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Banda News: एक अरब से ज्यादा रखे रहे, नहीं किया विकास
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बांदा। सरकार से बजट मिलने में लेटलतीफी और विभागों के कामों की सुस्त रफ्तार ने जिले में विकास और जन कल्याण के लिए मिले बजट में एक अरब से ज्यादा रुपये वापस लौटाने की नौबत बन गई है। रविवार को अवकाश के कारण शनिवार को बजट खर्च करने का अंतिम दिन था। लिहाजा हर एक विभाग देर शाम तक खर्च को कहीं न कहीं दिखाने के प्रयास में फाइलों से सिर खपाता नजर आ रहा था।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में शासन से जिले के तकरीबन 100 विभागों को कई अरब रुपये का बजट आवंटित हुआ था, लेकिन यह अब तक खर्च नहीं हो पाया। एक अरब से ज्यादा बजट विभागों के पास है। बजट आवंटन और खर्च के ताजे आंकड़े बता रहे हैं कि कृषि, ग्राम्य विकास, पशुपालन, पीडब्लूडी, स्वास्थ्य व सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग लगभग एक अरब रुपये धरे बैठे हैं।
31 मार्च तक खर्च न होने पर यह पैसा सरकार को वापस जा सकता है या फिर अगले वित्तीय वर्ष में समायोजित कर दिया जाएगा। हालांकि इस नौबत से बचने की कवायदें दिन-रात चल रही है। ऐसे में गड़बड़ी, घोटाला और एडवांस भुगतान जैसे हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं।
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धनराशि अपार फिर भी समस्याओं का अंबार
भले ही कई विभागों ने लाखों रुपये का बजट बचा लिया हो, लेकिन शायद ही ऐसा कोई विभाग होगा, जिसके पास खर्च करने का कारण न हो। हर विभाग की कई समस्याएं अभी भी ज्यों की त्यों पड़ी हैं। उदाहरण कृषि विभाग की ओर से अभी कई किसानों को बीज व खाद की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं दी है तो वहीं सिंचाई विभाग नहरों की साफ-सफाई नहीं करा सका है। इसी तरह जल संसाधन की ओर से कई गांवों में मेड़बंदी का काम अधूरा है तो ग्राम्य विकास में पीएम आवास की धनराशि फंसी हुई है। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में सीटी स्कैन मशीन ही महीनों से ठीक होने का इंतजार कर रही है। पीडब्ल्यूडी की सड़कों की दशा भी किसी से छिपी नहीं है।
कुछ प्रमुख विभागों को आवंटन बजट व खर्च राशि
विभाग आवंटन खर्च शेष
कृषि 794900136 670509963 124390173
जल संसाधन 19489232 14581211 4908021
ग्राम्य विकास 355643406 340014694 25628722
पशुपालन 75141915 72926653 65411738
स्वास्थ्य चि. 18110952069 10726132710 236919325
सिंचाई 1115421092 796711014 316710076
पीडब्लूडी 348298043 323209007 18471994
वर्जन-
आहरण-वितरण 28 मार्च तक होना था। कुछ बजट ऐसा होता है जो बचा रहता है। कुछ का समर्पण करना पड़ता है। 31 मार्च को सही जानकारी होगी कि किस विभाग से कितना बजट समर्पित (सरेंडर) किया गया है। -दिनेश कुमार, कोषाधिकारी, बांदा।
कोषागार में बजट निकालने की रही होड़
बांदा। पूरे वर्ष भर आराम फरमाने वाले अफसर आखिर वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन पूरी तरह सक्रिय नजर आए। विभागीय अधिकारी खुद फाइलें लिए मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय में देर रात तक डटे रहे। पीडब्ल्यूडी, माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा, संभागीय परिवहन विभाग, कृषि एवं वन विभाग सहित अन्य विभागों में करोड़ों रुपये विभिन्न योजनाओं का पड़ा है। धनराशि शासन में वापस होने से पहले इसे निकालने की होड़ रही। बेसिक शिक्षा विभाग में विद्यालयों की ग्रांट, टीएलएम और भवन निर्माण के करोड़ों रुपये रातोंरात निकाल कर आवंटित किए गए। वहीं पीडब्ल्यूडी में भी करीब 60 करोड़ रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली है। मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि करीब 14 विभागों की करीब 12 करोड़ की राशि अभी तक नहीं निकाली गई है, जिसके वापस होने की संभावना है। पिछले दो दिनों में करीब सवा अरब रुपये की निकासी हुई है।
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वित्तीय वर्ष 2023-24 में शासन से जिले के तकरीबन 100 विभागों को कई अरब रुपये का बजट आवंटित हुआ था, लेकिन यह अब तक खर्च नहीं हो पाया। एक अरब से ज्यादा बजट विभागों के पास है। बजट आवंटन और खर्च के ताजे आंकड़े बता रहे हैं कि कृषि, ग्राम्य विकास, पशुपालन, पीडब्लूडी, स्वास्थ्य व सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग लगभग एक अरब रुपये धरे बैठे हैं।
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31 मार्च तक खर्च न होने पर यह पैसा सरकार को वापस जा सकता है या फिर अगले वित्तीय वर्ष में समायोजित कर दिया जाएगा। हालांकि इस नौबत से बचने की कवायदें दिन-रात चल रही है। ऐसे में गड़बड़ी, घोटाला और एडवांस भुगतान जैसे हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं।
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धनराशि अपार फिर भी समस्याओं का अंबार
भले ही कई विभागों ने लाखों रुपये का बजट बचा लिया हो, लेकिन शायद ही ऐसा कोई विभाग होगा, जिसके पास खर्च करने का कारण न हो। हर विभाग की कई समस्याएं अभी भी ज्यों की त्यों पड़ी हैं। उदाहरण कृषि विभाग की ओर से अभी कई किसानों को बीज व खाद की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं दी है तो वहीं सिंचाई विभाग नहरों की साफ-सफाई नहीं करा सका है। इसी तरह जल संसाधन की ओर से कई गांवों में मेड़बंदी का काम अधूरा है तो ग्राम्य विकास में पीएम आवास की धनराशि फंसी हुई है। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में सीटी स्कैन मशीन ही महीनों से ठीक होने का इंतजार कर रही है। पीडब्ल्यूडी की सड़कों की दशा भी किसी से छिपी नहीं है।
कुछ प्रमुख विभागों को आवंटन बजट व खर्च राशि
विभाग आवंटन खर्च शेष
कृषि 794900136 670509963 124390173
जल संसाधन 19489232 14581211 4908021
ग्राम्य विकास 355643406 340014694 25628722
पशुपालन 75141915 72926653 65411738
स्वास्थ्य चि. 18110952069 10726132710 236919325
सिंचाई 1115421092 796711014 316710076
पीडब्लूडी 348298043 323209007 18471994
वर्जन-
आहरण-वितरण 28 मार्च तक होना था। कुछ बजट ऐसा होता है जो बचा रहता है। कुछ का समर्पण करना पड़ता है। 31 मार्च को सही जानकारी होगी कि किस विभाग से कितना बजट समर्पित (सरेंडर) किया गया है। -दिनेश कुमार, कोषाधिकारी, बांदा।
कोषागार में बजट निकालने की रही होड़
बांदा। पूरे वर्ष भर आराम फरमाने वाले अफसर आखिर वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन पूरी तरह सक्रिय नजर आए। विभागीय अधिकारी खुद फाइलें लिए मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय में देर रात तक डटे रहे। पीडब्ल्यूडी, माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा, संभागीय परिवहन विभाग, कृषि एवं वन विभाग सहित अन्य विभागों में करोड़ों रुपये विभिन्न योजनाओं का पड़ा है। धनराशि शासन में वापस होने से पहले इसे निकालने की होड़ रही। बेसिक शिक्षा विभाग में विद्यालयों की ग्रांट, टीएलएम और भवन निर्माण के करोड़ों रुपये रातोंरात निकाल कर आवंटित किए गए। वहीं पीडब्ल्यूडी में भी करीब 60 करोड़ रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली है। मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि करीब 14 विभागों की करीब 12 करोड़ की राशि अभी तक नहीं निकाली गई है, जिसके वापस होने की संभावना है। पिछले दो दिनों में करीब सवा अरब रुपये की निकासी हुई है।