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लॉकडाउन ने ऑनलाइन, ऑफलाइन में बनाया माहिर

Sat, 02 Apr 2022 11:16 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 11:16 PM IST
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Lockdown made me master in online, offline
Lockdown made me master in online, offline - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना के वक्त लॉकडाउन के दौरान लंबे अरसे से बंद रहे स्कूल-कालेज और ऑनलाइन पढ़ाई के बाद अब स्कूलों में कक्षाएं बहाल हो जाने से शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी मानसिक रूप से इन दोनों पद्धतियों से पठन-पाठन के लिए तैयार हैं। अब गूगल मीट ऐप, जूम और व्हाट्सऐप ग्रुप शिक्षा का अहम हिस्सा बन गए हैं।
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उदाहरण के तौर पर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अतुल बाजपेयी व सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. अमिता सिंह बताती हैं कि संस्थान में शिक्षक गूगल मीट ऐप के जरिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन विभिन्न टिप्स दिए जाते हैं।
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हालांकि अब विद्यालय खुलने लगे हैं। लेकिन अगर दोबारा विशेष परिस्थिति आती है तो अब संस्थान डिजिटल के क्षेत्र में खुद को तैयार किए हैं। उधर, अभिभावक और विद्यार्थी भी ऑनलाइन रूप से खुद तैयार हैं। छात्र मोबाइल में मीट और जूम ऐप आदि डाउनलोड कर बराबर शिक्षकों के संपर्क में हैं।
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सरस्वती बालिका विद्या मंदिर के गणित शिक्षक विद्या विलास त्रिपाठी बताते हैं कि कोरोना महामारी में ऑनलाइन शिक्षा देना चुनौती से कम नहीं था। उन्होंने बड़े संस्थानों कोटा (राजस्थान) के शिक्षा संबंधित वीडियो यू ट्यूब में देखकर विद्यालय टीम के साथ इसे प्रयोग में लाए। गूगल मीट ऐप से पढ़ाई का लाइव प्रसारण कराया। यह प्रयोग कारगर रहा। व्हाट्सऐप ग्रुप से भी विद्यार्थियों को शिक्षा दी।
पूनम मिश्रा (परसौड़ा) ने बताया कि उनके बच्चों अथर्व और शुभांगी की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्कूल से मैसेज आया। उन्होंने पति कुश मिश्रा से बात कर नया स्मार्ट फोन खरीदा। अध्यापकों से ऑनलाइन पढ़ाई की जानकारी ली। ऐप डाउनलोड किए। खुद सीखा फिर बच्चों से मोबाइल से ऑनलाइन पढ़ाई कराई। अब बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। हालांकि वह अब भी अध्यापकों से पढ़ाई के टिप्स लेतीं रहतीं हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाने में आसानी होती है।
12वीं की छात्रा खुशी सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क आड़े आता रहा। नेटवर्क सही रहे, इसके लिए उसे छत में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। वह अब विशेष परिस्थिति में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए तैयार हैं।
10वीं के छात्र छोटू (पवैया) ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए किसान पिता से मोबाइल खरीदने के लिए पैसे लिए। कुछ ही दिन में वह गूगल मीट ऐप के जरिए कक्षाओं से सीधे जुड़ने लगे।

9वीं की छात्रा अंशिका (बंगालीपुरा) ने बताया कि महामारी में नए-नए ऐप की जानकारी हुई। घर में पहले से मोबाइल था। ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई की। हालांकि स्कूल खुल जाने के बाद भी वह अध्यापकों से फोन पर टिप्स लेतीं रहतीं हैं।

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में ऑनलाइन शिक्षण कराते अध्यापक मनोज अग्रवाल।

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में ऑनलाइन शिक्षण कराते अध्यापक मनोज अग्रवाल। - फोटो : BANDA

विद्या विलास त्रिपाठी।

विद्या विलास त्रिपाठी। - फोटो : BANDA

पूनम मिश्रा।

पूनम मिश्रा। - फोटो : BANDA

खुशी सिंह।

खुशी सिंह। - फोटो : BANDA

 छोटू।

छोटू। - फोटो : BANDA

अंशिका।

अंशिका। - फोटो : BANDA

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