{"_id":"609acab38ebc3ed22714071f","slug":"lion-safari-banda-news-banda-banda-news-knp627902673","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब पन्ना टाइगर में मंडराया कोरोना का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब पन्ना टाइगर में मंडराया कोरोना का खतरा
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बांदा। इटावा लायन सफाई में शेरों पर कोरोना का प्रहार होने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। कुछ संरक्षित पार्क/सेंचुरी में वन्य प्राणियों में कोरोना का संक्रमण पाए जाने और एक शेर की मौत के बाद बुंदेलखंड के इकलौते अभ्यारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। कोरोना वायरस के अब जीव जंतुओं को भी अपना शिकार बनाने के मामलों का खुलासा होने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अफसरों में हड़कंप की स्थित है।
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन ने भी विशेष सतर्कता बरतते हुए पर्यटकों के आगमन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा यहां कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई। कोरोना संक्रमण अब वन्य जीवों पर भी अटैक कर रहा है। इटावा लायन सफारी पार्क में दो शेर संक्रमित हो चुके हैं। वन्य जीवों में भी संक्रमण की पुष्टि होने पर केंद्र सरकार के वन मंत्रालय में पिछले माह देश के सभी राज्यों के टाइगर रिजर्व व संरक्षित वन क्षेत्रों को गाइडलाइन और एडवाइजरी जारी की है।
बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश स्थित पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी कोरोना को लेकर अलर्ट लागू किया गया है। यहां दुर्लभ प्रजातियों के बाघ सहित अन्य जीव-जंतु एवं पशु-पक्षी संरक्षित हैं। केंद्र सरकार के निर्देशाें के बाद यहां लगातार निगरानी की जा रही है। कैमरों से भी मॉनिटरिंग हो रही है। पर्यटकों की एंट्री रोक दी गई है। पन्ना टाइगर पर लगातार कवरेज करने वाले स्थानीय मीडियाकर्मी अरुण सिंह के अनुसार वन्य प्राणियों में कोराना वायरस संक्रमण के मद्देनजर वन विभाग ने अपने मैदानी विभागीय अमले को हाई अलर्ट जारी किया है। (संवाद)
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पार्क कर्मियों को लगाई जा रही वैक्सीन
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में 45 वर्ष उम्र से अधिक के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है। पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि मैदानी वन कर्मियों को मास्क और सैनिटाइजर दिया जा रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व में कुल 200 कर्मचारियों का स्टाफ है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा और असिस्टेंट डायरेक्टर ईश्वर जरांडे हैं। स्टाफ में 45 वर्ष की उम्र पार कर चुके 65 कर्मियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इससे कम उम्र वाले कर्मियों का वैक्सीनेशन चल रहा है। फिलहाल पूरा नहीं हो पाया है। कुछ वैक्सीनेशन अमानगंज रेंज में हुआ है। (संवाद)
केंद्रीय वन मंत्रालय की जारी एडवाइजरी
बांदा। केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 30 अप्रैल को जारी एडवाइजरी में नेशनल पार्क, सेंचुरी व संरक्षित वन्य क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई है। इंसानों से वन्य प्राणियों में कोरोना वायरस संक्रमण रोकने पर अमल, यहां वन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों के संक्रमित न होने और उनकी रिपोर्ट निगेटिव होने और गाइडलाइन पालन के साथ मास्क का प्रयोग अनिवार्य किया है। संरक्षित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोेक और प्रभावी नियंत्रण के लिए कमेटी के गठन का निर्देश दिया है। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि कोई वन्य प्राणी संक्रमित पाया जाए तो समुचित इलाज के बाद उसे उसके सुरक्षित प्राकृतिक रहवास में छोड़ा जाए। संक्रमण में रोक के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी केंद्रीय मंत्रालय को देने के निर्देश दिए गए हैं। (संवाद)
बुंदेलखंड का इकलौता अभ्यारण्य
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क भारत का 22वां अभ्यारण्य है। मध्य प्रदेश का पांचवां और बुंदेलखंड का इकलौता रिजर्व पार्क है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 में हुई थी। 1994 में केंद्र सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया था। यहां मुख्य रूप से बाघ और पक्षियों में गिद्द संरक्षित हैं। यह बुंदेलखंड के पन्ना और छतरपुर (एमपी) जनपदों में फैला हुआ है। केन नदी यहां से गुजरी है। (संवाद)
बाघों के कुनबे में अब 75 का आंकड़ा पार
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। दो माह पूर्व मार्च में पार्क कर्मियों को यह जानकारी तब हुई जब बाघिन अपने इन शावकों के साथ घूमते हुए कैमरे में कैद हो गई। जानकारों के मुताबिक, अब यहां बाघों की संख्या 75 हो गई है। इसमें ब्रीडिंग बाघिन 13 बताई गई हैं। एक साल पहले तक यहां ब्रीडिंग बाघिनों की संख्या 10 थी। पार्क अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही बाघों का कुनबा और बढ़ेगा। (संवाद)
यूनेस्को ने घोषित किया है बायो स्फीयर
बांदा। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को यूनेस्को के बायो स्फीयर के रूप में पहले ही घोषित किया जा चुका है। कें द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुछ दिन पहले ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। इस समय दुनियां के 129 देशों में 714 बायो स्फीयर रिजर्व हैं। (संवाद)
542 वर्ग किलोमीटर तक फैला है पार्क
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है। इसमें पहाड़, जंगल, नदी इत्यादि हैं। इसके क्षेत्रफल में ही लगभग एक दर्जन गांव भी आबाद हैं। जिसमें ज्यादातर आदिवासी की आबादी है। 25 अगस्त 2011 को इसे बायो स्फीयर रिजर्व के रूप में नामित किया गया था। वर्ष 2007 में भारत के पर्यटन मंत्रालय ने इसे सर्वश्रेष्ठ रख रखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उत्कृष्टता पुरस्कार दिया था। केन नदी इस उद्यान का मुख्य आकर्षण है। (संवाद)
कोर क्षेत्र में तीन, सीमा पर आधा सैकड़ा गांव
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व कोर क्षेत्र में तीन गांव आबाद हैं। यह गांव ढोंढन, पलकोंहा और खरियानी शामिल हैं, लेकिन इन गांवों का पूरा नियंत्रण पन्ना टाइगर प्रबंधन के पास है। यहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता। इसके अलावा पन्ना टाइगर की सीमाओं से सटे हुए लगभग आधा सैकड़ा गांव हैं। कोरोना काल में यहां भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। टाइगर के क्षेत्र संचालक ने बताया कि बफर क्षेत्र में एक सैकड़ा से भी ज्यादा गांव स्थित हैं। (संवाद)
पर्यटकों पर रोक, बाघों की मॉनिटरिंग
16 अप्रैल से कोरोना कर्फ्यू लागू होते ही पार्क में पर्यटकों के आगमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बाघों की लगातार मॉनिटरिंग हो रही है। कैमरा ट्रैपिंग से भी निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में संक्रमण से किसी स्थान एक शेर की मौत का जिक्र किया गया है।
-उत्तम कुमार शर्मा, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क
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पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन ने भी विशेष सतर्कता बरतते हुए पर्यटकों के आगमन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा यहां कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई। कोरोना संक्रमण अब वन्य जीवों पर भी अटैक कर रहा है। इटावा लायन सफारी पार्क में दो शेर संक्रमित हो चुके हैं। वन्य जीवों में भी संक्रमण की पुष्टि होने पर केंद्र सरकार के वन मंत्रालय में पिछले माह देश के सभी राज्यों के टाइगर रिजर्व व संरक्षित वन क्षेत्रों को गाइडलाइन और एडवाइजरी जारी की है।
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बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश स्थित पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी कोरोना को लेकर अलर्ट लागू किया गया है। यहां दुर्लभ प्रजातियों के बाघ सहित अन्य जीव-जंतु एवं पशु-पक्षी संरक्षित हैं। केंद्र सरकार के निर्देशाें के बाद यहां लगातार निगरानी की जा रही है। कैमरों से भी मॉनिटरिंग हो रही है। पर्यटकों की एंट्री रोक दी गई है। पन्ना टाइगर पर लगातार कवरेज करने वाले स्थानीय मीडियाकर्मी अरुण सिंह के अनुसार वन्य प्राणियों में कोराना वायरस संक्रमण के मद्देनजर वन विभाग ने अपने मैदानी विभागीय अमले को हाई अलर्ट जारी किया है। (संवाद)
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पार्क कर्मियों को लगाई जा रही वैक्सीन
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में 45 वर्ष उम्र से अधिक के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है। पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि मैदानी वन कर्मियों को मास्क और सैनिटाइजर दिया जा रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व में कुल 200 कर्मचारियों का स्टाफ है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा और असिस्टेंट डायरेक्टर ईश्वर जरांडे हैं। स्टाफ में 45 वर्ष की उम्र पार कर चुके 65 कर्मियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इससे कम उम्र वाले कर्मियों का वैक्सीनेशन चल रहा है। फिलहाल पूरा नहीं हो पाया है। कुछ वैक्सीनेशन अमानगंज रेंज में हुआ है। (संवाद)
केंद्रीय वन मंत्रालय की जारी एडवाइजरी
बांदा। केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 30 अप्रैल को जारी एडवाइजरी में नेशनल पार्क, सेंचुरी व संरक्षित वन्य क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई है। इंसानों से वन्य प्राणियों में कोरोना वायरस संक्रमण रोकने पर अमल, यहां वन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों के संक्रमित न होने और उनकी रिपोर्ट निगेटिव होने और गाइडलाइन पालन के साथ मास्क का प्रयोग अनिवार्य किया है। संरक्षित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोेक और प्रभावी नियंत्रण के लिए कमेटी के गठन का निर्देश दिया है। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि कोई वन्य प्राणी संक्रमित पाया जाए तो समुचित इलाज के बाद उसे उसके सुरक्षित प्राकृतिक रहवास में छोड़ा जाए। संक्रमण में रोक के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी केंद्रीय मंत्रालय को देने के निर्देश दिए गए हैं। (संवाद)
बुंदेलखंड का इकलौता अभ्यारण्य
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क भारत का 22वां अभ्यारण्य है। मध्य प्रदेश का पांचवां और बुंदेलखंड का इकलौता रिजर्व पार्क है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 में हुई थी। 1994 में केंद्र सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया था। यहां मुख्य रूप से बाघ और पक्षियों में गिद्द संरक्षित हैं। यह बुंदेलखंड के पन्ना और छतरपुर (एमपी) जनपदों में फैला हुआ है। केन नदी यहां से गुजरी है। (संवाद)
बाघों के कुनबे में अब 75 का आंकड़ा पार
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। दो माह पूर्व मार्च में पार्क कर्मियों को यह जानकारी तब हुई जब बाघिन अपने इन शावकों के साथ घूमते हुए कैमरे में कैद हो गई। जानकारों के मुताबिक, अब यहां बाघों की संख्या 75 हो गई है। इसमें ब्रीडिंग बाघिन 13 बताई गई हैं। एक साल पहले तक यहां ब्रीडिंग बाघिनों की संख्या 10 थी। पार्क अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही बाघों का कुनबा और बढ़ेगा। (संवाद)
यूनेस्को ने घोषित किया है बायो स्फीयर
बांदा। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को यूनेस्को के बायो स्फीयर के रूप में पहले ही घोषित किया जा चुका है। कें द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुछ दिन पहले ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। इस समय दुनियां के 129 देशों में 714 बायो स्फीयर रिजर्व हैं। (संवाद)
542 वर्ग किलोमीटर तक फैला है पार्क
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है। इसमें पहाड़, जंगल, नदी इत्यादि हैं। इसके क्षेत्रफल में ही लगभग एक दर्जन गांव भी आबाद हैं। जिसमें ज्यादातर आदिवासी की आबादी है। 25 अगस्त 2011 को इसे बायो स्फीयर रिजर्व के रूप में नामित किया गया था। वर्ष 2007 में भारत के पर्यटन मंत्रालय ने इसे सर्वश्रेष्ठ रख रखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उत्कृष्टता पुरस्कार दिया था। केन नदी इस उद्यान का मुख्य आकर्षण है। (संवाद)
कोर क्षेत्र में तीन, सीमा पर आधा सैकड़ा गांव
बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व कोर क्षेत्र में तीन गांव आबाद हैं। यह गांव ढोंढन, पलकोंहा और खरियानी शामिल हैं, लेकिन इन गांवों का पूरा नियंत्रण पन्ना टाइगर प्रबंधन के पास है। यहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता। इसके अलावा पन्ना टाइगर की सीमाओं से सटे हुए लगभग आधा सैकड़ा गांव हैं। कोरोना काल में यहां भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। टाइगर के क्षेत्र संचालक ने बताया कि बफर क्षेत्र में एक सैकड़ा से भी ज्यादा गांव स्थित हैं। (संवाद)
पर्यटकों पर रोक, बाघों की मॉनिटरिंग
16 अप्रैल से कोरोना कर्फ्यू लागू होते ही पार्क में पर्यटकों के आगमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बाघों की लगातार मॉनिटरिंग हो रही है। कैमरा ट्रैपिंग से भी निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में संक्रमण से किसी स्थान एक शेर की मौत का जिक्र किया गया है।
-उत्तम कुमार शर्मा, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क