन्य वाहनों के आवागमन से होने वाले शोर के कारण राज्य पक्षी यहां से पलायन कर रहे हैं। उनका स्थायी प्राकृतिक निवास नष्ट हो रहा है।
केन नदी में बनाया गया पुल पूर्व मंडलायुक्त के समय का है। यहां कार्यभार ग्रहण करने के बाद जैसे ही इसके बारे में पता चला, पुल निर्माण की अनुमति आदेश को मार्च माह में निरस्त कर दिया। इसके बावजूद पुल नहीं तोड़ा गया है तो अब जिलाधिकारी से बात करूंगी।-कल्पना अवस्थी मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल