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केन-बेतवा गठजोड़...वन भूमि बता ली जमीन
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Ken-Betwa alliance... forest land has been told land
- फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड की सर्वाधिक चर्चित/विवादित और यूपी-एमपी के बीच खींचतान का मुद्दा बनी केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर केंद्र सरकार कुछ बैकफुट पर आ रही है। विशेषकर वन भूमि को लेकर यह स्थिति पैदा हुई है। परियोजना में ली जा रही वन भूमि की भरपाई के लिए मध्य प्रदेश सरकार और वन विभाग उतनी जमीन नहीं तलाश पाए। जो जमीन चिह्नित की गई, उसमें निजी भूमि भी शामिल है।
यह पेच फंसने के बाद जल शक्ति मंत्रालय परियोजना के नियम और शर्तों में बदलाव की कोशिशों में जुटा हुआ है। केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में मंजूर हुई थी। केंद्र, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकारों के बीच कई मुद्दों को लेकर सहमति न बन पाने से परियोजना अब तक धरातल पर नहीं आ पाई। हालांकि, अब दोनों राज्यों की सरकारों मेें सहमति बन गई है। उधर, परियोजना में लगभग 23 लाख पेड़ काटे जाने को लेकर कई स्वयं सेवी संगठन और पर्यावरण पैरोकार तथा कई राजनीतिक दल भी विरोध कर रहे हैं। सबसे बड़ा विरोध का मुद्दा परियोजना क्षेत्र में आबाद दर्जनों गांवों का है। इनमें आदिवासी रहते हैं। यह गांव उजड़ जाएंगे। सरकार इन्हें विस्थापित करने की बात कह रही है। परियोजना के लिए वन विभाग की जो जमीन ली जा रही उसके बदले में दूसरी जमीन केंद्र और मध्य प्रदेश सरकारों को वन विभाग को देना है, लेकिन अब इसमें पेच फंस गया है।
मध्य प्रदेश सरकार वन भूमि के एवज में 6.017 हेक्टेयर वन भूमि वन विभाग को नहीं दे पा रही। एमपी के मुख्यमंत्री ने इसमें हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब पर्यावरण मंत्रालय पर यह दबाव बनाया जा रहा कि नियम शर्तों में ढील दी जाए और बदला जाए। जल मंत्रालय के तत्कालीन सचिव यूपी सिंह ने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा था कि मध्य प्रदेश सरकार जरूरत के मुताबिक 6.017 हेक्टेयर से मात्र 4.206 हेक्टेयर गैर वन भूमि तलाश पाई है। सचिव ने लिखा था कि इस शर्त में ढील दी जाए। उधर, राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) महानिदेशक भोपाल सिंह ने भी वन महानिदेशक व सचिव को पत्र भेज चुके हैं कि परियोजना की शर्तों में ढील दी जानी चाहिए, पर फिलहाल केंद्र सरकार या वन विभाग ने कोई बदलाव नहीं किया है। अलबत्ता बैठकों में मुद्दे पर चर्चा होती रही है। केन-बेतवा के गठजोड़ को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। (संवाद)
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ग्रामीणों की भूमि को वन विभाग की बताई
केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए चिह्नित की गई वन विभाग की भूमि में भी चूक हुई। मध्य प्रदेश सरकार और एनडब्ल्यूडीए ने संयुक्त रूप से जो 4.206 हेक्टेयर जमीन को गैर वन भूमि बताते हुए वन विभाग को सौंपने की बात कही है, उसमें 823 हेेक्टेयर भूमि स्थानीय ग्रामीणों की है। इसमें वह आबाद हैं। समाचार और मीडिया वेबसाइट (द वायर) द्वारा आरटीआई में ली गई सूचना में यह बात सामने आई है कि वन भूमि के बदले अन्य भूमि देने के लिए जो जमीन चिह्नित की गई है उसमें काफी भूमि स्थानीय ग्रामीणों की है, सरकार की नहीं।
3.383 हेक्टेयर गैर वन भूमि
मध्य प्रदेश सरकार के अभिलेखों के मुताबिक, केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए ली गई भूमि में 3.383 हेक्टेयर ही गैर वन भूमि है। शेष भूमि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों की निजी भूमि भी शामिल है। मध्यप्रदेश सरकार ने केन नदी की पूरब दिशा में जिन 7 गांवों में 2179.09 भूमि गैर वन भूमि बताई है, उसमें 761.47 हेक्टेयर ग्रामीणों की है।
पन्ना टाइगर का बाघ क्षेत्र भी शामिल
केन-बेतवा नदी गठजोड़ में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क भी शामिल है। यहां काफी संख्या में बाघ आबाद हैं। बाघों के निवास वाला 105 वर्ग किमी क्षेत्र भी परियोजना में लिया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने एमपी के नौरादेही एवं रानी दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण्य और यूपी के रानीपुर वन्य जीव अभ्यारण्य को पन्ना टाइगर रिजर्व से जोड़ने की सलाह दे रखी है।
वन्य जीव संरक्षण को लैंड स्केप प्लान
एनडब्ल्यूडीए महानिदेशक भोपाल सिंह के मुताबिक, पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों को संरक्षण के लिए व्यापक लैंड स्केप मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है। यह दौधन बांध से होने वाले नुकसानों की भरपाई करेगा। उनका कहना है कि केन-बेतवा गठजोड़ बुंदेलखंड को पानी देने के साथ संरक्षित भी करेगा।
इसी साल हुआ है केंद्र व दो राज्यों में समझौता
केन-बेतवा लिंक के पानी बंटवारे को लेकर यूपी-एमपी सरकारों में काफी खींचतान चलती रही। अब इसी साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑनलाइन उपस्थिति में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
केन-बेतवा लिंक एक नजर में
केन-बेतवा नदी गठजोड़ में दौधन गांव के पास बांध बनेगा। यह 77 मीटर लंबा और 2 किमी चौड़ा होगा। इस बांध से बेतवा (झांसी) नदी तक 230 किमी लंबी नहर बनेगी। केन नदी का पानी इस नहर से बेतवा में जाएगा। बेतवा में 103 मेगावाट क्षमता का जल विद्युत केंद्र बनेंगा। करीब 62 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा। बुंदेलखंड के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया (एमपी) और बांदा, महोबा, झांसी, ललितपुर (यूपी) जिलों को लाभ मिलने की बात कही गई है।
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यह पेच फंसने के बाद जल शक्ति मंत्रालय परियोजना के नियम और शर्तों में बदलाव की कोशिशों में जुटा हुआ है। केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में मंजूर हुई थी। केंद्र, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकारों के बीच कई मुद्दों को लेकर सहमति न बन पाने से परियोजना अब तक धरातल पर नहीं आ पाई। हालांकि, अब दोनों राज्यों की सरकारों मेें सहमति बन गई है। उधर, परियोजना में लगभग 23 लाख पेड़ काटे जाने को लेकर कई स्वयं सेवी संगठन और पर्यावरण पैरोकार तथा कई राजनीतिक दल भी विरोध कर रहे हैं। सबसे बड़ा विरोध का मुद्दा परियोजना क्षेत्र में आबाद दर्जनों गांवों का है। इनमें आदिवासी रहते हैं। यह गांव उजड़ जाएंगे। सरकार इन्हें विस्थापित करने की बात कह रही है। परियोजना के लिए वन विभाग की जो जमीन ली जा रही उसके बदले में दूसरी जमीन केंद्र और मध्य प्रदेश सरकारों को वन विभाग को देना है, लेकिन अब इसमें पेच फंस गया है।
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मध्य प्रदेश सरकार वन भूमि के एवज में 6.017 हेक्टेयर वन भूमि वन विभाग को नहीं दे पा रही। एमपी के मुख्यमंत्री ने इसमें हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब पर्यावरण मंत्रालय पर यह दबाव बनाया जा रहा कि नियम शर्तों में ढील दी जाए और बदला जाए। जल मंत्रालय के तत्कालीन सचिव यूपी सिंह ने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा था कि मध्य प्रदेश सरकार जरूरत के मुताबिक 6.017 हेक्टेयर से मात्र 4.206 हेक्टेयर गैर वन भूमि तलाश पाई है। सचिव ने लिखा था कि इस शर्त में ढील दी जाए। उधर, राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) महानिदेशक भोपाल सिंह ने भी वन महानिदेशक व सचिव को पत्र भेज चुके हैं कि परियोजना की शर्तों में ढील दी जानी चाहिए, पर फिलहाल केंद्र सरकार या वन विभाग ने कोई बदलाव नहीं किया है। अलबत्ता बैठकों में मुद्दे पर चर्चा होती रही है। केन-बेतवा के गठजोड़ को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। (संवाद)
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ग्रामीणों की भूमि को वन विभाग की बताई
केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए चिह्नित की गई वन विभाग की भूमि में भी चूक हुई। मध्य प्रदेश सरकार और एनडब्ल्यूडीए ने संयुक्त रूप से जो 4.206 हेक्टेयर जमीन को गैर वन भूमि बताते हुए वन विभाग को सौंपने की बात कही है, उसमें 823 हेेक्टेयर भूमि स्थानीय ग्रामीणों की है। इसमें वह आबाद हैं। समाचार और मीडिया वेबसाइट (द वायर) द्वारा आरटीआई में ली गई सूचना में यह बात सामने आई है कि वन भूमि के बदले अन्य भूमि देने के लिए जो जमीन चिह्नित की गई है उसमें काफी भूमि स्थानीय ग्रामीणों की है, सरकार की नहीं।
3.383 हेक्टेयर गैर वन भूमि
मध्य प्रदेश सरकार के अभिलेखों के मुताबिक, केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए ली गई भूमि में 3.383 हेक्टेयर ही गैर वन भूमि है। शेष भूमि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों की निजी भूमि भी शामिल है। मध्यप्रदेश सरकार ने केन नदी की पूरब दिशा में जिन 7 गांवों में 2179.09 भूमि गैर वन भूमि बताई है, उसमें 761.47 हेक्टेयर ग्रामीणों की है।
पन्ना टाइगर का बाघ क्षेत्र भी शामिल
केन-बेतवा नदी गठजोड़ में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क भी शामिल है। यहां काफी संख्या में बाघ आबाद हैं। बाघों के निवास वाला 105 वर्ग किमी क्षेत्र भी परियोजना में लिया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने एमपी के नौरादेही एवं रानी दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण्य और यूपी के रानीपुर वन्य जीव अभ्यारण्य को पन्ना टाइगर रिजर्व से जोड़ने की सलाह दे रखी है।
वन्य जीव संरक्षण को लैंड स्केप प्लान
एनडब्ल्यूडीए महानिदेशक भोपाल सिंह के मुताबिक, पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों को संरक्षण के लिए व्यापक लैंड स्केप मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है। यह दौधन बांध से होने वाले नुकसानों की भरपाई करेगा। उनका कहना है कि केन-बेतवा गठजोड़ बुंदेलखंड को पानी देने के साथ संरक्षित भी करेगा।
इसी साल हुआ है केंद्र व दो राज्यों में समझौता
केन-बेतवा लिंक के पानी बंटवारे को लेकर यूपी-एमपी सरकारों में काफी खींचतान चलती रही। अब इसी साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑनलाइन उपस्थिति में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
केन-बेतवा लिंक एक नजर में
केन-बेतवा नदी गठजोड़ में दौधन गांव के पास बांध बनेगा। यह 77 मीटर लंबा और 2 किमी चौड़ा होगा। इस बांध से बेतवा (झांसी) नदी तक 230 किमी लंबी नहर बनेगी। केन नदी का पानी इस नहर से बेतवा में जाएगा। बेतवा में 103 मेगावाट क्षमता का जल विद्युत केंद्र बनेंगा। करीब 62 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा। बुंदेलखंड के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया (एमपी) और बांदा, महोबा, झांसी, ललितपुर (यूपी) जिलों को लाभ मिलने की बात कही गई है।

Ken-Betwa alliance... forest land has been told land- फोटो : BANDA