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लॉकडाउन बना टीबी रोगियों की मौत का सबब

Mon, 25 May 2020 10:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 10:42 PM IST
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Lockdown caused death of TB patients
अतर्रा। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन अन्य मर्ज के रोगियों के लिए मौत का सबब बन रहा है। इसकी बानगी नरैनी तहसील का पिपरहरी गांव है। यहां टीबी रोग से ग्रसित सास और बहू ने महज 10 दिनों में दम तोड़ दिया।
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यह उजागर हुआ है विद्या धाम समिति के सर्वे में। परिजनों की दलील है कि लॉकडाउन में वाहनों का आवागमन ठप होने से उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिल सका। अतर्रा तहसील के खम्हौरा गांव के कुचबंधिया डेरा में भी दर्जनों लोग टीबी रोग से ग्रसित हैं और आर्थिक तंगी व दवा के अभाव में गंभीर हैं।
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पिपरहरी गांव के कछियन पुरवा निवासी एक व्यक्ति गुजरात के अहमदाबाद स्थित साड़ी फैक्ट्री में ऑपरेटर था। उसकी 55 वर्षीय मां और 28 वर्षीय पत्नी भी साथ रहकर मजदूरी करती थीं। दोनों टीबी रोग से ग्रसित थीं। लॉकडाउन के पूर्व तबियत बिगड़ने पर दोनों गांव आ गई थीं, लेकिन उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। कुछ दिन बाद गृह स्वामी भी घर आ गया।
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9 मई को मां ने दम तोड़ दिया। इसके चंद दिनों बाद 18 मई को पत्नी की भी मृत्यु हो गई। उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। एक ही घर में दो मौतों से परिजनों में शोक है। गृहस्वामी के हवाले से संस्था सचिव समाजसेवी राजाभइया ने बताया कि दोनों महिलाओं का प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ से इलाज चल रहा था। लॉकडाउन में वाहनों का आवागमन ठप होने से दोनों इलाज के लिए बाहर नहीं जा सकीं।
दूसरी तरफ रोजगार आदि छिनने से आर्थिक तंगी के हालात हो गए। इलाज कराना और दवा खरीदना तो दूर खाने तक के लाले हैं। पूर्व में इलाज के लिए रिश्तेदारों आदि से लिया गया कर्ज का बोझ अलग है। समाजसेवी ने बताया कि यही हाल खुरहंड क्षेत्र के कुचबंधिया पुरवा का भी है। यहां लगभग 11 लोग टीबी रोगी हैं। जो इलाज के अभाव में गंभीर अवस्था को पहुंच गए।
डीएम और तहसील के अधिकारियों को मदद के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। उधर, इस बाबत तहसीलदार सुशील कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। न ही उन्हें मदद संबंधी कोई प्रार्थना पत्र मिला। वह जांच कराकर हर संभव मदद करेंगे।

मरीजों के घर पहुंचाई दवा
अतर्रा। विद्याधाम समिति सचिव राजाभइया ने अपनी टीम के साथ कुचबंधिया पुरवा स्थित टीबी रोगियों को दवा पहुंचाई। उनके परिजनों से स्वास्थ्य की जानकारी ली और राशन व आर्थिक मदद भी दी। बीमारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा। आगे भी मदद का भरोसा दिया।
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