फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   India's real strength is nature, environment

भारत की असली ताकत प्रकृति, पर्यावरण

Sat, 11 Sep 2021 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:45 PM IST
विज्ञापन
India's real strength is nature, environment
बांदा। भारत की असली ताकत प्रकृति और पर्यावरण हैं। इनकी अनदेखी कर विकास की जो कहानी लिखने की कोशिश की जाएगी उससे पर्यावरणीय चक्र बिगड़ना और प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। कोरोना संकट ने दुनिया को वाकिफ करा दिया कि प्रकृति केंद्रित ही विकास का सही मॉडल है।
विज्ञापन

यह बात राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन संस्थापक और देश के विख्यात विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कही। वह शनिवार को बड़ोखर खुर्द गांव स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेेंटर में आयोजित प्रकृति केंद्रित विकास संवाद गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन

गोविंदाचार्य पिछले 28 अगस्त से यमुना यात्रा एवं अध्ययन प्रवास पर निकले हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति केंद्रित विकास की दिशा में कार्य करना वक्त का तकाजा है। हमारा गांव हमारा देश। हमारा जिला हमारी दुनिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबको भोजन सबको काम इत्यादि मुद्दों पर आग्रह बनाए रखते हुए गतिविधियां पिछले करीब 16 वर्षों में सृजित हुईं हैं। कहा कि 2010 में उन्होंने प्रकृति केंद्रित विकास की बात कही थी। लगता है कि आज उस पर जोर देकर क्रियान्वयन का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा भी है और भारत में आत्मनिर्भर होने का साहस और साधन भी है। शासन और प्रशासन में बैठे लोगों को इस बात पर विश्वास करना है। उसी के अनुसार योजनाएं बनानी हैं।
गोष्ठी के मेजबान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने गोविंदाचार्य समेत उनके साथ आए लोगों का स्वागत व सम्मान किया। उन्हें स्मृति चिह्न दिए। गोविंदाचार्य के साथ आईं सुप्रीम कोर्ट की वकील हरियाणा की सुबुही खान को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को हमीरपुर के जैविक किसान देव सिंह, अधिवक्ता आनंद सिन्हा, शिक्षक रामशंकर यादव, छतरपुर के किसान अर्जुन सिंह, डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी, विद्याधाम समिति के राजा भइया, साहित्यकार प्रमोद मलय, किसान जाहिद व मजहारुल हसन आदि ने भी संबोधित किया।
कृषि कानूनों में न करें एक-दूसरे पर शक
विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। संबंधित पक्ष एक-दूसरे पर शक का रवैया न अपनाएं।
मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने 10 माह पहले आंदोलन की शुरुआत में ही उपरोक्त सुझाव दिए थे। दोनों पक्षों को प्रतिष्ठा का मुद्दा भी नहीं बनाना चाहिए। इसमें कई नए पहलू जुड़ें हैं, इसलिए यह संवेदनशील भी हो गया है।
बताया कि उनकी यमुना यात्रा एवं अध्ययन प्रवास 28 अगस्त से शुरू हुआ है। 15 सितंबर को प्रयागराज में खत्म होगा। गोविंदाचार्य ने कहा कि हमने पिछले 60 सालों में देश चलाने की डिजाइन को बिगाड़ दिया। उप निवेशवादी व्यवस्था को नहीं रोका गया।

गोष्ठी में ये रहे मौजूद
भाजपा नेता संतोष कुमार गुप्त, राजकुमार राज, अमित सेठ भोलू, महिला किसान निधि त्रिपाठी, पूर्व प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त, लवलेश सिंह, डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह, किसान पुष्पेंद्र भाई, संत कुमार गुप्ता, राजा सिंह, श्यामजी निगम, सचिन चतुर्वेदी, ओमप्रकाश मसुरहा, रिजवान अली, जुनैद अहमद आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed