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बुंदेली परंपराओं के बीच मना कजलिया उत्सव
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:42 PM IST
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छाबी तालाब में कजली विसर्जित करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। परंपरा और बुंदेली गीतों के बीच शुक्रवार को पूरे जिले में कजलिया उत्सव मनाया गया। नदी, तालाबों में कजलिया विसर्जन के बाद घर-घर कजलियां बांटी गईं। छाबी तालाब और ऐतिहासिक नवाब टैंक में मेला लगा।
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महिलाएं, युवतियां और किशोरियां सिरों पर कजलिया लिए सुबह से ही जत्थों में विसर्जन स्थल वाले तालाबों की ओर चल पड़ीं। इस बीच वह लगातार बुंदेली और कजलिया गीत गाती रहीं। छाबी तालाब के घाट पर कजलियों के विसर्जन की परंपरा निभाई गई।
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यह कजलियां घरों में बोई गई थीं। किवदंती है कि कजलिया घर में रखने से खुशहाली आती है। विसर्जन के दौरान छाबी तालाब में इर्द-गिर्द मेला जैसा नजारा रहा। दोपहर बाद नवाब टैंक में मेला लगा। आसपास के गांवों से आए महिला-पुरुषों ने खरीददारी की।
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उधर, कजली मेला महोत्सव समिति की अलीगंज रामलीला से शोभा यात्रा निकली। वीरांगना दुर्गावती, लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई, अहिल्याबाई, आल्हा-ऊदल, चंद्रावती, भारत माता आदि झांकियां शामिल रहीं।
सिर पर कलश लिए महिलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। देर रात तक विराट पैलेस सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। संयोजक मुदित शर्मा, महामंत्री राम प्रसाद सोनी समेत दीनदयाल सोनी, बाबूलाल गुप्ता, डा.चंद्रिका प्रसाद दीक्षित, अरविंद त्रिपाठी, चंद्रमोहन, सूर्य प्रकाश, सौरभ गुप्ता आदि मौजूद रहे। जनपद के कस्बों और गांवों में भी कजलिया पर्व पूरे हर्षोल्लास और परंपराओं के बीच मनाया गया।