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बांदा: संक्रमण काबू में, पर प्लांट निर्माण धीमा, अब ऑक्सीजन प्लांट सात जून को होगा चालू
Thu, 27 May 2021 11:19 PM IST
कानपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 11:19 PM IST
सार
अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से लेकर मई के पहले पखवाड़े के बाद (करीब एक माह) तक ताबड़तोड़ संक्रमितों की मौतों और ऑक्सीजन संकट के शोर के बाद मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन प्लांट स्थापना पर विशेष जोर दिया।
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ऑक्सीजन प्लांट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना संक्रमण के केसों में कमी आई तो स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार भी अब धीमी पड़ने लगी है। ऑक्सीजन की किल्लत से ताबड़तोड़ हुई मौतों पर शासन ने मेडिकल कालेजों और अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के आदेश दिए थे। यहां राजकीय मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट 30 मई से शुरू होना था, लेकिन उपकरण न आने से अब सात जून तक प्लांट चालू होने के आसार हैं।
इस लेटलतीफी की वजह देसी-विदेशी उपकरणों का अब तक यहां न पहुंचना बताया जा रहा है। शासन ने सबसे पहले चित्रकूटधाम मंडल के राजकीय मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापना की मंजूरी दी थी। सितंबर माह में इस पर कार्य शुरू हो गया था। टेंडर प्रक्रिया में लेटलतीफी से निर्माण लगभग छह माह तक अटका रहा।
अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से लेकर मई के पहले पखवाड़े के बाद (करीब एक माह) तक ताबड़तोड़ संक्रमितों की मौतों और ऑक्सीजन संकट के शोर के बाद मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन प्लांट स्थापना पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में राजकीय मेडिकल कालेज में भी लगभग डेढ़ करोड़ रुपये लागत वाले ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापना में तेजी आ गई।
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राज्य बजट से यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड बांदा यूनिट ने काम शुरू कर दिया। 23 मई को बुंदेलखंड के दौरे पर बांदा आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 30 मई तक प्लांट शुरू करने का वादा किया गया, लेकिन उपकरणों के अभाव में कार्यदायी संस्था ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किया वादा पूरा नहीं कर पा रही।
ये है जियो लाइट फिल्टर
यह विशेष फिल्टर यूरोप में तैयार होता है। यहां इसका निर्माण नहीं होता। फिल्टर की खास बात यह है कि यह हवा से ऑक्सीजन तैयार करता है। पर्यावरण में ऑक्सीजन 21 फीसदी और नाइट्रोजन 79 प्रतिशत है। फिल्टर नाइट्रोजन को एडजॉर्ब कर ऑक्सीजन बनाता है।
टेक्नीशियन न होने से वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवा
टेक्नीशियन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर हैं। नतीजे में आईसीयू/एचडीयू में लगे कीमती वेंटिलेटर जुगाड़ व्यवस्था से चलाए जा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कालेज में 109 वेंटिलेटर हैं। इनमें लगभग आधा सैकड़ा वेंटिलेटर शोपीस बने हैं। कमोवेश यही स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां कुल 27 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इसके संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं है। जुगाड़ व्यवस्था से चलाया जा रहा है। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि दो वेंटिलेटर पर एक टेक्नीशियन का मानक है, लेकिन टेक्नीशियन का टोटा है। कोरोना की दूसरी लहर में गंभीर संक्रमितों की जान बचाने के लिए मजबूरन सीनियर डाक्टरों को प्रशिक्षण दिलाकर वेंटिलेटर का संचालन करना पड़ा। साठ जूनियर रेजीडेंस, साठ नर्सिंग स्टाफ और 86 इंटर्नशिप को प्रशिक्षित कर व्यवस्था संभाले हैं।
सौ-सौ बेड के पीआईसीयू, पोस्ट कोविड वार्ड तैयार
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की संभावना के मद्देनजर शासन-प्रशासन अभी से तैयारियों में जुट गया। इसी के मद्देनजर राजकीय मेडिकल कालेज में 100 बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) तैयार हो गया। पूर्व में यूनिट में 50 बेड थे। सीएम के आदेश पर 50 बेड और बढ़ा दिए गए। इसके अलावा पोस्ट कोविड मरीजों के लिए भी 100 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है।
प्रधानाचार्य ने बताया कि अब पीआईसीयू 100 बेड का हो गया। 50 बेड आइसोलेशन में और इतने ही बेड आईसीयू/एचडीयू में हैं। 28 मई तक बच्चों वाले बेड व अन्य उपकरण प्राप्त हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पोस्ट कोविड (संक्रमण के बाद निगेटिव होने वाले) मरीजों के लिए भी 100 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है।
कोविड आइसोलेशन वार्ड के बेडों में कटौती कर पोस्ट कोविड वार्ड तैयार किया गया है। 300 के स्थान पर अब 200 बेड का आइसोलेशन है। मौजूदा में 400 बेड हैं। मुख्यमंत्री ने 300 बेड और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है। तीन सौ बेड के लिए अलग भवन/वार्ड बनाया जाएगा। शासन को भेजने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने एस्टीमेट तैयार कर लिया है।
ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के उपकरण अब तक न आने पर कार्यदायी संस्था ने 7 जून तक प्लांट चालू करने की बात कही है। ऑक्सीजन निर्माण के लिए जियो लाइट फिल्टर मशीन यूरोप से आनी है। इसे यहां आने में वक्त लगेगा। मांग ज्यादा होने से उपकरण नहीं मिल पा रहे। भवन तैयार हो गया है। प्लांट की क्षमता 200 डी-टाइप प्रतिदिन सिलिंडर है।-डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा
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इस लेटलतीफी की वजह देसी-विदेशी उपकरणों का अब तक यहां न पहुंचना बताया जा रहा है। शासन ने सबसे पहले चित्रकूटधाम मंडल के राजकीय मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापना की मंजूरी दी थी। सितंबर माह में इस पर कार्य शुरू हो गया था। टेंडर प्रक्रिया में लेटलतीफी से निर्माण लगभग छह माह तक अटका रहा।
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अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से लेकर मई के पहले पखवाड़े के बाद (करीब एक माह) तक ताबड़तोड़ संक्रमितों की मौतों और ऑक्सीजन संकट के शोर के बाद मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन प्लांट स्थापना पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में राजकीय मेडिकल कालेज में भी लगभग डेढ़ करोड़ रुपये लागत वाले ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापना में तेजी आ गई।
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राज्य बजट से यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड बांदा यूनिट ने काम शुरू कर दिया। 23 मई को बुंदेलखंड के दौरे पर बांदा आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 30 मई तक प्लांट शुरू करने का वादा किया गया, लेकिन उपकरणों के अभाव में कार्यदायी संस्था ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किया वादा पूरा नहीं कर पा रही।
ये है जियो लाइट फिल्टर
यह विशेष फिल्टर यूरोप में तैयार होता है। यहां इसका निर्माण नहीं होता। फिल्टर की खास बात यह है कि यह हवा से ऑक्सीजन तैयार करता है। पर्यावरण में ऑक्सीजन 21 फीसदी और नाइट्रोजन 79 प्रतिशत है। फिल्टर नाइट्रोजन को एडजॉर्ब कर ऑक्सीजन बनाता है।
टेक्नीशियन न होने से वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवा
टेक्नीशियन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर हैं। नतीजे में आईसीयू/एचडीयू में लगे कीमती वेंटिलेटर जुगाड़ व्यवस्था से चलाए जा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कालेज में 109 वेंटिलेटर हैं। इनमें लगभग आधा सैकड़ा वेंटिलेटर शोपीस बने हैं। कमोवेश यही स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां कुल 27 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इसके संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं है। जुगाड़ व्यवस्था से चलाया जा रहा है। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि दो वेंटिलेटर पर एक टेक्नीशियन का मानक है, लेकिन टेक्नीशियन का टोटा है। कोरोना की दूसरी लहर में गंभीर संक्रमितों की जान बचाने के लिए मजबूरन सीनियर डाक्टरों को प्रशिक्षण दिलाकर वेंटिलेटर का संचालन करना पड़ा। साठ जूनियर रेजीडेंस, साठ नर्सिंग स्टाफ और 86 इंटर्नशिप को प्रशिक्षित कर व्यवस्था संभाले हैं।
सौ-सौ बेड के पीआईसीयू, पोस्ट कोविड वार्ड तैयार
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की संभावना के मद्देनजर शासन-प्रशासन अभी से तैयारियों में जुट गया। इसी के मद्देनजर राजकीय मेडिकल कालेज में 100 बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) तैयार हो गया। पूर्व में यूनिट में 50 बेड थे। सीएम के आदेश पर 50 बेड और बढ़ा दिए गए। इसके अलावा पोस्ट कोविड मरीजों के लिए भी 100 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है।
प्रधानाचार्य ने बताया कि अब पीआईसीयू 100 बेड का हो गया। 50 बेड आइसोलेशन में और इतने ही बेड आईसीयू/एचडीयू में हैं। 28 मई तक बच्चों वाले बेड व अन्य उपकरण प्राप्त हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पोस्ट कोविड (संक्रमण के बाद निगेटिव होने वाले) मरीजों के लिए भी 100 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है।
कोविड आइसोलेशन वार्ड के बेडों में कटौती कर पोस्ट कोविड वार्ड तैयार किया गया है। 300 के स्थान पर अब 200 बेड का आइसोलेशन है। मौजूदा में 400 बेड हैं। मुख्यमंत्री ने 300 बेड और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है। तीन सौ बेड के लिए अलग भवन/वार्ड बनाया जाएगा। शासन को भेजने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने एस्टीमेट तैयार कर लिया है।
ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के उपकरण अब तक न आने पर कार्यदायी संस्था ने 7 जून तक प्लांट चालू करने की बात कही है। ऑक्सीजन निर्माण के लिए जियो लाइट फिल्टर मशीन यूरोप से आनी है। इसे यहां आने में वक्त लगेगा। मांग ज्यादा होने से उपकरण नहीं मिल पा रहे। भवन तैयार हो गया है। प्लांट की क्षमता 200 डी-टाइप प्रतिदिन सिलिंडर है।-डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा