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Banda News: केन नदी खतरनाक, 24 से अधिक गांव पानी से घिरे
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बांदा। मध्य प्रदेश की घाटियों में हुई झमाझम बारिश से केन नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। शनिवार की शाम केन नदी खतरे के निशान से 81 मीटर ऊपर बह रही है। इससे 12 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। राहत और बचाव कार्य शुरू हो गए हैं।
केन नदी का जलस्तर दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। शनिवार की शाम पानी 104.81 मीटर के पैमाने पर पहुंच गया, जो खतरे के लाल निशान से 81 सेंटीमीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के मुताबिक केन नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटा बढ़ रहा है। हालांकि मध्य प्रदेश स्थित गंगऊ व बरियारपुर वियर के इनकैचमेंट एरिया में बारिश कम होने से बांधों से केन नदी में गिरने वाले पानी में गिरावट आई है। सिंचाई विभाग के मुताबिक गंगऊ से दो लाख 95 हजार 358 और बरियारपुर से दो लाख 91 हजार 286 क्यूसिक पानी केन नदी गिर रहा है, जबकि शुक्रवार को गंगऊ से तीन लाख 7 हजार 478 और बरियारपुर से 3 लाख 24 हजार 64 क्यूसिक पानी केन नदी में गिर रहा था।
इधर, केन नदी के खतरे का निशान पार करने से नदी किनारे आबाद 24 से अधिक के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को गांव खाली करने और बाढ़ राहत चौकियों में पहुंचने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही लोग गृहस्थी आदि का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। एसडीएम, तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी निरंतर केन के जलस्तर पर नजर बनाए हुए। बाढ़ राहत चौकियों को खोल दिया गया है। उनमें लोगों के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है। एडीएम उमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि केन नदी के बढ़ने की रफ्तार को देखते हुए बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिए गए है।
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केन नदी का जलस्तर दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। शनिवार की शाम पानी 104.81 मीटर के पैमाने पर पहुंच गया, जो खतरे के लाल निशान से 81 सेंटीमीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के मुताबिक केन नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटा बढ़ रहा है। हालांकि मध्य प्रदेश स्थित गंगऊ व बरियारपुर वियर के इनकैचमेंट एरिया में बारिश कम होने से बांधों से केन नदी में गिरने वाले पानी में गिरावट आई है। सिंचाई विभाग के मुताबिक गंगऊ से दो लाख 95 हजार 358 और बरियारपुर से दो लाख 91 हजार 286 क्यूसिक पानी केन नदी गिर रहा है, जबकि शुक्रवार को गंगऊ से तीन लाख 7 हजार 478 और बरियारपुर से 3 लाख 24 हजार 64 क्यूसिक पानी केन नदी में गिर रहा था।
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इधर, केन नदी के खतरे का निशान पार करने से नदी किनारे आबाद 24 से अधिक के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को गांव खाली करने और बाढ़ राहत चौकियों में पहुंचने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही लोग गृहस्थी आदि का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। एसडीएम, तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी निरंतर केन के जलस्तर पर नजर बनाए हुए। बाढ़ राहत चौकियों को खोल दिया गया है। उनमें लोगों के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है। एडीएम उमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि केन नदी के बढ़ने की रफ्तार को देखते हुए बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिए गए है।
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