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चांद की पूजा कर मांगी पति की लंबी उम्र
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छलनी से चांद का दीदार करती सुहागिन।
- फोटो : BANDA
चांद की पूजा कर मांगी पति की लंबी उम्र
चंद्रमा और जीवनसाथी के छलनी की ओट से किए दीदार
खास मुहूर्त के चलते सुहागिनों में रहा विशेष क्रेज
देर रात तक घरों में करवा पूजा की रही धूम
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल के योग से मंगलमय हो गए करवा चौथ पर सुहागिनों ने अपने सोलह शृंगार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सजी-धजी सुहागिनों के लिए अपने साजन के लिए 13 घंटे का निर्जला व्रत रखा और देर शाम छलनी पर चांद के दीदार कर पति की लंबी उम्र की कामना की। देर रात तक घरों में करवा चौथ पूजा की गहमा-गहमी रही।
यूं तो हर साल सुहागिनों के लिए करवा चौथ खास होता है, लेकिन अबकी खास मुहूर्त होने से उनमें विशेष जोश और श्रद्धा रही। तड़के से लेकर पूरा दिन और देर शाम चंद्रमा उदय होने तक सुहागिनें व्रत से रहीं। पानी भी नहीं पिया। दिन ढलते ही चंद्रदर्शन का बेताबी से इंतजार शुरू हो गया। सुहागिनें सज-धजकर छतों या खुले आंगन में पहुंच गईं। शंकर-पार्वती की पूजा की। फिर चंद्रमा की ओर नजरें गड़ा दीं। हाथों करवा और पूजा की थाल थी। रात करीब सवा 8 बजे चांद के दीदार होते ही सुहागिनों के चेहरों पर चमक आ गई। छलनी की ओट से चंद्रमा के दर्शन कर अघ्र्य दिया। इसी के बाद पति से रूबरू होकर छलनी से ही उसके दीदार किए। जहां पति उपलब्ध नहीं थे वहां सुहागिनों ने उनकी तस्वीर रखकर यह रस्म पूरी की। इसी के साथ व्रत परायण किया। कैलाशपुरी स्थित एसीडी स्टूडियो में सोलह श्रृंगार किए सुहागिनों ने सामूहिक रूप से पूजा की। उधर, जेल में भी एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने व्रत रखकर करवा चौथ मनाया। कई महिला बंदियों ने अपने पति का फोटो सामने रखकर व्रत तोड़ा।
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चंद्रमा और जीवनसाथी के छलनी की ओट से किए दीदार
खास मुहूर्त के चलते सुहागिनों में रहा विशेष क्रेज
देर रात तक घरों में करवा पूजा की रही धूम
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल के योग से मंगलमय हो गए करवा चौथ पर सुहागिनों ने अपने सोलह शृंगार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सजी-धजी सुहागिनों के लिए अपने साजन के लिए 13 घंटे का निर्जला व्रत रखा और देर शाम छलनी पर चांद के दीदार कर पति की लंबी उम्र की कामना की। देर रात तक घरों में करवा चौथ पूजा की गहमा-गहमी रही।
यूं तो हर साल सुहागिनों के लिए करवा चौथ खास होता है, लेकिन अबकी खास मुहूर्त होने से उनमें विशेष जोश और श्रद्धा रही। तड़के से लेकर पूरा दिन और देर शाम चंद्रमा उदय होने तक सुहागिनें व्रत से रहीं। पानी भी नहीं पिया। दिन ढलते ही चंद्रदर्शन का बेताबी से इंतजार शुरू हो गया। सुहागिनें सज-धजकर छतों या खुले आंगन में पहुंच गईं। शंकर-पार्वती की पूजा की। फिर चंद्रमा की ओर नजरें गड़ा दीं। हाथों करवा और पूजा की थाल थी। रात करीब सवा 8 बजे चांद के दीदार होते ही सुहागिनों के चेहरों पर चमक आ गई। छलनी की ओट से चंद्रमा के दर्शन कर अघ्र्य दिया। इसी के बाद पति से रूबरू होकर छलनी से ही उसके दीदार किए। जहां पति उपलब्ध नहीं थे वहां सुहागिनों ने उनकी तस्वीर रखकर यह रस्म पूरी की। इसी के साथ व्रत परायण किया। कैलाशपुरी स्थित एसीडी स्टूडियो में सोलह श्रृंगार किए सुहागिनों ने सामूहिक रूप से पूजा की। उधर, जेल में भी एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने व्रत रखकर करवा चौथ मनाया। कई महिला बंदियों ने अपने पति का फोटो सामने रखकर व्रत तोड़ा।
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