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खानकाहे मसूदिया में तकरीर और नातें
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:57 PM IST
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उर्स मसूदी में फातेहा पढ़ते अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। खानकाहे मसूदिया में गागर जुलूस के साथ तीन दिवसीय उर्स मसूदी सोमवार से शुरू हो गया। कालवनगंज स्थित मजार में चादर व गुलपोशी हुई। फातेहा के बाद लंगर हुआ। सैय्यद मेराज मसूदी (शहर काजी) के अवास में नातें गूंजी।
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देर रात तक सजी महफिल में दूरदराज से आए सैकड़ों अकीदतमंदों ने कव्वालियों का लुत्फ लिया। रहबर रब्बानी ने पढ़ा- हकीकत से सजा कोई ख्वाब देखेंगे, लहद में रूए रिसालत मआब देखेंगे। खानकाहे मसूदिया में आफाक मसूदी, गौहर रब्बानी व सरवर रब्बानी ने तकरीर की।
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आदिल मसूदी, जाहिद मियां, रहबर रब्बानी, मजहर फर्रूखाबादी, आबिद रायपुरी, कामिल मसूदी, हस्सान मसूदी, यासिर मसूदी आदि ने नात पढ़ी। सदारत कर रहे आफताब मसूदी ने विलादत पर तफसीली बयान किया। निजामत सैय्यद मीर रब्बानी जबलपुरी ने की।
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