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Banda News: रात में बढ़ा केन का जलस्तर, यमुना स्थिर
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फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद
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- एमपी-बुंदेलखंड में लगातार बरसात से नदी में बढ़ रहा पानी
-चेतावनी बिंदु से पांच मीटर नीचे बह रही केन नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड में लगातार बारिश के कारण नदियों का पानी बढ़ रहा है। केन नदी चेतावनी बिंदु की ओर तेजी से बढ़ रही है। जबकि यमुना का जलस्तर अभी घट-बढ़ रहा है। प्रशासन ने राजस्व टीमों को हर दो-दो घंटें में नदियों के जलस्तर पर रिपोर्ट लेते रहने के निर्देश दिए हैं। जिससे समय रहते किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके। फिलहाल केन और यमुना के जलस्तर से ग्रामीणों की धड़कन बढ़ गईं हैं।
बुधवार की शाम करीब चार बजे यमुना का जलस्तर 90.92 मीटर था। बुधवार की रात करीब दो बजे यमुना के जलस्तर में मामूली गिरावट हुई। बृहस्पतिवार को जलस्तर 90.88 मीटर दर्ज किया गया। इसके विपरीत केन नदी जिसका बुधवार को चार बजे जलस्तर 96.26 मीटर था। रात दो बजे अचानक नदी का जलस्तर 98.53 पहुंच गया। इसमें दो मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। केन नदी का चेतावनी बिंदु 103 मीटर और खतरे का निशान 104 मीटर पर है। केन नदी चेतावनी बिंदु से पांच मीटर नीचे बह रही है। जबकि यमुना का खतरे का निशान 100 मीटर है और चेतावनी बिंदु 99 मीटर पर है।
केन के तटवर्ती इलाकों कनवारा क्षेत्र के ब्रह्मडेरा, छावनी डेरा समेत 10 से अधिक मजरों के लोगों की चिंता बढ़ रही है। जैसे-जैसे नदी का पाठ बढ़ रहा है। वैसे-वैसे उनकी धड़कनें भी तेज हाे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन लगातार स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति की रिपोर्ट ले रहा है। राजस्व कर्मी गांव आकर भी नदी का जलस्तर देख रहे हैं।
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गंगऊ बांध से पानी ओवरफ्लो, बरियारपुर बांध के रास्ते केन में आ रहा पानी
करतल। सिंचाई विभाग प्रखंड तृतीय बांदा के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि बांदा-भूरागढ़ के गेज स्थल पर केन नदी का जलस्तर 98.53 मीटर तक पहुंच गया है, हालांकि चेतावनी बिंदु 103 मी से 5.3 मीटर नीचे है। गंगऊ बांध में क्रिस्टल वॉल से पानी बरियारपुर बांध में 93600 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। जबकि बरियारपुर के क्रिस्टल वाॅल से पानी केन नदी में 90663 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। हालांकि दोनों बांधों में जलस्तर डाउन होने लगा है। बताया कि पहाड़ों पर बारिश जारी रहने की स्थिति में बरियारपुर बांध में पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ सकती है। केन नदी के जल स्तर पर पल-पल की नजर रखी जा रही है । तहसीलदार नरैनी सतीश वर्मा ने बताया कि तहसील क्षेत्र में आठ बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। नदी के किनारे बसे गांव के लोगों को सतर्क रहने, गहरे पानी या तेज बहाव वाले क्षेत्र के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी गई है।
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गौरी-अमारा रपटे के ऊपर से बह रही चंद्रावल नदी
पैलानी। तहसील क्षेत्र के नांदादेव-पड़ोहरा तथा गौरी-अमारा के रपटों पर चंद्रावल नदी की बाढ़ का पानी ऊपर से बहने लगा है। इससे मड़ौली खुर्द, मरोहला डेरा, भादवा डेरा, करेंहना डेरा, मटेहना डेरा, क्योंटरा डेरा, खेता डेरा आदि गांवों का संपर्क कट गया है। गांव के लोगों का आवागमन अब नाव के सहारे हो रहा है। अनुमान है कि अगर जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो बाढ़ के पानी से खप्टिहा कला के केन नदी के मध्य स्थित शंकर जी का मसानेश्वर मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ सकता है। इन क्षेत्रों पर सबसे बड़ी समस्या ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की है। जिन्हें सुबह से ही नाव के सहारे जोखिम भरी यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि तहसील प्रशासन डूबे हुए इन दोनों रपटों पर अपनी निगाह लगाए हुए है। तहसीलदार पैलानी राधे श्याम सिंह ने नाविकों को चेतावनी देते हुए नाव में अधिक यात्री नहीं बैठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नाव घाटों पर लेखपाल, ग्राम प्रधान तथा होमगार्ड के माध्यम से पल-पल की निगरानी कराई जा रही है।
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लाइफ सपोर्ट जैकेट पहनाकर करा रहे नदी पार
पैलानी। दो दिनों से हो रही बारिश के चलते पैलानी तहसील के चिल्ला घाट में यमुना नदी का पाठ फैल गया है। इसका असर केन नदी पर भी पड़ा है और उसका भी जलस्तर बढ़ा है। नाव संचालित करने वाले शंकर निषाद, भूरा निषाद ने बताया है कि रात दो बजे केन नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ है। यात्रियों को नाव से यात्रा कराई जा रही है।सभी यात्रियों को लाइफ सपोर्ट जैकेट पहनाई जा रही है। खुद भी इस नियम का पालन किया जा रहा है। दो बड़ी नाव लगी हुई है। केन नदी के उस पार स्थित सेमरा डेरा, छनीहा डेरा, शिवपाल डेरा, दीपा डेरा, पंडितन डेरा, शिवरामपुर, कुटी डेरा, बरेहटा सहित कई मजरों के स्कूली बच्चे छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इन्हीं नावों के सहारे खप्टिहा कला स्थित इंटर कॉलेज में पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। गांव का एक तिहाई किसान जिनकी जमीन केन नदी के उस पार हैं। वह अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेकर आते-जाते हैं। बरसात के दिनों में यहां से दर्जनों गांव के यात्री तथा बाहरी यात्री इसी नाव घाट से प्रतिदिन निकलते हैं। हुन्नर शुक्ला, चुनूबाद शुक्ला, रामनारायण तिवारी, महेंद्र सिंह गौतम, वीरेंद्र सिंह चंदेल, राम बहादुर सिंह, जगन्नाथ निषाद, सजीवन निषाद, जगतपाल निषाद, रामचरण निषाद ने कहा कि यहां पर पक्के पुल की जरूरत है। इस नाव घाट से रोजाना यात्री जसपुरा, भरुहा सुमेरपुर, घाटमपुर, कानपुर तक के लिए इस शार्टकट रास्ते का प्रयोग करते आ रहे हैं।
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-चेतावनी बिंदु से पांच मीटर नीचे बह रही केन नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड में लगातार बारिश के कारण नदियों का पानी बढ़ रहा है। केन नदी चेतावनी बिंदु की ओर तेजी से बढ़ रही है। जबकि यमुना का जलस्तर अभी घट-बढ़ रहा है। प्रशासन ने राजस्व टीमों को हर दो-दो घंटें में नदियों के जलस्तर पर रिपोर्ट लेते रहने के निर्देश दिए हैं। जिससे समय रहते किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके। फिलहाल केन और यमुना के जलस्तर से ग्रामीणों की धड़कन बढ़ गईं हैं।
बुधवार की शाम करीब चार बजे यमुना का जलस्तर 90.92 मीटर था। बुधवार की रात करीब दो बजे यमुना के जलस्तर में मामूली गिरावट हुई। बृहस्पतिवार को जलस्तर 90.88 मीटर दर्ज किया गया। इसके विपरीत केन नदी जिसका बुधवार को चार बजे जलस्तर 96.26 मीटर था। रात दो बजे अचानक नदी का जलस्तर 98.53 पहुंच गया। इसमें दो मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। केन नदी का चेतावनी बिंदु 103 मीटर और खतरे का निशान 104 मीटर पर है। केन नदी चेतावनी बिंदु से पांच मीटर नीचे बह रही है। जबकि यमुना का खतरे का निशान 100 मीटर है और चेतावनी बिंदु 99 मीटर पर है।
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केन के तटवर्ती इलाकों कनवारा क्षेत्र के ब्रह्मडेरा, छावनी डेरा समेत 10 से अधिक मजरों के लोगों की चिंता बढ़ रही है। जैसे-जैसे नदी का पाठ बढ़ रहा है। वैसे-वैसे उनकी धड़कनें भी तेज हाे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन लगातार स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति की रिपोर्ट ले रहा है। राजस्व कर्मी गांव आकर भी नदी का जलस्तर देख रहे हैं।
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गंगऊ बांध से पानी ओवरफ्लो, बरियारपुर बांध के रास्ते केन में आ रहा पानी
करतल। सिंचाई विभाग प्रखंड तृतीय बांदा के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि बांदा-भूरागढ़ के गेज स्थल पर केन नदी का जलस्तर 98.53 मीटर तक पहुंच गया है, हालांकि चेतावनी बिंदु 103 मी से 5.3 मीटर नीचे है। गंगऊ बांध में क्रिस्टल वॉल से पानी बरियारपुर बांध में 93600 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। जबकि बरियारपुर के क्रिस्टल वाॅल से पानी केन नदी में 90663 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। हालांकि दोनों बांधों में जलस्तर डाउन होने लगा है। बताया कि पहाड़ों पर बारिश जारी रहने की स्थिति में बरियारपुर बांध में पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ सकती है। केन नदी के जल स्तर पर पल-पल की नजर रखी जा रही है । तहसीलदार नरैनी सतीश वर्मा ने बताया कि तहसील क्षेत्र में आठ बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। नदी के किनारे बसे गांव के लोगों को सतर्क रहने, गहरे पानी या तेज बहाव वाले क्षेत्र के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी गई है।
गौरी-अमारा रपटे के ऊपर से बह रही चंद्रावल नदी
पैलानी। तहसील क्षेत्र के नांदादेव-पड़ोहरा तथा गौरी-अमारा के रपटों पर चंद्रावल नदी की बाढ़ का पानी ऊपर से बहने लगा है। इससे मड़ौली खुर्द, मरोहला डेरा, भादवा डेरा, करेंहना डेरा, मटेहना डेरा, क्योंटरा डेरा, खेता डेरा आदि गांवों का संपर्क कट गया है। गांव के लोगों का आवागमन अब नाव के सहारे हो रहा है। अनुमान है कि अगर जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो बाढ़ के पानी से खप्टिहा कला के केन नदी के मध्य स्थित शंकर जी का मसानेश्वर मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ सकता है। इन क्षेत्रों पर सबसे बड़ी समस्या ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की है। जिन्हें सुबह से ही नाव के सहारे जोखिम भरी यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि तहसील प्रशासन डूबे हुए इन दोनों रपटों पर अपनी निगाह लगाए हुए है। तहसीलदार पैलानी राधे श्याम सिंह ने नाविकों को चेतावनी देते हुए नाव में अधिक यात्री नहीं बैठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नाव घाटों पर लेखपाल, ग्राम प्रधान तथा होमगार्ड के माध्यम से पल-पल की निगरानी कराई जा रही है।
लाइफ सपोर्ट जैकेट पहनाकर करा रहे नदी पार
पैलानी। दो दिनों से हो रही बारिश के चलते पैलानी तहसील के चिल्ला घाट में यमुना नदी का पाठ फैल गया है। इसका असर केन नदी पर भी पड़ा है और उसका भी जलस्तर बढ़ा है। नाव संचालित करने वाले शंकर निषाद, भूरा निषाद ने बताया है कि रात दो बजे केन नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ है। यात्रियों को नाव से यात्रा कराई जा रही है।सभी यात्रियों को लाइफ सपोर्ट जैकेट पहनाई जा रही है। खुद भी इस नियम का पालन किया जा रहा है। दो बड़ी नाव लगी हुई है। केन नदी के उस पार स्थित सेमरा डेरा, छनीहा डेरा, शिवपाल डेरा, दीपा डेरा, पंडितन डेरा, शिवरामपुर, कुटी डेरा, बरेहटा सहित कई मजरों के स्कूली बच्चे छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इन्हीं नावों के सहारे खप्टिहा कला स्थित इंटर कॉलेज में पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। गांव का एक तिहाई किसान जिनकी जमीन केन नदी के उस पार हैं। वह अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेकर आते-जाते हैं। बरसात के दिनों में यहां से दर्जनों गांव के यात्री तथा बाहरी यात्री इसी नाव घाट से प्रतिदिन निकलते हैं। हुन्नर शुक्ला, चुनूबाद शुक्ला, रामनारायण तिवारी, महेंद्र सिंह गौतम, वीरेंद्र सिंह चंदेल, राम बहादुर सिंह, जगन्नाथ निषाद, सजीवन निषाद, जगतपाल निषाद, रामचरण निषाद ने कहा कि यहां पर पक्के पुल की जरूरत है। इस नाव घाट से रोजाना यात्री जसपुरा, भरुहा सुमेरपुर, घाटमपुर, कानपुर तक के लिए इस शार्टकट रास्ते का प्रयोग करते आ रहे हैं।

फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद

फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद

फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद

फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद

फोटो 19- खप्टिहा कला में केन नदी में नाव के सहारे स्कूल जाते छात्र व छात्राएं। संवाद